आन लाइन कवि गोष्ठी का नया प्रयोग

समरसता दिवस पर बाबा साहब को श्रद्धांजलि

प्रयागराज. 14 अप्रैल बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के 129 वीं जयंती के अवसर पर प्रयागराज की महिला साहित्यकारों ने आनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया। काव्य के हर रुप की मनोहारी प्रस्तुति कर कवयित्रियों ने अपने भाव व्यक्त किये। आनलाइन प्रस्तुति के बावजूद सरस्वती पूजन से लेकर आभार ज्ञापन तक का खूबसूरती से निर्वहन किया गया।अध्यक्ष और मुख्य अतिथि नगर की सुप्रसिद्ध  रचनाकार द्वय रमोला रुथ लाल और जयश्री मोहन जी रहीं। संयोजन रचना सक्सेना एवं डा. नीलिमा मिश्रा द्वारा किया गया।

नीलिमा मिश्रा जी ने जो कविता प्रस्तुत की…

भारत का संविधान तुम्हारे ही दम से है

कोई नही है ऊँचा न कोई अछूत है

समरसता का विधान तुम्हारे ही दम से है।

रचना सक्सेना ने सुनाया… दर्द गहराया आँखों में लो चल पड़ी कलम.

कभी घर कभी बाहर, कभी गांव कभी शहर

डगमगाती किश्तियाँ देखी फिर से उठी अगन लो चल पड़ी कलम।

उर्वशी उपाध्याय’प्रेरणा ने सुनाया.. 

जिंदा,पति की लाश के संग

        हुई सती निज प्राण तजे,

उफ़ न करे- हर कष्ट सहे,

        क्यों बालक ही वंशज है..

कवि सम्मेलन में  रचना सक्सेना,  डा. नीलिमा मिश्रा ,  महक जौनपुरी, कविता उपाध्याय, जया मोहन, मीरा सिन्हा, उर्वशी उपाध्याय’प्रेरणा’,  डॉ अर्चना पांडेय, रेनू मिश्रा, सरिता श्रीवास्तव डा. उपासना  शाम्भवी  , इन्दू सिन्हाअन्नपूर्णा मालवीय शुभाषिनी गीता सिंह, रमोला रुथ लाल ललिता नारायणी जी, अना इलाहाबादी  चेतना सिंह, अर्चना जायसवाल, संपदा मिश्रा, कीर्ति जायसवाल, संतोष मिश्रा , स्नेहा उपाध्याय रचना , सुनीता श्रीवास्तव कृतिका मालवीय  रजिया सुल्तान, सुधा शर्मा, रेखा सक्सेना ने अपनी कविताओं से बाबा साहब को नमन किया।

क्रमश :  

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