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	<title>पंकज प्रसून Archives - Media Swaraj | मीडिया स्वराज</title>
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	<description>Latest information &#38; Lifestyle News Portal</description>
	<lastBuildDate>Sat, 20 Feb 2021 13:17:47 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
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		<title>औश्वीत्ज़ यातना शिविर की खौफनाक दास्तान</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/poland-hitler-biggest-torture-camp-pankaj-prasun/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Feb 2021 12:40:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[औश्वीत्ज़ में हिटलर की नात्ज़ी हुकूमत के ज़ुल्म की कहानियां]]></category>
		<category><![CDATA[औश्वीत्ज़ यातना शिविर की खौफनाक दास्तान]]></category>
		<category><![CDATA[नाज़ी यातना शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[यहूदियों की हत्या]]></category>
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					<description><![CDATA[आंद्रेज पेलेत्स्की सन् 1941में  औश्वीत्ज़ यातना शिविर में कैदी नंबर 4859 था। लेकिन 1990s के दशक में ज़ोफिया और आंद्रेज पेलेत्स्की को पता चला कि उनके पिता वास्तव में एक बहादुर हीरो थे।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पोलैंड में  औश्वीत्ज़ जर्मनों द्वारा बनाए यातना कैंपों में से सबसे बड़ा है।1939 में पोलैंड पर क़ब्ज़ा करने के बाद हिटलर ने औश्वीत्ज़ के पास यातना शिविर बनवाया।</p>



<p>आंद्रेज पेलेत्स्की सन् 1941में&nbsp; औश्वीत्ज़ यातना शिविर में कैदी नंबर 4859 था। लेकिन 1990s के दशक में ज़ोफिया और आंद्रेज पेलेत्स्की को पता चला कि उनके पिता वास्तव में एक बहादुर हीरो थे।</p>



<p>अधिक जानकारी के लिये पढ़ें:</p>



<p><a href="https://www.independent.co.uk/news/world/europe/nazis-auschwitz-volunteer-holocaust-witold-pilecki-a9302581.html">https://www.independent.co.uk/news/world/europe/nazis-auschwitz-volunteer-holocaust-witold-pilecki-a9302581.html</a></p>



<p>युद्ध बाद पोलैंड में जब वे दोनों किशोर थे तो उन्हें बताया गया था कि उनके पिता एक देशद्रोही और देश के दुश्मन थे। स्कूल के रेडियो पर वे अपने पिता पर&nbsp;सन् 1948 में चले मुकदमे और उन्हें दी गयी फांसी के बारे में सुनते आये थे।</p>



<p>जब कि सच तो यह था कि वे पोलैंड के प्रतिरोध लड़ाकू थे जो स्वेच्छा से औश्वीत्ज़ गये थे ताकि वहां प्रतिरोध शुरू किया जा सके।वे वहां से मित्र राष्ट्रों की सेना को गुप्त संदेश भेजते थे। उन्हीं के संदेशों के कारण औश्वीत्ज़ यातना शिविर में चल रहे खौफनाक खेल के बारे में संसार को जानकारी मिली।</p>



<p>औश्वीत्ज़ 75 वर्ष पहले मुक्त हुआ था।हाल में प्रकाशित पुस्तक The Volunteer: One Man, an Underground Army, and the Secret Mission to Destroy Auschwitz,” में पूर्व युद्ध संवाददाता जैक फेयरवेदर ने उस हीरो के बारे में रहस्योद्घाटन किया है।</p>



<p>सन् 1933 में जर्मनी की सत्ता पर जब एडोल्फ हिटलर काबिज हुआ तो उसने वहां एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की&nbsp; जिसमें यहूदियों को इंसान से नीचे करार दिया गया और उन्हें इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना गया।&nbsp;</p>



<p>यह भी पढ़ें:</p>



<p><a href="https://www.google.co.in/amp/s/www.bhaskar.com/amp/news/INT-adolf-hitlers-torture-on-jewish-in-auschwitz-camp-polland-4886292-PHO.html">https://www.google.co.in/amp/s/www.bhaskar.com/amp/news/INT-adolf-hitlers-torture-on-jewish-in-auschwitz-camp-polland-4886292-PHO.html</a></p>



<p><a href="https://mediaswaraj.com/poland-horror-stories-of-hitler-torture-murder-camps-trilok-deep/">यहूदियों के प्रति हिटलर की इस नफरत का नतीजा नरसंहार के रूप में सामने आया</a>, यानी समूचे यहूदियों को जड़ से खत्म करने की सोची-समझी और योजनाबद्ध कोशिश।</p>



<p>होलोकास्ट इतिहास का वो नरसंहार था, जिसमें छह साल में तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी। इनमें 15 लाख तो सिर्फ बच्चे थे। इस दौरान कई यहूदी अपनी जान बचाकर देश छोड़कर भाग गए, तो कुछ यातना शिविरों में क्रूरता के चलते तिल-तिल मरे। इस दौरान औश्वीत्ज़ नाजी यंत्रणा कैंप यहूदियों का खात्मा करने की नाजियों की हत्यारी रणनीति का प्रतीक बन गया था।</p>



<p>पोलैंड में नाजी कैंप औश्वीत्ज़ को 70 साल पहले 27 जनवरी को आज़ाद कराया गया था।&nbsp;</p>



<p>इतिहास के पन्नों में कई हादसे, कई त्रासदियाँ दर्ज हैं लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड में नाज़ियों के अधीन जो कुछ हुआ वैसी त्रासदी इतिहास ने शायद पहले कभी नहीं देखी थी।</p>



<p>विस्तृत विवरण के लिये पढ़ें:</p>



<p><a href="https://www.google.co.in/amp/s/www.bbc.com/hindi/multimedia/2010/01/100112_nazi_camps_va.amp">https://www.google.co.in/amp/s/www.bbc.com/hindi/multimedia/2010/01/100112_nazi_camps_va.amp</a></p>



<p>पोलैंड में बसा औश्वीत्ज़ जर्मनों द्वारा बनाए यातना कैंपों में से सबसे बड़ा नेटवर्क है।1939 में पोलैंड पर क़ब्ज़ा करने के बाद हिटलर ने 1940 में औश्वीत्ज़ के पास यातना शिविर बनवाया।</p>



<p>लोहे के जिस गेट से आप यातना शिविर के अंदर आते हैं उस पर लिखा है- आपका काम आपको आज़ादी दिलवाता है।लेकिन उस दौरान जो क़ैदी इस गेट के अंदर लाए गए उनमें से ज़्यादातर हमेशा-हमेशा के लिए ग़ुलाम हो गए।मौत ही उन्हें आज़ाद करवा पाई।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large"><img decoding="async" width="197" height="243" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/09/Pankaj-Prasun.jpg" alt="पंकज प्रसून " class="wp-image-12206"/><figcaption>पंकज प्रसून
वरिष्ठ पत्रकार</figcaption></figure></div>



<p><strong>पंकज प्रसून वरिष्ठ पत्रकार</strong></p>



<p>मोबाइल- 9811804096</p>



<p>cipraindia@gmail.com</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भारतीय मूल की स्वाति मोहन ने उतारा</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/nasa-space-mission-mars-swati-mohan-pankaj-prasun/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Feb 2021 11:36:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[तकनीकी]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[Dr Swati Mohan mars mission NASA]]></category>
		<category><![CDATA[NASA Mars Mission]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय मूल की स्वाति मोहन]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल ग्रह पर उतरा अंतरिक्ष यान]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://mediaswaraj.com/?p=21128</guid>

					<description><![CDATA[मंगल ग्रह पर पहुंचने के लिये 30 जुलाई 2020 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेराल एयर फोर्स स्टेशन से एक टन वजनी परसीवरेंस अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित किया गया था। वह 47 करोड़ किलोमीटर की यात्रा सात महीने में पूरी करने के बाद 18फरवरी 2021को अपने निर्धारित समय और लक्ष्य पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>नासा के  मंगल ग्रह अंतरिक्ष यान को संचालित करने वाली  टीम की अगुवाई भारतीय मूल की अमेरिकी इंजीनियर डॉ. स्वाति मोहन कर रही हैं।उन्होंने मिशन के ऊंचाई पर रोवर के कंट्रोल और &nbsp;रोवर की लैंडिंग सिस्टम को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="820" height="547" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/4D94CBD6-534A-4B25-994A-5E7523C1FA33.jpeg" alt="" class="wp-image-21135" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/4D94CBD6-534A-4B25-994A-5E7523C1FA33.jpeg 820w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/4D94CBD6-534A-4B25-994A-5E7523C1FA33-300x200.jpeg 300w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/4D94CBD6-534A-4B25-994A-5E7523C1FA33-768x512.jpeg 768w" sizes="(max-width: 820px) 100vw, 820px" /><figcaption>भारतीय मूल की इंजीनियर डा स्वाति मोहन </figcaption></figure>



<p> मंगल ग्रह के वायुमंडल में अंतरिक्ष यान के प्रवेश करते ही एक धमाका हुआ लेकिन रोवर ने सात मिनट के धमाके से बचते हुए ऐतिहासिक लैंडिंग सफलतापूर्वक कर ली।मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान के सफलतापूर्वक लैंडिंग होते ही स्वाति ने खुशीपूर्वक कहा, &nbsp;&#8220;टचडाउन कन्फर्म्ड! मंगल ग्रह की सतह पर रोवर सुरक्षित है, जो पिछले जीवन के संकेतों की तलाश शुरू करने के लिए तैयार है।&#8221;&nbsp;</p>



<p>डॉ स्वाति जब एक साल की थीं तभी अमेरिका चली गई थीं। उनका  बचपन उत्तरी वर्जीनिया-वाशिंगटन डीसी मेट्रो क्षेत्र में बीता है।</p>



