पटना से चंपारण गांधी यात्रा: भूमिहीनों के अधिकार और महिला सशक्तिकरण की  मांग

हाजीपुर/वैशाली/मुजफ्फरपुर | 12 अप्रैल 2026

गांधी की धरती पर एक बार फिर वही सवाल गूंज रहा है—क्या आज़ादी के दशकों बाद भी गरीब और भूमिहीन अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित रहेंगे?

पटना से चंपारण तक निकली “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” पदयात्रा ने इस सवाल को नए सिरे से जीवंत कर दिया है।

यात्रा के तीसरे दिन हाजीपुर और वैशाली में यात्रियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भूमिहीनों को जमीन का अधिकार मिलना चाहिए और महिलाओं की अहिंसक शक्ति से ही समाज का वास्तविक नवनिर्माण संभव है।

🚶‍♂️ गांधी की विरासत को याद करती पदयात्रा

10 अप्रैल से शुरू हुई यह पदयात्रा आज़ादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से आयोजित की गई है। तीसरे दिन यात्रा दल सुबह हाजीपुर के विराटनगर से पैदल निकलकर गांधी चौक होते हुए गांधी आश्रम पहुंचा।

इसी आश्रम की नींव 7 दिसंबर 1920 को महात्मा गांधी ने रखी थी। यहां सर्वधर्म प्रार्थना में स्थानीय लोग और बच्चे भी शामिल हुए, जिससे यात्रा एक जन-अभियान का रूप लेती दिखी।

👩‍🌾 महिलाओं और किशोरियों की भागीदारी बनी ताकत

वैशाली के गोरौल चौक पर यात्रा का भव्य स्वागत “मेरी पंचायती मेरी शक्ति” और “किशोरी शक्ति मंच” की लड़कियों और कार्यकर्ताओं ने किया। ये संगठन क्षेत्र में बाल विवाह के खिलाफ संघर्ष और लड़कियों की शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं।

सभा की शुरुआत में महाराष्ट्र से आए युवा साथी मयूर ने “जय जगत” गीत प्रस्तुत कर माहौल को जनांदोलन की ऊर्जा से भर दिया।

⚖️ भूमि अधिकार और न्याय के सवाल केंद्र में

यात्रा के आयोजक अशोक भारत ने कहा कि यह यात्रा जनता के बीच जाकर उनके बुनियादी अधिकार, सुरक्षा और न्याय के मुद्दे उठाने का प्रयास है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा, पुलिस जांच की निष्पक्षता और न्याय में देरी पर चिंता जताई।

सबसे बड़ा मुद्दा भूमिहीनों के अधिकार का रहा। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों में वर्षों से लंबित सरकारी पट्टों के बावजूद लोगों को जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे सरकारी योजनाओं से भी वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने विनोबा भावे के भूदान आंदोलन की अधूरी विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि चार डिसमिल जमीन का सरकारी वादा आज भी कागजों में ही सीमित है।

🌾 “जो जोतता है, वही मालिक” — उठी पुरानी मांग

सभा में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि खेती करने वाला ही जमीन का असली हकदार होना चाहिए। भूमि अधिकार के बिना सामाजिक न्याय अधूरा है।

यह भी कहा गया कि एक ओर बड़े उद्योगपतियों को सस्ते दरों पर हजारों एकड़ जमीन दी जाती है, वहीं गरीबों को उनका कानूनी अधिकार भी नहीं मिल पाता। इसलिए मांग उठी कि—

• जिन्हें जमीन का पर्चा मिला है, उन्हें कब्जा दिया जाए

• जिनके पास कब्जा है, उन्हें कानूनी अधिकार मिले

महिलाओं की अहिंसक शक्ति पर भरोसा

यात्रा के दौरान वक्ताओं ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि समाज में वास्तविक परिवर्तन महिलाओं की जागरूकता और भागीदारी से ही संभव है। महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रही है।

कस्तूरबा गांधी के उदाहरण के साथ यह संदेश दिया गया कि अहिंसाकीसबसेबड़ीशक्तिमहिलाओंमेंनिहितहै, जिसे पहचानने और संगठित करने की जरूरत है।

पटना से चंपारण गांधी यात्रा में महिलाओं की भागीदारी . गांधी यात्रा हाजीपुर में पदयात्रा करते सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाएं
गांधी यात्रा में महिलाओं की भागीदारी

🌍 युद्ध और हिंसा के खिलाफ गांधी का संदेश

सभा के अंत में बढ़ती वैश्विक हिंसा और युद्ध के खिलाफ आवाज उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों और सैनिक परिवारों को होता है, जबकि हथियारों का व्यापार करने वाले लाभ कमाते हैं।

इस दौरान गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

📍 मुजफ्फरपुर में तीसरे दिन का समापन

दिन भर की पदयात्रा के बाद दल मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी प्रखंड स्थित अंबेडकर भवन पहुंचा, जहां सर्वधर्म प्रार्थना के साथ तीसरे दिन का समापन हुआ।

🧭 सिर्फ यात्रा नहीं, सामाजिक जागरण का प्रयास

सर्व सेवा संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह यात्रा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में जागृति और नवनिर्माण का प्रयास है। यह चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक विरासत को वर्तमान के सवालों से जोड़ती है—जहां आज भी न्याय, समानता और अधिकार की लड़ाई जारी है।

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