Tag: मंत्र

  • माँ तुलसी की इस स्तुति का करें पाठ

    माँ तुलसी की इस स्तुति का करें पाठ

    हर साल मनाये जाने वाले पर्व देवउठनी/देव प्रबोधिनी एकादशी को इस साल भी मनाया जा रहा है। इस साल यह पर्व 25 नवम्बर को मनाया जाने वाला है। ऐसे में इस दिन कई प्रकार के मंत्र, चालीसा और आरती को पढ़ना चाहिए क्योंकि इन सभी को पढ़ने से मन की हर मुराद पूरी हो जाती…

  • मन को देह से अलग पहचानें

    मन को देह से अलग पहचानें

    संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद अंश मंत्र आठ का अवशेष भाग बताते हुए कहते हैं कि कहने का तात्पर्य है कि ये सारी अनुभूतियां हमें आनी चाहिए। हमको महसूस होना चाहिए कि हम देह से, उसके गुण-दोषों से अलग हैं। उसी तरह मन से भी अपना अलगाव पहचानना चाहिए। अपापविद्वम से यह सूचित होता है। पाप…

  • ज्ञानी सभी को आत्मस्वरूप देखता है

    ज्ञानी सभी को आत्मस्वरूप देखता है

    संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद का मंत्र 7 पढ़ते हुए कहते हैं – *यस्मिन सर्वानि भूतानि आतमैवआभ्रद् विजानतः तत्र को मोह: क: शोक: एकत्वमनुपश्यत। मंत्र छह में बताया कि आत्मज्ञानी अपने में सब भूतों को और सब भूतों में अपने को देखता है। इस तरह जो विश्व और आत्मा को एक-दूसरे से ओतप्रोत देखता है, उसको…

  • मंत्र का भाष्य हर व्यक्ति के लिए पृथक

    मंत्र का भाष्य हर व्यक्ति के लिए पृथक

    संत विनोबा भावे ने कहा कि “ईशावास्य उपनिषद मंत्र ऋषि के काबू में नहीं रहता”, इस दृष्टि से ईशावास्य उपनिषद एक अत्यंत आध्यात्मिक कृति है, उत्तम वांगमयात्मक कृति भी है। उसमें जो मंत्र है, अर्थघन है, मनन करने से वह खुल सकते हैं। जो मनन मैं करूंगा, वह मेरे लिए सही है। वह मनन मेरे…

  • ईशावास्य उपनिषद में समग्र जीवन का दर्शन

    ईशावास्य उपनिषद में समग्र जीवन का दर्शन

    विनोबा का आज का वेद चिंतन : ईशावास्य उपनिषद प्रास्ताविक संत विनोबा भावे कहते हैं कि – रोज सुबह प्रार्थना में ईशावास्य बोलते हैं। वह सबसे छोटा और सबसे श्रेष्ठ उपनिषद है। बचपन से मेरी उस पर प्रीति बैठी है। उसका मेरे जीवन पर और चित्त् पर बहुत ही प्रभाव पड़ा है। उसमें समग्र जीवन…

  • पितृ पक्ष में ये 5 विशेष मंत्र देंगे मनचाहा वरदान

    पितृ पक्ष में ये 5 विशेष मंत्र देंगे मनचाहा वरदान

    हमारे धार्मिक कार्यों की पूर्णता बगैर मंत्र के नहीं होती है। पितृ पक्ष में भी इनका विशेष महत्व है। इसी तरह सूक्त कई हैं। दो सूक्त का उल्लेख पर्याप्त होगा। पहला है पुरुष सूक्त तथा दूसरा है पितृ सूक्त। इनके उपलब्ध न होने पर निम्नलिखित मंत्रों के प्रयोग से श्राद्ध कर्म की पूर्णता हो सकती…