<p>स्वाति पहले  बच्चों का डॉक्टर बनना चाहती थीं लेकिन नौ  साल की उम्र में  &#8216;स्टार ट्रेक&#8217; फिल्म देखने के बाद उन्होंने महसूस किया वे &#8220;ब्रह्मांड में नए और सुंदर स्थान ढूंढना चाहती हैं।&#8221;</p>



<p>इसके बाद उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की।बाद में मैसेच्यूसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT) से उन्होंने एयरोनॉटिक्स / एस्ट्रोनॉटिक्स में पीजी और पीएचडी पूरी की है।</p>



<p>अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह पर पहुंचने के लिये 30 जुलाई 2020 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केप कैनावेराल एयर फोर्स स्टेशन से एक टन वजनी परसीवरेंस अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित किया गया था। वह 47 करोड़ किलोमीटर की यात्रा सात महीने में पूरी करने के बाद 18फरवरी 2021को अपने निर्धारित समय और लक्ष्य पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया।</p>



<p>यह&nbsp;मंगल ग्रह  यान  3 मीटर लंबा, 2.7&nbsp; मीटर चौड़ा और 2.2&nbsp; मीटर ऊंचा है। इसका कुल वजन 1025किलो है।</p>



<p>यह मंगल ग्रह के जेज़ेरो क्रेटर पर उतरा जो प्राचीन नदी&nbsp;के डेल्टा पर बना हुआ है। यह क्रेटर कोई चालीस किलोमीटर का है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 3.5 खरब साल पहले वहां से नदी बहती थी जो बाद में सूख गयी और वहां एक झील बन गयी। अनुमान है कि मंगल पर जीवन के अवशेष इस क्रेटर में मिल सकते हैं।&nbsp;</p>



<p>करोड़ों साल पहले मंगल का वायुमंडल मोटा था। इस परियोजना की उप परियोजना अधिकारी केटी स्टैक मॉर्गन के अनुसार वैज्ञानिक वहां जैव हस्ताक्षर की खोज करेंगे।</p>



<p>इस मंगल ग्रह मिशन का मुख्य उद्देश्य मंगल पर प्राचीन जीवन के प्रमाणों की खोज और वहां से चट्टान और रेगोलीथ यानी टूटे हुए पत्थर और मिट्टी के नमूने इकट्ठा करके धरती पर वापस लाना।</p>



<p>इस लिंक पर भी जायें:</p>



<p><a href="https://www.bbc.com/news/science-environment-53129281">https://www.bbc.com/news/science-environment-53129281</a></p>



<p>इस मंगल ग्रह अंतरिक्ष यान के पेट में एक हेलिकॉप्टर भी है जिसका नाम है इंजेन्यूटी । जिसका दूसरी दुनिया में पहली बार परीक्षण किया जा रहा है।वह तीस मंगल दिवसों तक फ्लाइट टेस्ट करेगा। शुरू में वह वायु मंडल में बीस से तीस सेकंड तक उड़ेगा। मंगल का वायुमंडल अत्यंत पतला है।धीरे धीरे वह अपनी उड़ान की अवधि और दूरी बढ़ाता जायेगा।</p>



<p>अधिक जानकारी के लिये इस लिंक पर क्लिक करें :</p>



<p><a href="https://mars.nasa.gov/technology/helicopter/">https://mars.nasa.gov/technology/helicopter/</a></p>



<p>मंगल ग्रह पर पहुँचा अंतरिक्ष यान अपने साथ धरती के दो करोड़ लोगों के नाम भी ले गया है जिसे वह वहीं छोड़ देगा। ताकि अगर वहां कोई एलियंस रहते हों तो उन्हें धरती के लोगों के बारे में जानकारी मिल सके। और अगर कुछ नहीं भी हो तो भविष्य में धरती से मंगल पर आने वाले लोगों को इसका प्रमाण मिल सके कि कभी वहां धरती से कुछ आया था।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large"><img decoding="async" width="197" height="243" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/09/Pankaj-Prasun.jpg" alt="पंकज प्रसून" class="wp-image-12206"/><figcaption>पंकज प्रसून
वरिष्ठ पत्रकार</figcaption></figure></div>



<p><strong>पंकज प्रसून</strong> , <strong>वरिष्ठ पत्रकार </strong></p>



<p><strong>मोबाइल-9811804096</strong></p>



<p><strong>cipraindia@gmail.com</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संसार की सबसे महंगी सब्जी हॉप शूट्स की खेती बिहार में</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/hop-crops-vegetable-grown-in-bihar-pankaj-prasun/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Feb 2021 01:15:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थ]]></category>
		<category><![CDATA[कृषि]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[कैंसर की दवा बीयर तैयार करने में इस्तेमाल]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार के औरंगाबाद में हॉप शूट्स]]></category>
		<category><![CDATA[संसार की सबसे महंगी फसल]]></category>
		<category><![CDATA[हौप शूट्स]]></category>
		<category><![CDATA[हौप शूट्स का वैज्ञानिक नाम Humulus Lupulus]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार में हॉप शूट्स का उत्पादन सुर्खियों में आया है । यह सब्ज़ी हॉप प्रजाति के पौधों की पत्तियां हैं। इसके फूलों को हॉप्स के नाम से जाना जाता है ।हज़ार साल पहले  बीयर में कड़वाहट लाने के लिए उसका इस्तेमाल किया जाता था ।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमूमन ऐसा समझा जाता है कि मांसाहार महंगा होता है और साग सब्जियां सस्ती होती है। बिहार में हो रही दुनिया की सबसे महंगी सब्ज़ी हॉप शूट्स  की खेती, जानें क्यों है उसकी चांदी से भी अधिक कीमत?</p>



<p>बिहार में हॉप शूट्स की खेती  सुर्खियों में आयी  है । यह सब्ज़ी हॉप प्रजाति के पौधों की पत्तियां हैं। इसके फूलों को हॉप्स के नाम से जाना जाता है ।हज़ार साल पहले  बीयर में कड़वाहट लाने के लिए उसका इस्तेमाल किया जाता था ।</p>



<p> फिर भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिये हॉप शूट्स का चलन बढ़ा और चिकित्सा में उसका उपयोग हुआ। बाद में जब उसका व्यावसायिक उत्पादन होने लगा तब उसे पकाकर खाने का चलन भी शुरू हुआ।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="877" height="652" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/hop-shooots-in-Germany-.jpg" alt="" class="wp-image-20774" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/hop-shooots-in-Germany-.jpg 877w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/hop-shooots-in-Germany--300x223.jpg 300w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/hop-shooots-in-Germany--768x571.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 877px) 100vw, 877px" /><figcaption>हॉप की खेती जर्मनी  में </figcaption></figure>



<p>8वीं सदी में जर्मनी में सबसे पहले हॉप्स के उत्पादन के प्रमाण मिलते है। इंग्लैंड सहित यूरोप के कई देशों में उसकी फसल मशहूर हुई।इंग्लैंड में 16वीं सदी में&nbsp; उसे बैन तक किया गया तो जर्मनी में उसे टैक्स मुक्त किया गया क्योंकि राजनीति और धर्म की यह पहली पसंद थी। इंग्लैंड में आयात किए जाने वाले हॉप्स को बैन करने के लिए एक कानून तक बनाया गया था तो 1557 में कवि थॉमस टसर ने बीयर में हॉप्स के इस्तेमाल से प्रभावित होकर कविता में इसका गुणगान भी किया था।</p>



<p>यूरोप के बाद अमेरिका में हॉप्स लोकप्रिय हुए और वर्तमान में इसका सबसे बड़ा उत्पादक अमेरिका ही है। दूसरा सबसे बड़ा उत्पादन जर्मनी में होता है।इन दो देशों के अलावा बाकी देशों में बहुत कम उत्पादन होता है और अब भारत के बिहार में शुरूआत हुई है।</p>



<p class="has-vivid-cyan-blue-color has-text-color has-medium-font-size">बिहार के औरंगाबाद ज़िले हॉप्स की खेती </p>



<p>बिहार के औरंगाबाद ज़िले के किसान अमरेश सिंह के अनुसार स्पेशल डिमांड पर ही हॉप शूट्स को खरीदा बेचा जाता है।उन्होंने ट्रायल के तौर पर हॉप शूट्स का उत्पादन किया और अब 60 फीसदी से ज़्यादा उत्पादन हो रहा है ।दूसरी फसलों की तुलना में किसानों को इससे 10 गुना ज़्यादा फायदा होने की संभावना होती है।</p>



<p>इंडियन वेजीटेबल रिसर्च इंस्टीट्यूट वाराणसी में हॉप शूट्स को निगरानी में उगाया जा रहा था। वहां से अमरेश ने उसके बीज जुटाए और अपने स्तर पर उसका उत्पादन किया। अमरेश ने कहा कि इस तरह की नई और कीमती फ़सलों से बिहार जैसे गरीब राज्यों की किस्मत बदल सकती है।</p>



<p>इसे भी पढ़ें:</p>



<p><a href="https://hindi.news18.com/news/knowledge/why-hops-shoots-costliest-vegetable-of-world-how-bihar-cultivates-bhvs-3446804.htm">https://hindi.news18.com/news/knowledge/why-hops-shoots-costliest-vegetable-of-world-how-bihar-cultivates-bhvs-3446804.htm</a></p>



<p>हौप शूट्स का वैज्ञानिक नाम Humulus Lupulus है, जिसका अंतरराष्ट्रीय बाजार काफी बड़ा है। 1000 यूरो&nbsp; यानी&nbsp; कम से कम 87 हज़ार या करीब एक लाख रुपये किलो तक हॉप शूट्स की कीमत आंकी जाती है।छह साल पहले भी&nbsp; यह सब्ज़ी 1000 पाउंड प्रति किलो बिकती थी।</p>



