Tag: विकास
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विकास, राष्ट्रवाद और विस्थापन: भारत का नागरिक संकट
डा अचल पुलस्तेय समकालीन भारत में ‘विकास’ और ‘राष्ट्रवाद’ के नए विमर्श ने एक जटिल परिस्थिति पैदा कर दी है, जहाँ हाशिए पर खड़े समुदायों का अस्तित्व लगातार संकटग्रस्त होता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की हालिया रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि नफरत अब केवल सामाजिक पूर्वाग्रह या राजनीतिक भाषण तक सीमित नहीं…
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रोजगार, स्वास्थ्य, जीवन स्तर, राष्ट्रीय आय और आर्थिक विकास का सहसंबंध और भारतीय अर्थव्यवस्था
आर्थिक विकास न तो ईश्वर का वरदान है और न जादुई छड़ी के माध्यम से प्राप्त होता है। दूरदर्शितापूर्ण नीतियों, संसाधनों के समुचित उपयोग, रोजगार एवं उत्पादकता में वृद्धि, स्वास्थ्य एवं शिक्षा तथा अधिसंरचनाचत्मक सुविधाओं के विकास के द्वारा प्राप्त किया जाता है। लेकिन, आजादी के 73 वर्षों के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था की…