Tag: योनि
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हमें खुद कर्म करना चाहिए
आज का वेद चिंतन विनोबा भावे ईशावास्य उपनिषद का तीसरा मंत्र पढ़ते हैं – असुर्या नाम ते लोकाः अंधेन तमसावृताःतांस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः प्रथम मंत्र में ऋषि ने कहा, जगत् में जो कुछ जीवन है, यानी जीवनवान है, उसमें ईश्वर बसता है, वह सब ईश्वर का बसाया हुआ है। इसलिए तू त्यागपूर्वक भोगता…