गंगा नदी का पानी पीने के लायक नहीं…

गंगा

नदी का पानी पीने के लायक नहीं:

उत्तर प्रदेश Pollution Control Board ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को बताया है कि अब गंगा नदी का पानी पीने योग्य नहीं है।
जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता, सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की Division Bench ने 28 जनवरी को RE गंगा प्रदूषण की PIL पर सुनवाई करते हुए यह बताया कि Pollution Control Board के द्वारा affidavit में कहा गया है कि गंगा का पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन इसमें स्नान किया जा सकता है। इस याचिका में यह बताया गया है कि 17 नालियां गंगा में और 25 छोटी नदियां यमुना में गिरती हैं। इसी कारण गंगा इतनी मैली हो गई हैं।

प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट का कहना है कि गंगा या यमुना में कोई भी नाला सीधे नहीं गिरता है।

गंगा नदी का पानी…2011 में गंगा में 50% वाटर फ्लो रखने के लिए केंद्र सरकार के जरिए दिए गए निर्देशों का
पालन नहीं किया गया और कहा गया कि गंगा बेसिन प्राधिकरण की सुरक्षा के लिए एक परियोजना पर विचार किया जा रहा है।
कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से रिपोर्ट भी मांगी है।
2006 में न्यायालय द्वारा नदी की रक्षा, पानी रिस्टोर करने के लिए मुकदमा भी दायर किया था।

ए.के. गुप्ता, एमिकस क्यूरीए और एडवोकेट ने कहा कि याचिका में किए गए खुलासे सही नहीं हैं, बहुत सारे नालियों का पानी सीधे दोनों नदियों में बहाया
जा रहा है, जिसके कारण अब पानी ने भी रंग बदल दिया है। न्यायालय के द्वारा समय-समय पर कई निर्देशों के बावजूद नालों की संख्या अब भी ज्यादा है और उन नालों का गन्दा पानी आज भी नदियों में लगातार गिर रहा है, सभी नालों को STP के माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए।

कोर्ट ने Amicus Curiae और  A.K. Gupta को यह निर्देश दिया है कि वो PERSONALLY हर STP, अन्य डिस्चार्ज प्वाइंट और घाटों को विजिट करें और बताएं जिससे वहां की स्थिति को ठीक किया जा सके ताकि नाली और सीवरेज के पानी की दिक्कत को जड़ से ख़त्म किया जा सके।

जिला मजिस्ट्रेट प्रयागराज ने कहा कि सारे STP सही से काम कर रहे हैं और सभी डिस्चार्ज पैरामीटर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर हैं।

प्रयागराज के नगर आयुक्त ने कहा कि तीन एजेंसियों को bioremediation के द्वारा नाली के ट्रीटमेंट के लिए नियुक्त किया गया है। साथ ही 6 नालों का इलाज
National Environmental Engineering Research Institute के द्वारा किया जा रहा है।

कोर्ट ने petitioner को एक रिकॉर्ड सबूत लाने को कहा है कि गंगा नदी का पानी अभी कैसा है और साथ ही यह भी कहा है कि वो देखे की एसटीपी काम कर रहे हैं या नहीं। नाला का गन्दा पानी क्या गंगा और यमुना नदियों में सीधे डिस्चार्ज किया जा रहा है।

नगर आयुक्त, नगर निगम, प्रयागराज ने अपने Affidavit में 15 जुलाई, 2018 की अधिसूचना के उल्लंघन के लिए अब तक लगाए गए जुर्माने के विवरण के साथ-साथ, अब तक लॉन्च किए गए अभियोगों की संख्या का भी खुलासा करेगा।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि नगर निगम, प्रयागराज और माघ मेला प्राधिकरण अपने सीमाओं के अंदर 50 microns से कम की प्लास्टिक की थैलियों और कोई भी प्लास्टिक कचरा दोनो नदियोंऔर घाटों के किनारों पर नहीं डाला जाएगा।

मामला अब 4 फरवरी को पुनः देखा जायेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button