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ध्यान भीतरी संपदा को उजागर करने माध्यम है: उषा बहन
लखनऊ (विनोबा भवन) 29 अगस्त। मनुष्य जीवन में ध्यान और प्रार्थना जीवन के अभिन्न अंग होना चाहिए। व्यक्तिगत चेतना में परमात्म चेतना का आविर्भाव करना ध्यान है। ध्यान का लक्ष्य सिद्धि नहीं चित्त शुद्धि है। ध्यान भीतरी संपदा को उजागर करने का माध्यम है। चित्त खाली भी हो और खुला भी होना चाहिए। अपने मूल स्रोत…