Tag: बुद्धि
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मन को देह से अलग पहचानें
संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद अंश मंत्र आठ का अवशेष भाग बताते हुए कहते हैं कि कहने का तात्पर्य है कि ये सारी अनुभूतियां हमें आनी चाहिए। हमको महसूस होना चाहिए कि हम देह से, उसके गुण-दोषों से अलग हैं। उसी तरह मन से भी अपना अलगाव पहचानना चाहिए। अपापविद्वम से यह सूचित होता है। पाप…
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संयम मूर्ति होता है स्थितप्रज्ञ
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा कहते हैं कि ‘स्थितप्रज्ञ’ यानी स्थिर बुद्धिवाला मनुष्य, यह तो उसका नाम ही बता रहा है। परंतु संयम के बिना बुद्धि स्थिर होगी कैसे? अत: स्थितप्रज्ञ को संयम मूर्ति बताया गया है। बुद्धि हो आत्मनिष्ठ, और अंतर-बाह्य इंद्रियाँ हों बुद्धि के अधीन – यह है संयम का अर्थ। स्थितप्रज्ञ…