<p>हॉप्स के पौधे के सभी हिस्से किसी न किसी काम आते हैं।बसंत ऋतु में इटली में, सीज़नल डेलीकेसी की तरह समझी जाने वाली हॉप शूट्स की पहली खेप उगती है, तो इसे नीलाम तक किया जाता है और किसी कलाकृति की तरह बोली 1000 यूरो तक पहुंच जाती है।</p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-medium-font-size">क्यों इतनी महंगी है ये हाप्स की सब्ज़ी?</p>



<p>&nbsp;हॉप शूट्स की झाड़नुमा पत्तियां सब्ज़ी की तरह उपयोग में लाई जाती हैं, जबकि इसके फल, फूल और तने का भी उपयोग होता है।शराब उद्योग में खासतौर से बीयर बनाने में और दवाओं खास तौर परएंटीबायोटिक्स के उत्पादन में भी यह बहुत उपयोगी है।इस सब्ज़ी के तने से बनाई गई दवाओं को टीबी के इलाज में बेहद कारगर पाया गया है।</p>



<p>बिहार में हॉप शूट्स की खेती अत्यंत कष्टकर है। यह आसानी से और एक साथ नहीं उग पाती इसलिए इसका बहुत खयाल रखना पड़ता है।लगातार निगरानी और निश्चित स्थितियों में उगने वाली हॉप शूट्स बहुत छोटी ​पत्तियां भी होती हैं, इसलिए बहुत बड़े क्षेत्र में उत्पादन से आप इसे बेचने लायक मात्रा में पाते हैं।</p>



<p class="has-vivid-green-cyan-color has-text-color">यह कैंसर की दवा भी है</p>



<p>हॉप शूट्स को लेकर वैज्ञानिक कई शोधों के बाद यह मालूम कर चुके हैं कि टीबी के साथ ही यह कैंसर के रोग के निदान में भी उपयोगी है। यह कैंसर की कोशिकाओं को फैलने से रोकने में भी मदद करती है।इसके साथ ही, मीनोपॉज़ से जुड़ी समस्याओं, इनसॉम्निया यानी नींद न आने की शिकायतों में भी यह मददगार है।वहीं, यह प्रमुख हर्बल एंटीबायोटिक और सीडेटिव तो है ही।</p>



<p>हॉप शूट्स से मिलने वाले पोषण से उन लोगों को बहुत आराम मिलता है, जिन्हें चिंता, हाइपरएक्टिविटी, नर्वसनेस, बदन दर्द, बेचैनी, यौन संक्रमण, शॉक, तनाव, दांत का दर्द, अल्सर, कार्डियोवैस्कुलर रोग जैसी शिकायतें हों।आर्थराइटिस से लेकर डैंड्रफ तक की समस्या को सुलझाने में भी यह असरदार है।</p>



<p class="has-vivid-purple-color has-text-color has-medium-font-size"> हाप्स  कैसे, पकाया और खाया जाए?</p>



<p>दुनिया की इस सबसे महंगी और बेहद हैरतअंगेज़ सब्ज़ी के बारे में यह भी जान लें कि इसे लोग कैसे खाते हैं।</p>



<p>कई विधियों में सबसे सरल यह है कि हॉप शूट्स को दो से तीन मिनट तक पानी में उबालने के बाद पानी निकालकर इन्हें भाप में पकाया जाता है। फिर नर्म हॉप शूट्स को बटर या चीज़ सॉस के साथ लंच या डिनर के तौर पर खाया जाता है।बीयर में लोग इसका सेवन करते ही हैं।</p>



<p>कृपया इसे भी देखें : </p>



<figure class="wp-block-embed-wordpress wp-block-embed is-type-wp-embed is-provider-media-swaraj-मीडिया-स्वराज"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="wp-embedded-content" data-secret="Vqe8wODkul"><a href="https://mediaswaraj.com/strawberry-production-cash-crops-will-change-farmers-fortunes-dipendra-tiwari/">स्ट्रॉबेरी का उत्पादन: नकदी फसलें बदलेंगी किसानों की किस्मत&#8230;</a></blockquote><iframe loading="lazy" class="wp-embedded-content" sandbox="allow-scripts" security="restricted"  title="&#8220;स्ट्रॉबेरी का उत्पादन: नकदी फसलें बदलेंगी किसानों की किस्मत&#8230;&#8221; &#8212; Media Swaraj | मीडिया स्वराज" src="https://mediaswaraj.com/strawberry-production-cash-crops-will-change-farmers-fortunes-dipendra-tiwari/embed/#?secret=Vqe8wODkul" data-secret="Vqe8wODkul" width="600" height="338" frameborder="0" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no"></iframe>
</div></figure>



<p class="has-medium-font-size"> &#8212;- पंकज प्रसून, वरिष्ठ पत्रकार </p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="alignleft size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="197" height="243" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/11/Pankaj-Prasun.jpg" alt="पंकज प्रसून" class="wp-image-15787"/><figcaption>पंकज प्रसून वरिष्ठ  पत्रकार </figcaption></figure></div>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>म्यांमार में  सैनिक क्रांति  भारत के लिए ख़तरे  की घंटी</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/myanmar-army-take-over-india-pankaj-prasun/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Feb 2021 16:53:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
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					<description><![CDATA[म्यांमार में सैनिक क्रांति&#160; भारत के लिये&#160; ख़तरे की घंटी है।भारत के&#160; उत्तर पूर्वी छोर पर स्थित तीन राज्यों की सीमाएँ म्यांमार से मिलती हैं। उन राज्यों में आतंकवादी घटनाओं के जिम्मेदार संगठनों के बारे में कहा जाता है कि वे म्यांमार से अपनी कार्रवाई संचालित करते हैं।हाल में यह खबर भी आई थी कि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>म्यांमार में सैनिक क्रांति&nbsp; भारत के लिये&nbsp; ख़तरे की घंटी है।भारत के&nbsp; उत्तर पूर्वी छोर पर स्थित तीन राज्यों की सीमाएँ म्यांमार से मिलती हैं। उन राज्यों में आतंकवादी घटनाओं के जिम्मेदार संगठनों के बारे में कहा जाता है कि वे म्यांमार से अपनी कार्रवाई संचालित करते हैं।हाल में यह खबर भी आई थी कि वहां आतंकियों को चीनी और पाकिस्तानी प्रशिक्षित कर रहे है.</p>



<p>दस साल बाद&nbsp; पांच करोड़ चालीस लाख की आबादी वाला देश म्यांमार एक बार फिर सैनिक शासन की गिरफ़्त में आ गया है। वहां की सेना ने सर्वोच्च नेता&nbsp; &nbsp; 75 वर्षीय आंग सान सू ची समेत कई नेताओं को गिरफ़्तार करने के बाद सेना प्रमुख मिन आंग लाइंग ने सत्ता संभाल ली है।&nbsp;</p>



<p>लेकिन जनता ने सैनिक शासन का विरोध करना शुरू कर दिया है। देश के सबसे बडे़ शहर यांगोन में बड़ी संख्या में लोगों ने रसोई के बरतन और कार के होर्न बजाकर सैनिक तानाशाही का विरोध जताया ।डाक्टरों ने भी घोषणा की है कि वे लोग अस्पताल में काम छोड़ देंगे। एनीसथीसिया  के एक डॉक्टर ने नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया है।उनका कहना है कि वे तानाशाह के तहत काम नहीं कर सकते।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="620" height="413" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/yangon.jpeg" alt="यांगोन में बर्तन बजा कर विरोध जताते हुए लोग" class="wp-image-20639" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/yangon.jpeg 620w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/02/yangon-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 620px) 100vw, 620px" /><figcaption>यांगोन में बर्तन बजा कर विरोध जताते हुए लोग</figcaption></figure>



<p>पहले तो सेना के भूतपूर्व जनरल माइंत स्वे को राष्ट्रपति घोषित कर दिया गया । जिन्होंने फौरन सेना प्रमुख मिन आंग लाइंग को राष्ट्रपति घोषित कर दिया।&nbsp;</p>



<p>64 वर्षीय जनरल लाइंग इस वर्ष जुलाई में सेवा निवृत्त होने वाले हैं। मानवाधिकार उल्लंघन के कारण अमरीका ने सन्&nbsp; 2019 में उनकी अमरीका में संपत्ति जब्त कर ली थी। जनरल लाइंग ने यंगून विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद तीसरी बार में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में दाखिला लिया था। वे सन् 2009 में ब्यूरो औफ स्पेशल ओप्रेशन &#8211; 2 के कमांडर बने ।</p>



<p>सेना ने&nbsp; 24 मंत्रियों और उनके सहयोगियों को हटा दिया है और उनकी जगह अपने 11 लोगों को नामजद किया है।</p>



<p>सेना ने सोमवार को होने वाली संसद की बैठक को स्थगित कर दिया और सभी सांसदों को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया। और उनके घरों के बाहर फ़ौजी सैनिकों का पहरा लगा दिया।</p>



<p><a href="https://apnews.com/article/key-events-timeline-myanmar-dee0f68fa82b5f7729191d1bf7beec84">https://apnews.com/article/key-events-timeline-myanmar-dee0f68fa82b5f7729191d1bf7beec84</a></p>



<p>&nbsp;पिछले साल हुए चुनाव के बाद म्यामांर के नवनिर्वाचित सांसद राजधानी नेपीता में संसद के पहले सत्र के लिए सोमवार को एकत्रित होने वाले थे।&nbsp;</p>



<p>आंग सान सू ची को म्यांमार में किसी देवी का सम्मान प्राप्त है ‌। वे वहां लोकतंत्र की स्थापना के लिये सतत् संघर्षरत रहीं हैं और15&nbsp; वर्षों तक घर में नजरबंद रहने के बाद सन् 2000 में&nbsp; छूटीं। इस बीच सन् 1991में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।</p>



<p>उनकी रिहाई के बाद सैनिक शासन द्वारा तैयार किये गये संविधान के तहत संसदीय चुनाव हुए जिसमें एक व्यवस्था थी कि वे राष्ट्रपति कदापि नहीं हो सकतीं। लुंज-पुंज लोकतंत्र के बावजूद देश की सर्वोच्च नेता वहीं रहीं।</p>



