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स्वधर्म के सहारे ही उन्नति की राह
*गीता प्रवचन दूसरा अध्याय* स्वधर्म के सिलसिले में उपनिषद् में एक सुंदर कथा है। एक बार देव, दानव और मानव, तीनों प्रजापति के पास उपदेश के लिए पहुँचे। प्रजापति ने सबको एक ही अक्षर बताया – ‘द’। देवों ने कहा – “हम देवता लोग कामी हैं, हमें विषय भोगों की चाट लग गयी है। अत:…