Tag: हिंदी

  • केवल बोली केवल भाषा नहीं है हिंदी।

    केवल बोली केवल भाषा नहीं है हिंदी।

    केवल बोली केवल भाषा नहीं है हिंदीजीवन को सहज सुगम पथ परचलते रहने को प्रेरित करती है हिंदीसभ्यता संस्कृति परम्परा का बोध है हिंदी सत्ता की नहीं है रानी पटरानी हिंदीमजदूर किसानो कामगारों की माई है हिंदीप्रांत प्रान्त की बोली भाषा कोएक सूत्र में पिरो रही मालिन है हिंदीवृज अवधी बुंदेली भोजपुरी उर्दूदक्खिनी राजस्थानी के…

  • हर हिंदुस्तानी का अभिमान हिंदी…

    हर हिंदुस्तानी का अभिमान हिंदी…

    मस्तक का श्रृंगार बिंदीमाँ भारती का शृंगार हिंदीमाँ बागीश्वरी के वीणा की मधुर झंकार हिंदीसूर,जायसी,तुलसी के गीतों की बहार हिंदीज्ञान का भंडार हिंदीसंस्कारो की खान हिंदीदुश्मनों की ललकार हिंदीविजयघोष का नाद हिंदीनवरसों का सार हिंदीप्रेम व्यक्त करने का आधार हिंदीदुख की करुण पुकार हिंदीवन्देमातरम की हुँकार हिंदीरस समास छंदों में लिपटी हिंदीमीठी सरस् सुहावन हिंदीहम…

  • लव जिहाद चले या पाणिग्रहण हो!

    लव जिहाद चले या पाणिग्रहण हो!

    लव जिहाद को, बजाय कानून द्वारा नियंत्रित करने के, मान-मनौव्वल, समझाने-बुझाने और धीरज-ढांढस द्वारा संभाला जा सकता है। आखिर वे युगल तो युवा होते है, वयस्क और जानकार भी। यदि धर्मांतरण की दुरूहता को कम करना है तो युवक को रजामन्द करने का प्रयास हो कि वह हिन्दू बन जाये। अर्थात लड़की ही कलमा पढ़ने…

  • पाब्लो नेरुदा : पिता के डर से बदल लिया नाम

    पाब्लो नेरुदा : पिता के डर से बदल लिया नाम

    पाब्लो नेरुदा एक साथ कवि, राजनयिक और कम्युनिस्ट नेता थे।उनका वास्तविक नाम नेफ्ताली  रिकार्दो रेइस बासुआलतो था। उनका जन्म 12 जुलाई 1904 को चीले के मामले इलाके में स्थित पारराल में हुआ था। अपने पिता की नाराज़गी से बचने के लिये उन्होंने अपना नाम बदल कर पाब्लो नेरुदा रख लिया था। जब चीले के तत्कालीन…

  • अंग्रेजी शब्द के मायने जब हिंदी में गुम हो जायें

    अंग्रेजी शब्द के मायने जब हिंदी में गुम हो जायें

    वर्षों से मेरी अवधारणा रही कि अंग्रेजी जुबान तथा रोमन लिखावट के सामने हिंदी और नागरी लिपि हर प्रकार से त्रुटिहीन और परिपूर्ण हैं। देखें प्रमाणस्वरूप भारत के संविधान की प्रस्तावना पर प्रोफेसर राजमोहन गांधी ने (इंडियन एक्सप्रेस, 22 अक्टूबर 2020, पेज 7 कालम 8) में लिखा है कि भारत के संविधान की प्रस्तावना में…

  • 40 वर्ष बाद.. हाथों में हिंदी की ‘सरस्वती’

    40 वर्ष बाद.. हाथों में हिंदी की ‘सरस्वती’

    गौरव अवस्थी सरस्वती। आपने सही पढ़ा। हां! वही सरस्वती जिसके संपादन से महावीर प्रसाद द्विवेदी को “आचार्य” पद प्राप्त हुआ। हिंदी साहित्य के प्रथम आचार्य माने और जाने गए। ऐसी “पद प्रतिष्ठा” उनके पहले हिंदी साहित्य में किसी को भी प्राप्त नहीं हुई। महाप्राण निराला उन्हें ‘आचार्य’ कहते-लिखते थे। जाने-माने आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने…

  • एक बेमिसाल साहित्यिक जोड़ी

    एक बेमिसाल साहित्यिक जोड़ी

    यह सन् 1963-64 की बात है। किसी पंजाबी पत्रिका में अफ़ग़ानिस्तान पर कर्नल नरेंद्र पाल सिंह का एक आलेख पढ़ा। मुझे रुचा और सोचा क्योँ न इसका हिंदी में अनुवाद कर उसे किसी अच्छी पत्रिका में छपवाया जाये। लेखक की अनुमति लेने के लिए मैं ने कर्नल नरेंद्रपाल सिंह को फ़ोन किया जो उन दिनों…

  • आभा

    आभा

    चौमासी माह सावन हरे भरे खेत और मैदान,  ढलकती शाम की बुंछेरी बूंदे बीती रात की नम ओस की बूंदे,  चमकती हरी पत्तियों पर बिखर गयी मोतियोँ की माला है.   खेतों की चलताऊ मेडें नागिन सी लहराती पतली पगडंडी,  बासमती रामभोग धानों की महक सुबह को महकाती सौंधी मिट्टी,  हरे पेड़ों के झुरमुटों में…

  • जन गण मन के अंतस की भाषा है हिंदी

    जन गण मन के अंतस की भाषा है हिंदी

    जन गण मन के अंतस की भाषा है हिंदी सहज सुबोध सरल भावों को मुखरित करती हिंदी आजादी की चेतना हिंदी वर्ग धर्म जाति पंथ को पास पास लाती है हिंदी जीवन की हर व्यथा कथा है हिंदी अभिजात्य अहम् अभिमान न हिंदी विनयशील संस्कार है हिंदी श्रमिक किसान मजूरों के श्रमबूंदों की भाषा हिंदी…

  • उज्जवल है हिंदी का भविष्य

    उज्जवल है हिंदी का भविष्य

    प्रसिद्ध पत्रकार मार्क टली ने कहा है, ‘बिना भारतीय भाषाओं के भारतीय संस्कृति जीवित नहीं रह सकती है’। अतः हमें भारतीय भाषाओं, जिनमें हिंदी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है, के उच्चतर भविष्य के हेतु सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिये। किसी भाषा का भविष्य मुख्यतः चार मानकों से नापा जा सकता हैः जनमानस में उस भाषा…