महादेव शिव के विविध रूप

ॐ नमः शिवाय।

आज शिव रात्रि है। शिव महादेव हैं। तुलसी उनकी मूर्तिमान विश्वास और पार्वती की श्रद्धा के रूप में बन्दना करते हैं। – बंदों भवानी शंकरों, श्रद्धा विश्वास रूपीणो।
शिव नटराज हैं। उनके नर्तन के ताल- तरंग से वैश्विक ऊर्जा का सृजन होता है। यही ऊर्जा ,वैश्विक पदार्थ कण का आधार है। यह ताल- तरंग , ऊर्जा और पदार्थ कण दोनों हैं।
शिव महाकाल हैं। काल समय है। समय क्षणिक है। प्रति पल बदलता रहता है। शिव कालातीत हैं। शिव ऊर्जा तरंग, पदार्थ कण और सापेक्ष समय तीनों हैं।
शिव महामृत्युंजय और प्रलयंकर दोनों हैं। समस्त विश्व के तमाम रिस्तों का मूल आधार विश्वास है। अविश्वास उन रिस्तों के संसार का प्रलय कर देता है। विश्वास के सहारे लोग एवरेस्ट जैसे कठिनाइयों के शिखर को जीवन में जीत लेते हैं।
शिव समष्टि अहंकार हैं। तुलसी विश्व चराचर पुरुष का वर्णन करते हुए कहते हैं-
अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
मनुज बास सचराचर रूप राम भगवान ।।
शिव-समष्टि अहंकार, ब्रह्मा-समष्टि बुद्धि, चंद्रमा-समष्टि मन और विष्णु-समष्टि चित्त हैं।
चित्त विशिष्ट सनातनी अवधारणा है। वैसे तो चित्रकूट को पुरातत्वविद पहाड़ों की शिलाओं पर पुराने लोगों द्वारा बनाये गए भित्ति चित्रों के साथ जोड़ कर देखते हैं लेकिन भक्त उस स्थान के रूप में देखते हैं जहाँ चित्त को कूट कूट कर सुन्दर स्नेह बन बना दिया गया है और उसमें सीता राम जी बिहार करते हैं।
राम कथा मंदाकिनी, चित्रकूट चित चारु।
तुलसी सुभग सनेह बन, सिय रघुबीर बिहारू।।

 शिव और विष्णु के बीच युद्धों के पौराणिक कथानकों की तमाम कहानियाँ हैं। यह अहंकार और चित्त के बीच चलने वाले द्वंद के कथानक हैं। अहंकार जब मन के काम, क्रोध और लोभ तीनों पूरों /नगरों को जीत कर त्रिपुरारि के रूप में चित्त का साक्षत्कार करता है तो स्तम्भित हो जाता है। चित्त तो मूलाधार है। मन को जीतना है। जीत कर चित्त में स्थित हो जाना है। उससे योगाकार हो जाना है। इसीलिए महर्षि पतंजलि के अनुसार-योगः चित्त वृत्ति निरोधः।
चित्त में स्थिर हो जाने के बाद जीतने को कुछ नहीं बचता। जीतने के साधन रूपी धनुष की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। धनुष स्तंभित हो कर चढ़ने के गुण का त्याग कर देता है। इस धनुष को शिव ज्ञानी जनक को दे देते हैं। साक्षत् ब्रह्म को पहचानने की कशौटी के रूप में। इसे तोड़ने की शर्त आदि शक्ति सीता के पति के रूप में वरण का आधार है। 
 शिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव हम सभी को काम क्रोध और लोभ के तीनों पुरों में बिचरित करते रहने वाले मन को नियंत्रित कर चित्त में स्थिर होने और शक्ति स्वरूपा सीता के पति राम के चरणों में शरणागति होने का वरदान प्रदान करें। 

हर हर महादेव, ॐ नमः शिवाय।

राम नारायण सिंह।
महाशिवरात्रि २६/२/२०२५

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