हे नववर्ष जन्मो तुम !

हे नववर्ष जन्मो तुम  डा चन्द्रविजय चतुर्वेदी ,प्रयागराज।  हे नववर्ष  जन्मो तुम  जन्मो पर  कृष्ण रूप  जन्मो  कारा में बंद  तुम्हारे जननी जनक  ही नहीं जन जन को  तुम्हारे जन्मने की  प्रतीक्षा है भारी  भादों सी रात है काली  अंगार  भरे मेघ  कर रहे वज्रपात  जन जन के विदीर्ण ह्रदय  हैं खाली  जन्मो नववर्ष  नए … Continue reading हे नववर्ष जन्मो तुम !