Tag: माँ

  • आज का वेद चिंतन विचार

    आज का वेद चिंतन विचार

     ओ शु स्वसार: कारवे श्र्णोत् ययौ वो दुरादनसा सफेद रथेन नि शू नमध्व भवता सुपारा: अधो अक्षा: सिंधव: स्रोत्याभि: 3.3.11 मैं भारतीयों को लेकर जा रहा हूं ,इसलिए तुम जरा झुक जाओ । पहले रमधवं यानी रुको कहा था । अब वह नमध्वम यानी झुको कहते हैं। हे नदी, तुम झुक जाओ और मेरे लिए…

  • ‘‘माँ की पहचान‘‘

    ‘‘माँ की पहचान‘‘

    गाँव और संयुक्त परिवार भारत की  विशेषता रहे हैं, जहां की पीढ़ियाँ  एक साथ रहती थीं. लेकिन ग्लोबलाइज़ेशन की  अर्थ व्यवस्था में बच्चे प्रोइशनल या उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाते हैं और फिर अपने गाँव या शहर से दूर नौकरी या व्यापार के लिए चले जाते हैं. कई परिवार तो दो या तीन देशों…