अनुपम तिवारी , लखनऊ लाखों वर्षों के मानव इतिहास में यह अभूतपूर्व समय है। एक वैश्विक आपदा ने देश, धर्म, भाषा, स्थान, रंग, जाति में भेद न करते हुए सम्पूर्ण विश्व के मनुष्यों के शरीरों को उनकी जगह पर बांध दिया है। आवश्यकताएं बहुत सीमित हो गयी हैं। अर्थ की महत्ता वाले इस युग मे मनुष्य…