Tag: shravan garg
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सरकार कोरोना वैक्सीन और लोकतंत्र
सरकार कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन इन दिनों पूरे भारत में ज़ोर शोर से कर रही है . दूसरी ओर लोकतंत्र में राजधानी दिल्ली और आसपास किसान हड़बड़ी में लाये गये कृषि बिज़नेस क़ानूनों पर डेढ़ महीने से सरकार से सार्थक बातचीत का इंतज़ार कर रहे हैं . राजनीतिक टीकाकार श्रवण गर्ग का कहना है…
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भारतीय राजनीति में ये कौन से प्रयोग चल रहे हैं
भारत के वरिष्ठतम पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों में से एक श्रवण गर्ग ने इस लेख में वर्तमान भारतीय राजनीति की कई नवीन प्रवृत्तियों को रेखांकित किया है. यह ऐसी हैं जो न केवल भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था बल्कि भारत की मौलिक संस्कृति और परम्पराओं के भी विरुद्ध हैं. इस लेख पर पाठकों की प्रतिक्रिया का स्वागत…
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प्रशांत भूषण ने क्या ‘रुपया’ भरकर ‘सोलह आने’ ठीक किया ?
प्रशांत भूषण अगर अपने आपको वास्तव में ही निर्दोष मानते हैं तो उन्हें बजाय एक रुपए का जुर्माना भरने के क्या तीन महीने का कारावास नहीं स्वीकार कर लेना चाहिए था ? सवाल बहुत ही वाजिब है। पूछा ही जाना चाहिए। प्रशांत भूषण ने भी अपनी अंतरात्मा से पूछकर ही तय किया होगा कि जुर्माना…
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बीमारी और मौत के आँकड़ों से अब डर ख़त्म हो गया है ?
श्रवण गर्ग हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि बीमारी और मौतों के तेज़ी से बढ़ते हुए आँकड़ों से लोगों ने अब डरना बंद कर दिया है। हालात पहले के इक्कीस दिनों के मुक़ाबले इस समय ज़्यादा ख़राब हैं पर जैसे-जैसे आँकड़ों का ग्राफ़ ऊँचा हो रहा है , ख़ौफ़ भी कम होता जा रहा है।…
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संदेह के घेरे में नागरिकों का राष्ट्रप्रेम नहीं ,नायकों का सत्ता प्रेम है !
-श्रवण गर्ग, पूर्व प्रधान सम्पादक दैनिक भास्कर एवं नयी दुनिया पूर्वी लद्दाख़ की गलवान घाटी में सोमवार (15 जून) की रात चीनी सैनिकों द्वारा की गई हिंसक झड़प में शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू की अपने पिता के साथ एक दिन पहले अंतिम बार हुई बातचीत का एक समाचार एक अंग्रेज़ी दैनिक में प्रकाशित हुआ…
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लड़ाई ‘जान’और ‘प्रजातंत्र’ दोनों को ही सुरक्षित करने की है !
-श्रवण गर्ग , वरिष्ठ पत्रकार, पूर्व प्रधान सम्पादक दैनिक भास्कर एवं नई दुनिया क्या हम नब्बे दिन बाद ही पड़ने वाले इस बार के पंद्रह अगस्त पर लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के तिरंगा फहराने और सामने बैठकर उन्हें सुनने वाली जनता के परिदृश्य की कल्पना कर सकते हैं ? क्या सोच-विचार कर…

