मार्ककार्नी का दावोस भाषण: कनाडा के प्रधानमंत्री से भारत तक — क्या कहा गया और क्यों महत्वपूर्ण है
2026 के विश्व आर्थिक मंच (WEF) में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने एक ऐसा भाषण दिया जो दुनिया भर के मुख्य मीडिया शीर्षकों में रहा और जिसे The Guardian, Reuters जैसे मीडिया ने वैश्विक order के टूटने की सच्चाई के रूप में पेश किया है।
कार्नी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज की दुनिया वह नहीं रही जो नियम-आधारित व्यवस्था पर चलती है। जो देश पुराने अनुमान पर निर्भर हैं, वे रणनीतिक जोखिम में हैं।
मार्क कार्नी कौन हैं — और क्यों उनकी बात मायने रखती है?
मार्क कार्नी केवल एक अर्थशास्त्री नहीं हैं — वे कनाडा के प्रधानमंत्री हैं, और उनका भाषण दुनिया भर के राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व को सीधे संबोधित करता है।
वे:
• कनाडा के केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर,
• बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर,
• संयुक्त राष्ट्र के जलवायु वित्त विशेष दूत भी रहे हैं।
प्रधानमंत्री के रूप में उनका बोलना इस भाषण को और महत्व देता है, क्योंकि यह भविष्य की वैश्विक नीतियों के लिए संकेत देता है।
उन्होंने दावोस में क्या कहा?
कार्नी ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था अब “महाशक्तियों की खुली प्रतिस्पर्धा” की ओर बढ़ रही है — जहाँ नियम शक्ति से बदलते हैं। उन्होंने कहा कि “नियमों पर आधारित व्यवस्था” अब एक आरामदायक भ्रम बन चुकी है, और मजबूत वही बचेंगे जो सामूहिक शक्ति जुटाएँगे।
उनका भाषण किसके लिए था?
कार्नी का संदेश मध्य शक्तियों के लिए था — जैसे कि भारत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका।
वे कहते हैं कि अकेले बड़ी शक्तियों के साथ बातचीत करना अक्सर नियंत्रण में समर्पण जैसा होता है।
वे क्या समाधान सुझा रहे हैं?
कार्नी ने व्यावहारिक रणनीति दी:
1. नियमों के भ्रम से बाहर निकलिए,
2. अकेले नहीं — सामूहिक रूप से मिलकर काम कीजिए,
3. नैतिकता को हर स्थिति में समान रूप से लागू कीजिए,
4. आर्थिक मजबूती को राष्ट्रीय सुरक्षा मानें।
विश्व मीडिया क्या कह रहा है?
मुख्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया — जैसे Guardian और Reuters — ने इस भाषण को इसलिए महत्वपूर्ण बताया क्योंकि:
• यह पुरानी व्यवस्था की विफलता को स्वीकार करता है;
• यह मध्य शक्तियों से साझा रणनीति की अपील करता है;
• और यह दुनिया को यह संकेत देता है कि पुरानी शर्तें अब प्रभावी नहीं है ।
भारत के लिए इसका क्या अर्थ है?
भारत वर्तमान में:
• अमेरिका से तकनीकी और आर्थिक दबाव,
• चीन की चुनौतियाँ,
• और वैश्विक शक्ति संतुलन से गुजर रहा है।
कार्नी का संदेश स्पष्ट है:
रणनीतिक स्वायत्तता को सक्रिय रूप से बनाना होगा, केवल संतुलन से नहीं।
भारत के लिए इसका अर्थ है:
• मध्य शक्तियों के साथ गठबंधन,
• आर्थिक विविधीकरण,
• स्वावलंबी सप्लाई चैन,
• स्पष्ट और सुसंगत कूटनीति।
मुख्य संदेश
आज दुनिया साझा नियमों से नहीं,
बल्कि संगठित शक्ति से बदल रही है।
जो देश सत्ता को संगठित नहीं करेंगे, उन्हें दूसरों द्वारा प्रबंधित किया जाएगा।



