Tag: शहर
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सांत्वनाओं के स्तर पर भी आत्मनिर्भर बना दिए जाने के ‘सफल’ प्रयोग!
सोच-सोचकर तकलीफ़ होती है, पर ऐसा हक़ीक़त में हो रहा है और हम उसे रोक नहीं पा रहे हैं।अपनी इस असहाय स्थिति का हमें अहसास भी नहीं होने दिया जा रहा है। वह यह कि क्या लोगों को ठीक से जानने के लिए अब उनका चले जाना ज़रूरी हो गया है ? हम लोगों को,…
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जंगलों में नहीं है रोटी
हैरान-परेशान, बदहवास सब हैं, ऐसे में कहां जाकर रहा जाए…? हवा खामोश है, जहरीली है, माहौल गमगीन और बेचैन, ऐसे में क्या किया जाए…? रोटी और रहने की व्यवस्था अहम है। संगीन दौर है, क्या कहा जाए…? सरकार, सत्ता, शासन, सरकारी योजनाओं से भरे पड़े अखबार हैंl लोग कह रहे हैं, यह सब विधि के…
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शहरों से पलायन कर रहे मजबूर मज़दूरों की पुकार
सांध्य दैनिक 4 PM के संपादक संजय शर्मा के सौजन्य से , जिन्होंने सड़कों पर घूम घूम कर लोगों के दुख दर्द संकलित किये