Tag: विदेशी
-
स्वधर्म पालन अत्यंत आवश्यक
संत विनोबा गीता प्रवचन में कहते हैं कि भाइयो, पिछले अध्याय में हमने निष्काम कर्मयोग का विवेचन किया। स्वधर्म को टालकर यदि हम अवांतर धर्म स्वीकार करेंगे, तो निष्कामतारूपी फल अशक्य ही है। स्वदेशी माल बेचना व्यापारी का स्वधर्म है। परंतु इस स्वधर्म को छोड़कर जब वह सात समुंदर पार का विदेशी माल बेचने लगता…