Tag: ऋषि

  • मंत्र का भाष्य हर व्यक्ति के लिए पृथक

    मंत्र का भाष्य हर व्यक्ति के लिए पृथक

    संत विनोबा भावे ने कहा कि “ईशावास्य उपनिषद मंत्र ऋषि के काबू में नहीं रहता”, इस दृष्टि से ईशावास्य उपनिषद एक अत्यंत आध्यात्मिक कृति है, उत्तम वांगमयात्मक कृति भी है। उसमें जो मंत्र है, अर्थघन है, मनन करने से वह खुल सकते हैं। जो मनन मैं करूंगा, वह मेरे लिए सही है। वह मनन मेरे…

  • ईशावास्य उपनिषद में समग्र जीवन का दर्शन

    ईशावास्य उपनिषद में समग्र जीवन का दर्शन

    विनोबा का आज का वेद चिंतन : ईशावास्य उपनिषद प्रास्ताविक संत विनोबा भावे कहते हैं कि – रोज सुबह प्रार्थना में ईशावास्य बोलते हैं। वह सबसे छोटा और सबसे श्रेष्ठ उपनिषद है। बचपन से मेरी उस पर प्रीति बैठी है। उसका मेरे जीवन पर और चित्त् पर बहुत ही प्रभाव पड़ा है। उसमें समग्र जीवन…

  • वेद चिंतन विचार :पृथ्वी का अंत कहां है?

    वेद चिंतन विचार :पृथ्वी का अंत कहां है?

    विनोबा भावे  अयम यज्ञो भुवनस्य नाभि: वैदिक ऋषि को जब किसी ने प्रश्न किया कि – पृथ्वी का अंत कहां है? तो उस बहादुर ऋषि ने सीधा जवाब दिया- यह मेरा यज्ञ त्रिभुवन का केंद्र, मध्य विंदु है और हम इस यज्ञ की भूमि वेदी यह ज्ञानभूमि, जहां से मुझे ज्ञान मिला है , वह…