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  • ‘स्थितप्रज्ञ’ गीता की आदर्शमूर्ति

    ‘स्थितप्रज्ञ’ गीता की आदर्शमूर्ति

    गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा कहते हैं कि शास्त्र भी बतला दिया, कला भी बतला दी, किंतु इतने से पूरा चित्र आँखों के सामने खड़ा नहीं होता। शास्त्र निर्गुण है, कला सगुण है; परंतु सगुण भी साकार हुए बिना व्यक्त नहीं होता। केवल निर्गुण जिस प्रकार हवा में रहता है, उसी प्रकार निराकार सगुण…