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  • ज्ञानी सभी को आत्मस्वरूप देखता है

    ज्ञानी सभी को आत्मस्वरूप देखता है

    संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद का मंत्र 7 पढ़ते हुए कहते हैं – *यस्मिन सर्वानि भूतानि आतमैवआभ्रद् विजानतः तत्र को मोह: क: शोक: एकत्वमनुपश्यत। मंत्र छह में बताया कि आत्मज्ञानी अपने में सब भूतों को और सब भूतों में अपने को देखता है। इस तरह जो विश्व और आत्मा को एक-दूसरे से ओतप्रोत देखता है, उसको…