भगवान रुद्र के ग्यारहवें स्वरूप का नाम ‘भव’ है। इसी रूप मे वे संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं तथा जगद्गुरु के रूप में वेदांत और योग का उपदेश देकर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उनकी कृपा के बिना विद्या, योग, ज्ञान ,भक्ति आदि के वास्तविक रहस्य से परिचित होना असंभव है ।भगवान भव रुद्र ही योगशास्त्र के आदि गुरु हैं ।
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