Tag: shravan garg
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पहलगाम हमला: सरकार का ग़ुस्सा और कूटनीतिक नतीजे
श्रवण गर्ग . वरिष्ठ पत्रकार पहलगाम में आतंकवादी हमले से सरकार ग़ुस्से में नज़र आ रही है। हुकूमतें जब ग़ुस्से में होती हैं कुछ भी कर सकतीं हैं ! किसी भी सीमा तक जाने के दावे कर सकती हैं. रक्षा मंत्री ने कहा है कि हरकत का जवाब आने वाले कुछ ही समय में ज़ोरदार…
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धार्मिक हिंसा और नफ़रत की राजनीति : जनता की चिट्ठी ही तुड़वा सकती है पीएम की चुप्पी !
मुमकिन है हरिद्वार की तरह की और भी कई धर्म संसदें देश में आयोजित हों जिनमें नफ़रत की राजनीति को किसी निर्णायक बिंदु पर पहुँचाने के प्रयास किए जाएँ और नौकरशाहों के समूह भी इसी तरह विरोध में चिट्ठियाँ भी लिखते रहें । होगा यही कि हरेक बार प्रधानमंत्री या सत्ता की ओर से वे…
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केरल में भी उन्नाव और हाथरस हो रहा है ?
कोई पच्चीस करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में चुनावों को लेकर मचे घमासान के बीच सिर्फ़ चार करोड़ की जनसंख्या के सुदूर दक्षिणी राज्य केरल की चर्चा करना थोड़ा अप्रासंगिक लग सकता है फिर भी ऐसा करना ज़रूरी है। कहा जा सकता है कि केरल भी अब उत्तर प्रदेश में तब्दील हो रहा है।
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प्रधानमंत्री सुरक्षा : बठिंडा से उठा बवाल बवंडर नहीं बन पाया !
प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे के दौरान उनके सुरक्षा इंतज़ामों में हुई चूक को लेकर किस तरह से प्रतिक्रिया व्यक्त करें ! घटना निश्चित ही काफ़ी गम्भीर रही होगी क्योंकि प्रधानमंत्री का पंजाब के अफ़सरों को कथित तौर पर यह कहना कि :’अपने सी एम को थैंक्स कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक ज़िंदा लौट पाया ‘’,…
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अमित शाह को क्यों कहना पड़ा कि मोदी निरंकुश नहीं हैं !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके गृह राज्य गुजरात और केंद्र में सरकार चलाने के बीस वर्ष पूरे कर लिए जाने के अवसर पर ‘संसद टी वी ‘ चैनल को को दिए गए साक्षात्कार के दौरान एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री निरंकुश या तानाशाह नहीं हैं। इस तरह के सभी…
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खबरों का ‘तालिबानीकरण’ यानी प्रतिरोध को नपुंसक बनाने का षड्यंत्र !
एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निहायत ज़रूरी इस ‘ऑक्सिजन’ की चाहे जितनी कृत्रिम कमी उत्पन्न कर दी जाए जब कुछ भी नहीं बचेगा तो लोग आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए सच्ची ख़बरें पत्थरों और शिलाओं पर लिखना शुरू कर देंगे।एक डरा हुआ और लगातार भयभीत दिखता मीडिया अपने पाठकों, दर्शकों और प्रतिरोध की राजनीति…
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उस लहर का ‘पीक’ कभी नहीं आएगा !
कोरोना की तीसरी लहर की चिंता हमें छोड़ देनी चाहिए। हो सकता है इसके बाद हमें किसी चौथी और पाँचवीं लहर को लेकर डराया जाए। हमें अब लहऱों और उनके ‘पीक’ की गिनती नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए कि मरने वालों के सही आँकड़े बताने में देश और दुनिया को धोखा दिया जा रहा है।…
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मोदी को सत्ता में बनाए रखना राष्ट्रीय जरूरत है !
-श्रवण गर्गकोरोना महामारी से हो रही मौतों के बीच सोशल मीडिया पर कुछ नागरिक समूहों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफ़े की माँग यह मानकर की जा रही है कि इससे मौजूदा संकट का तुरंत समाधान हो जाएगा। इसके लिए जन-याचिकाओं पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं। याचिकाओं में कोरोना से निपटने में विभिन्न स्तरों…
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किसान आंदोलन का महात्मा गांधी कौन !
किसान आंदोलन का महात्मा गांधी कौन है ? : दो महीने से चल रहे किसान आंदोलन को अब कहाँ के लिए किस रूट पर आगे चलना चाहिए ? छह महीने के राशन-पानी और चालित चोके-चक्की की तैयारी के साथ राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर पहुँचे किसान अपने धैर्य की पहली सरकारी परीक्षा में ही असफल…