<p>लेकिन सात लाख रोहिंग्या मुसलमानों के&nbsp; उत्पीड़न और&nbsp; नरसंहार के मामले में उन्होंने अपनी सेना के जुल्मों सितम का समर्थन करके अपनी अंतरराष्ट्रीय सम्मान खो दी।</p>



<p>नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी पार्टी के प्रवक्ता ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स से कहा, सू ची, राष्ट्रपति विन म्यिंट और दूसरे नेताओं को तड़के हिरासत में ले लिया गया ।</p>



<p>&nbsp;म्यांमार की राजधानी नेपीटाव और मुख्य शहर यंगून में सड़कों पर सैनिक मौजूद हैं।टेलीफ़ोन और इंटरनेट सेवाएं काट दी गई हैं।&nbsp;</p>



<p>पिछले वर्ष आठ नवंबर को हुए आम चुनाव में सत्तारूढ़ &#8216;नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी&#8217; को 476 में से 396 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जिसके बाद &#8216;स्टेट काउंसलर&#8217; आंग सान सू ची को पांच और वर्षों के लिये सरकार बनाने का मौका मिल गया था।&nbsp;</p>



<p>सेना के समर्थन वाली &#8216;यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट&#8217; पार्टी को केवल 33 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इससे नाराज़ हो कर सेना ने डोनाल्ड ट्रंप की तर्ज पर कई बार सार्वजनिक रूप से चुनाव में धांधली का आरोप लगाया । साथ ही उसने सरकार और केन्द्रीय चुनाव आयोग से नतीजों की समीक्षा करने का भी आग्रह किया ।</p>



<p>ऑनलाइन समाचार पोर्टल &#8216;म्यामांर नाऊ &#8216; के अनुसार सू ची और उनकी पार्टी के अध्यक्ष को सोमवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि पोर्टल पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गयी है। राजधानी&nbsp; नेपीता के लिए संचार के सभी माध्यम बंद कर दिये गये हैं और सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी से किसी का संपर्क नहीं हो पा रहा है।</p>



<p>सेना के हालिया बयानों से सैन्य तख्तापलट की आशंका व्यक्त की जा रही थी।&nbsp; रविवार को <em>वाशिंगटन पोस्ट</em> ने भी एक रिपोर्ट में इस आशय का समाचार प्रकाशित किया था। सू ची की पार्टी ने संसद के निचले और ऊपरी सदन की कुल 476 सीटों में से 396 पर जीत दर्ज की थी जो बहुमत के आंकड़े 322 से कहीं अधिक था। </p>



<p>लेकिन सन् 2008 में सेना द्वारा तैयार किए गए संविधान के तहत कुल सीटों में 25 प्रतिशत सीटें सेना को दी गयी हैं जो संवैधानिक बदलावों को रोकने के लिए काफी है। कई अहम मंत्री पदों को भी सैन्य नियुक्तियों के लिए सुरक्षित रखा गया है।</p>



<p>म्यांमार की राजनीति में सेना का हमेशा से ही दबदबा रहा है। सन् 1962 में तख्तापलट के बाद से सेना ने देश पर करीब 50 सालों तक प्रत्यक्ष रूप से शासन किया है।</p>



<p>लोकतांत्रिक व्यवस्था की &nbsp; मांग तेज होने पर&nbsp; सोनू 2008 में सेना नया संविधान लाई । जिसमें लोकतांत्रिक सरकार और विपक्षी दलों के नेता को जगह दी गई लेकिन सेना की स्वायत्तता और वर्चस्व को बनाए रखा गया।</p>



<p>नए चार्टर के तहत, सेना प्रमुख को अपने लोगों की नियुक्ति करने और सैन्य मामलों में अंतिम फैसला करने का अधिकार दिया गया था। अर्थात सेना प्रमुख को किसी के प्रति जवाबदेह नहीं बनाया गया था।</p>



<p>म्यांमार की लोकतांत्रिक सरकार किसी कानून को ला सकती है लेकिन इसे लागू कराने की शक्ति सेना प्रमुख के पास ही है।पुलिस, सीमा सुरक्षा बल और प्रशासनिक विभाग सबका नियंत्रण सेना प्रमुख के पास ही रखा गया है।सेना के लिए संसद की एक-चौथाई सीटें आरक्षित हैं और सरकार में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और सीमा मामलों के मंत्री की भी नियुक्ति सेना प्रमुख ही करता है।</p>



<p>सेना प्रमुख किसी भी संवैधानिक बदलाव पर वीटो करने का अधिकार रखता है। इसके अलावा, सेना प्रमुख किसी भी चुनी हुई सरकार का तख्तापलट करने की ताकत रखता है।</p>



<p>सेना के पास देश की दो बड़ी कंपनियों का स्वामित्व है। इन कंपनियों का शराब, तंबाकू, ईंधन और लकड़ी समेत कई अहम क्षेत्रों पर एकाधिकार है।</p>



<p><strong>कौन हैं आंग</strong> <strong>सान सू</strong> <strong>ची</strong>?</p>



<p>सू ची (75) देश की सबसे अधिक प्रभावी नेता हैं और देश में सैन्य शासन के खिलाफ दशकों तक चले अहिंसक संघर्ष के बाद वे देश की नेता बनीं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है। वे तत्कालीन बर्मा के महान क्रांतिकारी नेता&nbsp; बॉज्ञोटी औंग सान&nbsp; की एकलौती पुत्री&nbsp; हैं जिन्हें आधुनिक म्यांमार का राष्ट्रपिता माना जाता है। उन्होंने बर्मा को ब्रिटिश उपनिवेशवादियों से आज़ाद कराया था। बर्मा की सशस्त्र सेना की भी उन्होंने ही स्थापना की थी</p>



<p>आजादी मिलने से पहले ही सन् 1947में चुनावी जीत के बाद उनकी और उनके मंत्रिमंडल के अधिकतर सदस्यों की हत्या कर दी गयी थी ।</p>



<p>म्यांमार में सेना को टेटमदॉ के नाम से जाना जाता है। सेना ने पिछले साल नवंबर में हुए आम चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाया हालांकि वह इसके सबूत देने में नाकाम रही। देश के स्टेट यूनियन इलेक्शन कमीशन ने पिछले सप्ताह सेना के आरोपों को खारिज कर दिया था।</p>



<p>इन आरोपों से पिछले सप्ताह उस वक्त राजनीतिक तनाव पैदा हो गया जब सेना के एक प्रवक्ता ने अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में एक पत्रकार के सवाल के जवाब में सैन्य तख्तापलट की आशंका से इनकार नहीं किया। मेजर जनरल जॉ मिन तुन ने कहा था कि सेना &#8221;संविधान के मुताबिक कानून का पालन करेगी।&#8221;</p>



<p>कमांडर इन चीफ सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग ने भी बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कानून को सही तरीके से लागू नहीं किया गया तो संविधान को रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही देश के कई बड़े शहरों की सड़कों पर बख्तरबंद वाहनों की तैनाती से सैन्य तख्तापलट की आशंका बढ़ गयी।</p>



<p>हालांकि शनिवार को सेना ने तख्तापलट की धमकी देने की बात से इनकार किया और अज्ञात संगठनों एवं मीडिया पर उसके बारे में भ्रामक बातें फैलाने तथा जनरल की बातों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। सेना ने रविवार को भी अपनी बात दोहराते हुए तख्तापलट की आशंका को खारिज किया और इस बार उसने विदेशी दूतावासों पर सेना के बारे में भ्रामक बातें फैलाने का आरोप लगाया।</p>



<p>अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकारियों और विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे म्यामांर में हो रहे घटनाक्रम की खबरों से अवगत हैं ।बाइडेन प्रशासन के लिये यह एक चुनौती है। बाइडेन ने घोषणा की है कि दुनिया में कहीं भी हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने के लिये वे प्रतिबद्ध हैं। म्यांमार में हुई सैनिक क्रान्ति से वहां चल रही लोकतांत्रिक प्रक्रिया पटरी से उतर गई है।</p>



<p>सैनिक क्रांति से पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने म्यांमार को कोरोना से&nbsp; लड़ने के लिये 35 करोड़ डॉलर नकद दिया था। &nbsp; इसकेे पहले भी उसे 70 करोड़ डॉलर दिये थे।</p>



<p>भारत के लिये भी यह ख़तरे की घंटी है।इसके उत्तर पूर्वी छोर पर स्थित तीन राज्यों की सीमाएं म्यांमार से मिलती हैं। उन राज्यों में आतंकवादी घटनाओं के जिम्मेदार संगठनों के बारे में कहा जाता है कि वे म्यांमार से अपनी कार्रवाई संचालित करते हैं।हाल में यह खबर भी आई थी कि वहां आतंकियों को चीनी और पाकिस्तानी प्रशिक्षित कर रहे हैं। लेकिन भारत का म्यांमार के सैनिक शासन के साथ अच्छा संबंध रहा है।</p>



<p>इसीलिये इस तख्ता पलट पर भारत ने संतुलित भाषा का इस्तेमाल किया है ।</p>



<p>म्यांमार दक्षिण पूर्वी एशिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसकी 1,624 किलोमीटर सरहद उत्तर पश्चिम भारत के साथ मिलती है।बंगाल की खाड़ी में&nbsp; 725 किलोमीटर सामुद्रिक सीमा है।&nbsp;</p>



<p>म्यांमार बिमस्टेक का महत्वपूर्ण सदस्य तो है ही भारत ने वहां &nbsp; कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं भी चला रखी हैं। सामरिक दृष्टि से भी भारत के लिए म्यांमार एक महत्वपूर्ण देश है। गंगा -मीकौंग सहयोग का एक सदस्य भी है।&nbsp; भारत- म्यांमार- थाईलैंड हाइवे और कालादान मल्टीमोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट पर भी काम चल रहा है जो कोलकाता बंदरगाह को&nbsp; म्यांमार के राखिनी राज्य स्थित सितवे बंदरगाह से जोड़ देगा।</p>



