Tag: मन
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मन को देह से अलग पहचानें
संत विनोबा ईशावास्य उपनिषद अंश मंत्र आठ का अवशेष भाग बताते हुए कहते हैं कि कहने का तात्पर्य है कि ये सारी अनुभूतियां हमें आनी चाहिए। हमको महसूस होना चाहिए कि हम देह से, उसके गुण-दोषों से अलग हैं। उसी तरह मन से भी अपना अलगाव पहचानना चाहिए। अपापविद्वम से यह सूचित होता है। पाप…
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प्रकाश से अधिक गति मन की, ईश्वर सबसे गतिवान
आज का वेद चिंतन विनोबा भावे ईशावास्य उपनिषद काचौथा मंत्र पढ़ते हैं – अनेजदेकं मनसो जवीयः नैनददेवा आपप्नुवन् पूर्वमर्षत्तद्धावतोडन्यान् अत्येति तिष्ठत् तस्मिन्नपना मातरिश्वा दधाति। ईशावास्य के प्रथम तीन मंत्रोें में एक पूर्ण जीवन-विचार बताया। 1-ईश्वरनिष्ठा 2-कर्मयोग 3- भोगासक्त जीवन का परिणाम। अब मंत्र 4-5 में आत्मा के स्वरूप का वर्णन है। ईश्वर और आत्मा एक…
