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  • अखंड दर्शन से मोह-शोक नहीं होता

    अखंड दर्शन से मोह-शोक नहीं होता

    आज का वेद चिंतन विचार संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद के 7वें मंत्र पर कहते हैं कि आज सुबह हम जगन्नाथ दास का भागवत पढ़ रहे थे। उसमें श्रीकृष्ण के अंतकाल के समय कवि कहता है कि अब मैं अनाथ हो गया हूं। उसने देखा कि वह धागा खंडित हो गया है। लेकिन वह उसने उपासना…