<p class="has-normal-font-size"><strong>&#8212; पंकज प्रसून</strong> , <strong>विदेश मामलों के जानकार </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अमेरिका की युवा राष्ट्रकवि अमांडा गोर्मन की महत्वाकांक्षा</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/young-nationalist-amanda-gorman-wants-to-contest-presidential-election-in-2036-pankaj-prasun/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jan 2021 11:28:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[Pankaj Prasun]]></category>
		<category><![CDATA[Young nationalist amanda gorman]]></category>
		<category><![CDATA[अमांडा गोर्मन]]></category>
		<category><![CDATA[बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[युवा राष्ट्रकवि]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका की पहली युवा राष्ट्रकवि अमांडा गोर्मन ,जो बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह में, द हिल वी क्लाइंब कविता का पाठ , सबसे कम उम्र की कवि जिसे राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में कविता पाठ करने को मिला. सन 1998 में वेस्टचेस्टर में जन्मी अमांडा गोर्मन का परिवार अत्यंत गरीब था ।उनकी माँ ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><br>अमेरिका की पहली युवा राष्ट्रकवि अमांडा गोर्मन ,जो बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह में, द हिल वी क्लाइंब कविता का पाठ , सबसे कम उम्र की कवि जिसे राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में कविता पाठ करने को मिला.</p>



<p>सन 1998 में वेस्टचेस्टर में जन्मी अमांडा गोर्मन का परिवार अत्यंत गरीब था ।उनकी माँ ने अकेले ही उन्हें और उनकी बहनों को पाला जिनमें उनकी जुड़वां बहन भी थी। उनकी मां वाट्स में अंग्रेज़ी की शिक्षिका थीं । उनके घर में टेलीविज़न भी नहीं था।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/cf56af7d-b4b0-4b14-9416-36d12a3d4b9d.jpg" alt="ALT=&quot;युवा राष्ट्रकवि अमांडा गोर्मन&quot;" class="wp-image-20121" width="223" height="297" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/cf56af7d-b4b0-4b14-9416-36d12a3d4b9d.jpg 640w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/cf56af7d-b4b0-4b14-9416-36d12a3d4b9d-225x300.jpg 225w" sizes="auto, (max-width: 223px) 100vw, 223px" /><figcaption>युवा राष्ट्रकवि अमांडा गोर्मन</figcaption></figure></div>



<p>अपनी प्रतिभा के बल पर अमांडा गोर्मन ने  उच्च शिक्षा प्राप्त की और सन् 2017 में अमेरिका की पहली युवा राष्ट्रकवि यानी पोएट लौरिएट चुनी गईं ।उन्होंने सन् 2016 में एक स्वयंसेवी संस्था बनाई जिसका नाम था वन पेन वन पेज जिसके तहत वे नारी <a href="https://www.bbc.com/hindi/media-54857358">अधिकार</a>, शोषण , अश्वेत लोगों की हालत में सुधार लाने और हाशिये पर पड़े लोगों के लिए मुहिम चलाने लगीं।</p>



<p>उनकी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जो बाइडेन के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद उन्हें ही अपनी इस कविता का पाठ करने को निमंत्रित किया गया । यह एक जबर्दस्त उपलब्धि है..और इस तरह वे रोबर्ट फ्रॉस्ट , माया एंजेलू और एलिज़ाबेथ एलेग्जेंडर जैसे सम्मानित महाकवियों के समकक्ष आ गईं। उन्हें बाइडेन की पत्नी डॉ जिल बाइडेन ने निमंत्रित किया था।उन्हें अपनी कविता का पाठ करने के लिए सिर्फ पांच मिनट का समय मिला था।</p>



<p>उस कविता में बाइबिल के साथ जॉन कैनेडी और रेवरेंड मार्टिन लूथर किंग की भाषण कला की झलक तो मिलती ही है लोकतंत्र के प्रति उनके अटूट विश्वास की गाथा भी है। वह एक राजनीतिक कविता है जिसमें हाल ही में हुए ट्रंप समर्थक बलवाइयों की भी परोक्ष रूप से चर्चा है। सन् 2017में गोर्मन ने घोषणा की थी कि 2036 में वे राष्ट्रपति का चुनाव लड़ेंगीं।हिलरी क्लिंटन ने उनकी इस कविता को सुनने के बाद ट्वीट  किया कि वे उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करती हैं।</p>



<p>हम अपने पाठकों के लिए उनकी उसी कविता का पहली बार हिंदी अनुवाद प्रस्तुत कर रहे हैं ।</p>



<p><a href="https://mediaswaraj.com/a-look-at-the-writing-and-life-of-eminent-poet-smriti-savitri-shukla-nisha/" rel="noreferrer noopener" target="_blank">कवियत्री श्रीमती सावित्री शुक्ल ‘निशा के जीवन पर एक दृष्टि:(Opens in a new browser tab)</a></p>



<p class="has-vivid-red-color has-text-color has-large-font-size">जिस पहाड़ी पर चढ़े हम&#8212; अमांडा गोर्मन</p>



<p>वो दिन जब आता है हम खुद से पूछते हैं<br>कहां पा सकते हैं हम उस रौशनी को<br>इस असमाप्त लगती छाँव में?<br>नुकसान जिसे हम ढोते हैं<br>समुद्र का एक भार जिसे हमें उतारना ही है<br>हम भूखे जानवर का कर चुके हैं सामना बहादुरी से<br>हमने सीखी है<br>खामोशी हमेशा<br>नहीं होती है पुरसुकून<br>जब दिन आता है हम पूछते हैं खुद से<br>और वह मानक और धारणा<br>कि वह जो सही लगता है<br>हमेशा न्यायपूर्ण नहीं होता<br>फिर भी सवेरा है हमारा<br>हमारे जानने से पहले<br>हम पूरा करते उसे<br>जैसे तैसे हमने किया है उसे पूरा<br>हम बर्बादी के हैं वे गवाह<br>उस देश के जो टूटा नहीं<br>है महज अधूरा<br>हम वंशज हैं उस देश के<br>उस वक्त के<br>जहां एक दुबली पतली अश्वेत लड़की<br>गुलामों की वंशज<br>जिसे एक अकेली मां ने पाला<br>वह भी देख सकती है<br>राष्ट्रपति बनने का सपना<br>और खुद को पाती है दुहराती और याद करती<br>और हां,हम बहुत दूर हैं चमक दमक से<br>और प्राचीन से<br>पर उसका यह मतलब नहीं कि<br>हम कोशिश कर रहे एक संघ बनाने की<br>जो मजबूत हो<br>हम बनाना चाहते एक संघ ऐसा<br>जिसमें रहें लोग<br>हर तरह,हर नस्ल और हर तरीके के<br>ताकि हम उठा सकें नज़रें अपनी<br>उसकी ओर जो नहीं खड़ा हमारे बीच<br>पर वो जो हमारे आगे खड़ा है<br>उस विभाजन को हम कर देते हैं बंद<br>जानते हो क्यों<br>अपने मुस्तकबिल को रख के अपने आगे<br>रख देंगे हम अलग अपने मतभेदों को<br>रख देंगे हम अपने हथियारों को<br>ताकि पहुंच सकें हमारी बांहें एक दूसरे तक<br>किसी को भी नहीं हम चाहते देनी तकलीफ़<br>हम चाहते सभी के लिए सद्भाव<br>कोई और नहीं<br>तो इस धरती को ही कहने दो यह सच है<br>कि तकलीफ़ में भी हम बढ़ते गये<br>कि जब हमें दुःख हो रहा था<br>हमने नहीं छोड़ी उम्मीद<br>थके हुए थे फिर भी हमने साथ मिल कर कोशिश की<br>कि हम हमेशा साथ रहेंगे ,जीतेंगे<br>इसलिए नहीं कि हम जानेंगे हार कभी फिर<br>इसलिए कि हममें कभी नहीं पड़ेगी फूट<br>धर्म ग्रन्थ कहते हैं हमसे यह सोचो<br>कि हर कोई बैठेगा<br>अपनी ख़ास लता और अंजीर के पेड़ के नीचे<br>और डरा सकेगा उन्हें न कोई<br>अगर हम जीना चाहते अपने समय को ठीक से<br>तो हमारी जीत होगी नहीं हथियार से<br>वह होगी उन पुलों से जिन्हें हमने बनाया था<br>दरख़्तों से ख़ाली जगह का यही वादा है<br>जिस पहाड़ी पर चढ़े हम<br>क्योंकि अमेरिकन होना ही गर्व है<br>जो हमें मिली है विरासत में<br>वह बीता हुआ कल है<br>और हम कर सकते जिसकी मरम्मत कैसे<br>हमने देखी है वह ताकत<br>हमारे देश को बिखरा देगी जो<br>साझा करने की जगह<br>कर देगी बर्बाद हमारे अपने देश को<br>अगर उसका मकसद था<br>लोकतंत्र को विलम्बित कर देना<br>उनकी यह मंशा हो गयी थी करीब करीब पूरी<br>गोकि लोकतंत्र को किया जा सकता है<br>विलम्बित समय समय पर<br>उसे कभी भी नहीं हराया जा सकता है हमेशा के लिए<br>उस सच में<br>उस यकीन में हमारी आस्था है<br>जब तक हमारी ऑंखें देखतीं भविष्य को<br>इतिहास गडाये हुए है अपनी निगाहें हम पर<br>यह युग है महज प्रतिदान का<br>उसकी स्थापना के वक्त से ही हमें डर था<br>हम ज़रा भी नहीं थे तैयार वैसे डरावने घंटे के उत्तराधिकारी बनने के लिए<br>पर उसीमें हमने पाई वह ताक़त<br>नया अध्याय लिखने के लिए<br>खुद पर उम्मीद और हंसी देने के लिए<br>तो जब हमने एक बार पूछा&#8211;<br>कि कैसे हम पर आ सकता है महाविनाश ?<br>हम पीछे नहीं हटेंगे<br>और आगे बढ़ जायेंगे जैसा होना था<br>चोटों से भरा एक देश<br>उदार पर मजबूत<br>भयंकर और आज़ाद<br>हमें पीछे नहीं घुमाया जा सकता<br>धमका कर रोका नहीं जा सकता<br>हमें पता है हमारी निष्क्रियता और जड़ता<br>हमारी अगली पीढ़ी को मिल जायेगी विरासत में<br>हमारी ग़लतियाँ बन जायेंगी उनका बोझ<br>पर इतना तो तय है<br>अगर मिला दें हम दयालुता को अपनी ताकत से<br>और ताकत को अधिकार से<br>तो प्यार बन जायेगा हमारी विरासत<br>जो बदल देगी हमारे बच्चों का<br>जन्मसिद्ध अधिकार<br>तो क्यों नहीं हम छोड़ जायें अपने पीछे एक देश<br>जैसा हमें मिला था उससे काफ़ी बेहतर<br>तांबे जैसी पकी हमारी छाती से हर सांस निकलती<br>बना देगी उसे बेहतरीन<br>हम पश्चिम की सुनहरी पहाड़ियों से उठेंगे<br>हम उत्तर पश्चिम की तेज़ हवाओं से उटठेंगे<br>जहां हमारे पूर्वजों ने पहले महसूस किया था क्रान्ति को<br>हम उठेंगे मध्य पश्चिम राज्यों के झील घिरे शहरों से<br>हम उठेंगे सूरज की गर्मी से तपते दक्षिण से<br>हम करेंगे पुनर्निर्माण, समाधान और बरामद<br>देश के हर मालूम नुक्कड़ और कोने से।<br>हमारे लोग तरह तरह के और सुन्दर<br>उभरेंगे सुंदर और चकनाचूर<br>जब दिन आयेगा<br>छाये से हम निकल पड़ेंगे<br>जलते हुए और निडर<br>तब नया सवेरा खिल उठेगा<br>जैसे ही हम उसे आज़ाद करेंगे<br>क्योंकि वहां हमेशा है प्रकाश<br>सिर्फ हम उतने बहादुर हों कि उसे देख पायें<br>अगर बहादुर बन जाये हम उसके जैसा बन जाने को</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/09/Pankaj-Prasun.jpg" alt="चीन" class="wp-image-12206" width="128" height="158"/><figcaption>पंकज प्रसून
वरिष्ठ पत्रकार</figcaption></figure></div>



