Tag: फल
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कर्म सिद्धान्त को समझकर भीतर से समृद्ध बनें : अविमुक्तेश्वरानन्द
कर्म का सिद्धान्त एक ऐसा सिद्धान्त है जो सनातन धर्म की सर्वांगीण व्याख्या करता है। लेकिन इस कर्म सिद्धान्त के सम्बन्ध में लोगों को ठीक से जानकारी नहीं है। इसीलिए किसी-किसी के मन में निराशा, हताशा और दूसरे विपरीत विचार आते रहते हैं। सिद्धान्त क्या है? सिद्धान्त यह है कि जैसा करोगे वैसा मिलेगा। यही…
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फल की बजाय प्रत्यक्ष कर्म में आनंद
गीता प्रवचन दूसरा अध्याय संत विनोबा गीता प्रवचन में कहते हैं कि यदि निष्काम कर्म की बात छोड़े दें, तो भी प्रत्यक्ष कर्म में जो आनंद है, वह उसके फल में नहीं है। स्वकर्म करते हुए जो एक प्रकार की तन्मयता होती है, वह आनंद का एक झरना ही है। चित्रकार से कहिए “चित्र न…