Tag: युद्ध
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युद्ध में जीतने वाला भी रोता है: रूस-यूक्रेन से ईरान-इज़राइल तक
डीपी शुक्ल राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने ‘कुरुक्षेत्र’ में लिखा है ‘युद्ध नहीं जिनके जीवन में वे भी बहुत अभागे होंगें या तो प्रण को तोड़ा होगा या फिर रण से भागे होंगें।’ लेकिन शाश्वत सत्य यही है कि युद्ध कभी अंतिम विकल्प नहीं होता। इतिहास ने बार-बार यह सिखाया है कि युद्ध जीतने वाले…
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रोना यथास्थिति के विरुद्ध एक मुनासिब कार्रवाई है
“एक सामूहिक विलाप है जिसमें मैं अपनी भीगी आँखों के साथ शामिल हूँ। कभी-कभी रोना भी विद्रोह हो सकता है। यह अंधेपन के विरुद्ध एक विद्रोह है। खुली आँख से देखना और रोना।” महाकवि निराला के प्रपौत्र विवेक निराला की यह पंक्तियाँ हमें यथास्थिति को अस्वीकार करने की प्रेरणा देती हैं. कवि पंकज चतुर्वेदी ने…
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भारत चीन से तनाव खत्म करने को सैन्य से इतर विकल्पों पर प्रयास करे
कर्नल प्रमोद शर्मा पिछले पांच-छह महीने से जारी लद्दाख सीमा पर तनातनी भारत को एक विचित्र स्थिति में ला दिया है। भारतीय सैनिकों की अब तक बीस से ज्यादा शहादत हो चुकी है। भारी मात्रा में सैनिकों, हथियार, साजो सामान,गोला बारूद इत्यादि का जमावड़ा बदस्तूर जारी है। युद्ध की स्थिति से निपटने का साथ साथ…
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आइन्स्टाइन ने हमेशा गाँधी जी की तारीफ नहीं की
अल्बर्ट आइंस्टाइन महात्मा गाँधी और उनके अहिंसा के सिद्धांत के बड़े प्रशंसक थे। वे महात्मा गाँधी की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए नहीं थकते थे| अपने तमाम साक्षात्कारों और वक्तव्यों में वे महात्मा गांधी की प्रशंसा करते हुए दिखते हैं। गाँधी के सत्तरवें जन्मदिन पर सन 1939 में अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने एक वक्तव्य जारी किया था…