<p>आलेख और अनुवाद &#8212; पंकज प्रसून</p>
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		<item>
		<title>मोहन राकेश एक सफल नाटककार&#8230;</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/mohan-rakesh-successful-dramatist-pankaj-prasu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Jan 2021 14:54:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[आषाढ़ का एक दिन]]></category>
		<category><![CDATA[जयशंकर प्रसाद]]></category>
		<category><![CDATA[मोहन राकेश]]></category>
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					<description><![CDATA[मोहन राकेश एक सफल नाटककार थे। भारतेंदु हरिश्चंद्र और जयशंकर प्रसाद के बाद हिंदी नाटकों में मोहन राकेश का युग रहा।से यदि लीक से हटकर कोई नाम उभरता है तो वह है मोहन राकेश का। ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>मोहन राकेश<br>8 जनवरी को जिनकी 96 वीं जयंती है&#8230;</p>



<p>हिन्दी नाटक विधा को समसामयिक बनाने वाले नाटककार मोहन राकेश का नाम भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और जयशंकर प्रसाद के बाद आदर से लिया जाता है। उनकी जन्म तिथि पर यह आलेख उनके रचना संसार पर विहंगम दृष्टि डालता है।</p>



<p>हिंदी में नाटक विधा को समसामयिक बनाने और नयी दिशा देने वाले प्रसिद्ध नाटककार , निबंधकार और कहानीकार मोहन राकेश का जन्म 8 जनवरी 1925 ई. को पंजाब के अमृतसर में हुआ था।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/d2eaf9a3-77ba-4446-aaf9-f435bb9440f1.jpg" alt="" class="wp-image-18964" width="287" height="328"/><figcaption>मोहन राकेश</figcaption></figure></div>



<p>उनके पिता श्री करमचन्&#x200d;द गुगलानी अधिवक्&#x200d;ता थे तथा साहित्य और कला प्रेमी थे। जिसका प्रभाव मोहन राकेश के जीवन पर पड़ा। उन्होंने लाहौर के ओरियण्&#x200d;टल कॉलेज से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पंजाब विश्वविद्यालय से हिंदी औार संस्&#x200d;कृत विषयों में एम्.ए. किया ।फिर मुम्&#x200d;बई, शिमला, जालन्&#x200d;धर तथा दिल्&#x200d;ली विश्&#x200d;वविद्यालयों में अध्&#x200d;यापन किया। किंतु अध्यापन में उनका दिल नहीं लगा।</p>



<p>सन् 1962-63 ई. मेंं टाइम्स औफ इंडिया की मासिक कहानी पत्रिका &#8216;सारिका&#8217; के सम्&#x200d;पादक हुए । लेकिन कुछ समय बाद उसे भी छोड़कर स्&#x200d;वतन्&#x200d;त्र लेखन करने लगे ।</p>



<p>सन् 1963 से 1972 में मृत्युपर्यंत&#x200d; स्वतंत्र लेखन ही करते रहे। &#8216;नाटक की भाषा&#8217; पर शोधकार्य करने के लिए उन्&#x200d;हें नेहरू फैलोशिप मिली लेकिन 3 दिसम्&#x200d;बर 1972 को दिल्ली में <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%A8_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B6">असामयिक</a> मृत्&#x200d;यु होने के कारण वह महत्वपूर्ण कार्य अधूरा् रह गया।</p>



<p>हालांकि मोहन राकेश एक उत्&#x200d;कृष्&#x200d;ट नाटककार के रूप में प्रसिद्ध हैं, लेकिन उन्&#x200d;होंने साहित्&#x200d;य की अन्&#x200d;य विधाओं-उपन्&#x200d;यास, कहानी, निबध, यात्रावृत्त और आत्&#x200d;मकथा और डायरी लेखन आदि पर भी बहुत अच्छा लिखा है। आधुनिक हिंदी गद्य को नयी दिशा प्रदान करने वाले साहित्&#x200d;यकारों में मोहन राकेश का नाम अग्रणी पंक्ति में लिया जाता है ‌‌।</p>



<p class="has-white-color has-black-background-color has-text-color has-background has-large-font-size"><strong>मोहन राकेश</strong> <strong>की प्रमुख कृतियॉं </strong>&#8230;</p>



<p class="has-normal-font-size"><br>निबन्&#x200d;ध-संग्रह- परवेश, बकलमखुद<br>नाटक- आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस,आधे-अधूरे,पैैैर तले की जमीन (अधूरा, जिसे कमलेश्वर ने पूरा किया)<br>एकांकी- अण्&#x200d;डे के छिलके तथा अन्&#x200d;य एकांकी, बीज नाटक, दूध और दांत (अप्रकाशित)<br>रूपान्&#x200d;तर- संस्&#x200d;कृत के शाकुन्&#x200d;तलम् तथा मृच्&#x200d;छकटिकम् नाटकों का हिन्&#x200d;दी नाट्य रूपान्&#x200d;तर<br>उपन्&#x200d;यास- अँधेरे बन्&#x200d;द कमरे, न आने वाला कल, अन्&#x200d;तराल, नीली रोशनी की बाहें (अप्रकाशित)<br>कहानी-संग्रह- क्&#x200d;वार्टर, पहचान तथा वारिस नामक तीन कहानी-संग्रह हैं, जिनमें कुल 54 कहानियॉं हैं। यात्रावृत्त- आखिरी चट्टान तक<br>जीवनी-संकलन- समय सारथी<br>डायरी- मोहन राकेश की डायरी</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/c21de2f2-a7ad-40bb-ad1e-2ea1915813d4.jpg" alt="" class="wp-image-18966" width="575" height="878" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/c21de2f2-a7ad-40bb-ad1e-2ea1915813d4.jpg 448w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/c21de2f2-a7ad-40bb-ad1e-2ea1915813d4-196x300.jpg 196w" sizes="auto, (max-width: 575px) 100vw, 575px" /><figcaption>आषाढ़ का एक दिन</figcaption></figure>



<p>मोहन राकेश एक सफल नाटककार थे। भारतेंदु हरिश्चंद्र और जयशंकर प्रसाद के बाद हिंदी नाटकों में मोहन राकेश का युग रहा।से यदि लीक से हटकर कोई नाम उभरता है तो वह है मोहन राकेश का। हालाँकि बीच में और नाटककार भी हुए जिन्होंने आधुनिक हिन्दी नाटक विधा को सुदृढ़ किया किन्तु मोहन राकेश का लेखन सबसे अलग है। उन्होंने हिन्दी नाटक को अँधेरे बन्द कमरों से बाहर निकाला और उसे युगों के रूमानी ऐन्द्रजालिक सम्मोहन से उबारकर एक नए दौर के साथ जोड़कर दिखाया। </p>



<p>उन्होंने हिंदी में नाटक लिखे हैं। किन्तु वे समकालीन भारतीय नाट्य प्रवृत्तियों को भी जताते हैं। उन्होंने हिन्दी नाटक को अखिल भारतीय स्तर ही नहीं प्रदान किया वरन् उसे को विश्व नाटक की सामान्य धारा से जोड़ा।</p>



