Tag: आभा

  • आभा

    आभा

    चौमासी माह सावन हरे भरे खेत और मैदान,  ढलकती शाम की बुंछेरी बूंदे बीती रात की नम ओस की बूंदे,  चमकती हरी पत्तियों पर बिखर गयी मोतियोँ की माला है.   खेतों की चलताऊ मेडें नागिन सी लहराती पतली पगडंडी,  बासमती रामभोग धानों की महक सुबह को महकाती सौंधी मिट्टी,  हरे पेड़ों के झुरमुटों में…