<p>प्रमुख भारतीय निर्देशक जैसे इब्राहीम अलकाजी,ओम शिवपुरी, अरविन्द गौड़, श्यामानन्द जालान, राम गोपाल बजाज और दिनेश ठाकुर ने मोहन राकेश के नाटकों का निर्देशन किया।</p>



<p>मोहन राकेश के नाटक आषाढ़ का एक दिन तथा लहरों के राजहंस में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद आधुनिक मनुष्य के अंतर्द्वंद और संशयों की गाथा कही गयी है। एक नाटक की पृष्ठभूमि जहां गुप्तकाल है तो दूसरा बौद्धकाल ।</p>



<p><a href="https://mediaswaraj.com/war-_-enemy-_-ram-_-gandhi/" rel="noreferrer noopener" target="_blank">युद्ध की विभीषिका राम, गांधी और आम आदमी(Opens in a new browser tab)</a></p>



<p>आषाढ़ का एक दिन में सफलता और प्रेम में एक को चुनने के द्वन्द्व से जूझते कालिदास के चरित्र के जरिये मोहन राकेश रचनाकार और आधुनिक मनुष्य के मन की पहेलियों को सामने रखते हैं ।</p>



<p>वहीँ प्रेम में टूटकर भी प्रेम को नहीं टूटने देनेवाली इस नाटक की नायिका के रूप में हिंदी साहित्य को एक अविस्मरणीय पात्र दिया है। राकेश के कालिदास विशिष्ट होकर भी खल की भांति दिखते हैं। आधे अधूरे की सावित्री बिन्न्नी किन्नी कभी स्वयं से खीझती है तो कभी आसपास की ज़िन्दगी से</p>



<p>लहरों के राजहंस में और भी जटिल प्रश्नों को उठाते हुए जीवन की सार्थकता, भौतिक जीवन और अध्यात्मिक जीवन के द्वन्द, दूसरों के द्वारा अपने मत को दुनिया पर थोपने का आग्रह जैसे विषय उठाये गए हैं। उनके नाटकों को रंगमंच पर मिली शानदार सफलता इस बात का गवाह है कि नाटक और रंगमंच के बीच कोई खाई नहीं है। उनका तीसरा और सबसे लोकप्रिय नाटक आधे अधूरे है । जिसमें नाटककार ने मध्यवर्गीय परिवार की दमित इच्छाओं कुंठाओं और विसंगतियो को द्दिखाया है ।</p>



<p>इस नाटक की पृष्ठभूमि आधुनिक मध्यवर्गीय समाज है । वर्तमान जीवन के टूटते हुए संबंधों ,मध्यवर्गीय परिवार के कलहपूर्ण वातावरण विघटन ,सन्त्रास ,व्यक्ति के आधे अधूरे व्यक्तित्व तथा अस्तित्व का सजीव चित्रण हुआ है । मोहन राकेश का यह नाटक , अनिता औलक की कहानी दिन से दिन का नाट्यरुपांतरण है ।</p>



<p>मोहन राकेश ने अपनी रचनाओं में सरल, सहज, व्&#x200d;यावहारिक, संस्&#x200d;कृतनिष्&#x200d;ठ एवं परिमार्जित खड़ी बोली का प्रयोग किया है। कहीं-कहीं दैनिक जीवन में प्रचलित उर्दू एवं अँग्रेजी के शब्&#x200d;दों का प्रयोग भी मिलता है। उनकी भााषा सजीव, रोचक और प्रवाहपूर्ण है।<br>इ्उनकी रचनाएं प्रमुखत: वर्णनात्&#x200d;म्&#x200d;क ,विवरणात्&#x200d;मक भावात्&#x200d;मक तथा चित्रात्&#x200d;मक शैलियों में हैं।</p>



<p>संगीत नाटक अकादमी ने सन् 1968 में उन्हें सम्मानित किया था&#8230;</p>



<p><strong>पंकज प्रसून, वरिष्ठ पत्रकार </strong></p>



<div class="wp-block-image is-style-default"><figure class="alignleft size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="197" height="243" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/11/Pankaj-Prasun.jpg" alt="पंकज प्रसून " class="wp-image-15787"/><figcaption>पंकज प्रसून </figcaption></figure></div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड  ट्रम्प को  पद से हटाने पर विचार</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/american-cabinet-discuss-removal-of-president-donald-trump-pankaj-prasun/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Jan 2021 10:29:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[अमरीकी संसद पर हमला]]></category>
		<category><![CDATA[हार स्वीकार नहीं रहे ट्रंप]]></category>
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					<description><![CDATA[ अमरीकी मीडिया के अनुसार कैबिनेट ने अमेरिकी संविधान के 25 वें संशोधन पर चर्चा की, जिसमें किसी राष्ट्रपति को 'अपनी शक्ति और कर्तव्यों को छोड़ने में नाकाम रहने की स्थिति में' उसे  उसके उप-राष्ट्रपति और कैबिनेट की सहमति  से हटाया जा सकता है। वैसे नियमानुसार तेरह दिन बाद ट्रंप  की राष्ट्रपति पद से विदाई होनी है।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैबिनेट संसद भवन में ट्रम्प समर्थकों द्वारा हिंसा के बाद  उन्हें पद से हटाए जाने की संभावनाओं पर  विचार कर रही है. </p>



<p> अमरीकी मीडिया के अनुसार कैबिनेट ने अमेरिकी संविधान के 25 वें संशोधन पर चर्चा की, जिसमें किसी राष्ट्रपति को &#8216;अपनी शक्ति और कर्तव्यों को छोड़ने में नाकाम रहने की स्थिति में&#8217; उसे&nbsp; उसके उप-राष्ट्रपति और कैबिनेट की सहमति&nbsp; से हटाया जा सकता है। वैसे नियमानुसार तेरह दिन बाद ट्रंप&nbsp; की राष्ट्रपति पद से विदाई होनी है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="789" height="460" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/अमेरिका-हिंसा-.jpeg" alt="अमेरिका में संसद के बाहर ट्रम्प समर्थकों का हंगामा " class="wp-image-18985" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/अमेरिका-हिंसा-.jpeg 789w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/अमेरिका-हिंसा--300x175.jpeg 300w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/अमेरिका-हिंसा--768x448.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 789px) 100vw, 789px" /><figcaption>अमेरिका में संसद के बाहर ट्रम्प समर्थकों का हंगामा </figcaption></figure>



<p>किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि लोकतंत्र का आदर्श समझे जाने वाले अमेरिका में ऐसे दृश्य देखने को मिलेंगे.संसद भवन पर चढ़ाई करते बलवाई।हाल के अंदर जाने बचाने के लिये छुपते सांसद। बलवाइयों का पीछा करते सुरक्षा बल के जवान। गोलियां चलती हैं और एक महिला समेत तीन लोग मारे जाते हैं।</p>



<p>47 लोगों को कर्फ़्यू तोड़ने के जुर्म में पकड़ा गया है।हिंसा के दौरान मारी गईं महिला का&nbsp; नाम एशली बैबिट था जो सैन डिएगो की रहने वाली थी।अमेरिकी मीडिया के अनुसार, एशली यूएस एयर फ़ोर्स में भी रह चुकी थी।कैपिटल बिल्डिंग में घुसते समय एशली को गोली लगी। वह&nbsp; अन्य दंगाइयों के साथ थी।</p>



<p>अमेरिकी प्रसारक फ़ॉक्स न्यूज़ के अनुसार वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पक्की  समर्थक थीं।गोली लगने के बाद एशली को अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई थी, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="660" height="440" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/अमरीकी-संसद-में-हिंसा-.jpeg" alt="" class="wp-image-18986" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/अमरीकी-संसद-में-हिंसा-.jpeg 660w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/01/अमरीकी-संसद-में-हिंसा--300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 660px) 100vw, 660px" /><figcaption>अमेरिकी संसद के भीतर का दृश्य </figcaption></figure>



<p>यह हॉलीवुड की किसी मारधाड़ वाली फिल्म का दृश्य नहीं है। यह धरती के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश अमेरिका&nbsp; की राजधानी वाशिंगटन में बुधवार को हुई घटना है।&nbsp;</p>



<p class="has-large-font-size">संसद में पहली बार ऐसी हिंसा </p>



<p>वहां के संसद भवन को कैपिटल कहा जाता है। पिछले 220 वर्षों में इस इमारत पर कई बार हमले हुए हैं । सन् 1814 के युद्ध में ब्रिटिश सेना उसके अंदर घुस गयी थी और जबर्दस्त तोड़फोड़ की थी।</p>



<p>लेकिन ऐसा हमला पहले कभी नहीं हुआ था। क्योंकि इसे चुनाव में पराजित वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया।&nbsp;</p>



<p>उस वक्त कैपिटल में दोनों सदनों के प्रतिनिधि बैठे हुए थे और चुनाव में जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगा रहे थे। अध्यक्षता उपराष्ट्रपति माइक पेंस कर रहे थे, जिन्हें ट्रंप ने कहा था कि वे बाइडेन की जीत को निरस्त कर दें।&nbsp;</p>



<p>क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  का मानना है कि चुनाव में धांधली हुई है। उन्होंने कई मुकदमे भी किये लेकिन उन्हें असफलता ही हाथ लगी।</p>



<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी हार को पचा नहीं पा रहे हैं। इसलिये उन्होंने अपने समर्थकों के इस कुकृत्य पर ज़रा सा भी अफसोस जाहिर नहीं किया। बल्कि यह कहा कि एक पवित्र विजय को धूर्तता से पराजय में बदलने पर लोगों का गुस्सा जायज है।</p>



<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ने माइक पेंस पर आरोप लगाया कि उनमें हिम्मत नहीं है कि वे देश और संविधान की रक्षा करें।</p>



<p>अमेरिकी संसद में हंगामे के बाद अब अमरीकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को स्वीकार कर लिया है। अब संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के लिए जो बाइडेन का रास्ता साफ हो गया है।अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र ने कमला हैरिस की जीत भी पुष्&#x200d;टि कर दी है।</p>



<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह 20 जनवरी को बाइडेन को सत्ता ट्रांसफर करेंगे।</p>



<p class="has-large-font-size">ट्रंप अमेरिका से भाग जाने की फिराक में</p>



<p>इस बीच ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि ट्रंप अमेरिका से भाग जाने की फिराक में हैं। स्कॉटलैंड के अखबारों में इस आशय की खबरें भी छपी हैं। वहां ट्रंप ने काफी जायदाद खरीदी है।</p>



<p class="has-medium-font-size">&nbsp;पंकज प्रसून , वरिष्ठ पत्रकार एवं विदेश मामलों के जानकार&nbsp;</p>



<p></p>



<p></p>



<p> </p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>माओ की कविता नये साल पर</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/mao-zedong-poem-new-year-pankaj-prasoon/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 31 Dec 2020 12:31:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[विचार]]></category>
		<category><![CDATA[कम्युनिस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[कवि]]></category>
		<category><![CDATA[कविता]]></category>
		<category><![CDATA[खुनलुन पर्वतमाला]]></category>
		<category><![CDATA[चीन]]></category>
		<category><![CDATA[चीन के महान कम्युनिस्ट नेता माओ ज़तुंग]]></category>
		<category><![CDATA[पहाड़ी]]></category>
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					<description><![CDATA[चीन के महान कम्युनिस्ट नेता माओ ज़तुंग की  127  वीं सालगिरह हाल ही में  मनायी  गयी थी।माओ एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी  थे। चीनी लोग उन्हें किसी देवता की तरह देखते हैं।  तंग श्याओ-फिंग ने माओ की मृत्यु  के बाद अपनी अलग नीति चलानी शुरू की और थ्येन आन मन से माओ के समय के कम्युनिस्ट नेताओं की तस्वीरें  हटा दीं। लेकिन जब माओ की समाधि को हटाने की बात चलने लगी तो उसका पूरे देश में विरोध होने लगा।पूरा चीन दो भागों में बंट गया - माओ समर्थक और माओ विरोधी। नतीजतन माओ की तस्वीर वहां बरकरार रही।]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>चीन के महान कम्युनिस्ट नेता माओ ज़तुंग की&nbsp; 127&nbsp; वीं सालगिरह हाल ही में  मनायी&nbsp; गयी थी।माओ एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी  थे। चीनी लोग उन्हें किसी देवता की तरह देखते हैं।&nbsp; तंग श्याओ-फिंग ने माओ की मृत्यु&nbsp; के बाद अपनी अलग नीति चलानी शुरू की और थ्येन आन मन से माओ के समय के कम्युनिस्ट नेताओं की तस्वीरें&nbsp; हटा दीं। लेकिन जब माओ की समाधि को हटाने की बात चलने लगी तो उसका पूरे देश में विरोध होने लगा।पूरा चीन दो भागों में बंट गया &#8211; माओ समर्थक और माओ विरोधी। नतीजतन माओ की तस्वीर वहां बरकरार रही।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="540" height="360" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/बीजिंग-में-माओ-स्मारक-.jpg" alt="" class="wp-image-18459" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/बीजिंग-में-माओ-स्मारक-.jpg 540w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/बीजिंग-में-माओ-स्मारक--300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 540px) 100vw, 540px" /><figcaption>बीकिंग में माओ का स्मारक </figcaption></figure>



<p>चीन के लोग कवियों की बहुत इज्जत करते हैं।माओ एक क्रांतिकारी नेता होने के साथ ही उच्च स्तर के क्रांतिकारी कवि भी थे।इसलिये चीन के जनमानस पर उनकी अमिट छाप है।</p>



<p>कृपया देखें </p>



<p><a href="https://www.globaltimes.cn/page/202012/1211052.shtml">https://www.globaltimes.cn/page/202012/1211052.shtml</a></p>



<p>माओ की ष्वेइत्याओ कथोउ (यानी तैरना) शीर्षक कविता को यांग्ज़ नदी के किनारे बसे वुहान शहर में बने <strong><em>बाढ़ स्मारक</em></strong> पर भी लगाया गया है।</p>



<p>माओ ज़तुंग चीन की सांस्कृतिक विरासत के प्रति संवेदनशील कवि और क्रांतिकारी थे।इसलिये उनकी कविताओं में चीन के पौराणिक मिथकों का नये&nbsp; क्रांतिकारी संदर्भ में इस्तेमाल&nbsp; करने को देखा जा सकता है।</p>



<p>खुद माओ ने चीन के तीन मशहूर महाकवियों से प्रेरणा ली थी। जिनके नाम हैं&#8211;&nbsp; ली पाई,ली षांगयिन, और ली ह ।</p>



<p>माओ का जन्म छिंग साम्राज्य में हूनान के षाओषान में 26 दिसंबर 1893 को हुआ था। और 82 साल की उम्र में हृदयाघात से 9&nbsp; सितंबर 1 976 को मृत्यु हुई।</p>



<p>माओ एक धनी किसान के पुत्र थे। बचपन से ही उनका चीनी राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद विरोधी दृष्टिकोण था और वे 1911 की शिनहाई क्रांति और 1919 की चार मई आंदोलन&nbsp; की घटनाओं से प्रभावित थे।&nbsp;</p>



<p>बाद में पेइचिंग विश्वविद्यालय में काम करने के दौरान मार्क्सवाद और लेनिनवाद के संपर्क में आये और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्य तो हुए ही सन् 1927 की पतझड़ में फ़सल कटाई विद्रोह का नेतृत्व भी किया।&nbsp; छन तूश्यू नेवूयी ,षांगहाई में सन्1921के आसपास चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की थी।27 साल के माओ भी उसी दौरान कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए थे।दो वर्षों के बाद पार्टी के तीसरे कांग्रेस में उन्हें केंद्रीय समिति का सदस्य चुना लिया गया।</p>



<p>1931 से 1934 के बीच माओ ने दक्षिण पूर्व चीन में चीनी सोवियत रिपब्लिक की स्थापना की और उसके चेयरमैन&nbsp; चुन लिये गये।</p>



<p>माओ का मशहूर लौंग मार्च शुरू हुआ सन् 1934 में। दरअसल वह पीछे हटते जाने का फैसला था। दक्षिण पूर्व से&nbsp; 10,000&nbsp; किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम&nbsp; की ओर। उसमें करीब 70,000 लोग मारे गये और लाल सेना&nbsp; के सैनिकों की संख्या 40,000 से घटकर 10,000 रह गयी।.</p>



<p>सन् 1937 में जापान ने चीन पर भयानक रूप से हमला किया।तब कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रवादी क्वोमिनतांग के साथ मिलकर जापानियों का मुकाबला किया। लेकिन जापान को पराजित करने के बाद चीन में गृहयुद्ध छिड़ गया।</p>



<p>र्रुइचिन में हुई हार के बाद सोवियत कम्युनिस्ट वहां से भाग निकले। जो&nbsp; कई महत्वपूर्ण नेता वहां पर बचे रह गये उन्हें क्वोमिनतांग ने मार डाला।मारे गये लोगों में माओ के सबसे छोटे भाई माओ ज़थान भी थे।</p>



<p>लौंग मार्च शुरू होने से पहले कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चोउ अन्लाई थे। लेकिन उन्होंने माओ के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया जिसका परिणाम यह हुआ कि माओ का पार्टी पर निर्विवाद अधिकार स्थापित हो गया। और माओ सन् 1934 से जो पार्टी के अध्यक्ष बने तो 1976 में मरते दम तक अध्यक्ष बने रहे।</p>



<p><em>माओ को चीन के किसानों का पूरा समर्थन प्राप्त था। क्योंकि वे किसानों का दर्द समझते थे और उनकी समस्याओं का समाधान भी करते थे। क्रांति के दिनों में जब माओ महीनों तक बाहर रहते थे तो कृतज्ञ किसान उपज का एक हिस्सा अलग से उनके लिये रखते थे।</em></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="555" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/Thyanmen-JPG.jpg" alt="" class="wp-image-18460" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/Thyanmen-JPG.jpg 1024w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/Thyanmen-JPG-300x163.jpg 300w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/Thyanmen-JPG-768x416.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /><figcaption>इसी थ्येन आन मन स्क्वायर में माओ ने चीन की आज़ादी की घोषणा की थी</figcaption></figure>



<p>1 अक्टूबर 1949 को माओ ने आधिकारिक रूप से चीनी गणराज्य की स्थापना की।&nbsp; च्यांग काई शेक अपने 600,000 वफादार सैनिकों और बीस लाख समर्थकों के साथ ताईवान नामक टापू की ओर भाग गया।&nbsp;</p>



<p>सन्&nbsp; 2016 तक लौंग मार्च का एक ही जीवित व्यक्ति बचा हुआ था जिसका नाम था थू थुंगचिन जो फ़ूच्येन का निवासी&nbsp; एक न्यूरोसर्जन था और जिसकी उम्र&nbsp; 102 वर्ष की थी।</p>



<p>सन् 1959 में माओ ने <strong><em>आगे की ओर महान उछाल</em></strong>  नामक कार्यक्रम शुरू किया जो असफल रहा।तब मई 1966 में माओ ने <strong><em>सांस्कृतिक क्रांति</em></strong> नामक अभियान चलाया ताकि ख्रुश्चौफ जैसे संशोधनवादियों को ढूंढ कर निकाल बाहर किया जाये।माओ ने एक बड़ा सा पोस्टर भी तैयार किया था जिसका शीर्षक था &#8221; मुख्यालय को बम से उड़ा दो।&#8221;&nbsp;</p>



<p>चीन सरकार ने सन् 2006 में लौंग मार्च पर एक फिल्म भी बनवायी थी। जिसमें एक काल्पनिक चरित्र लौंग मार्च के दौरान हुए अपने अनुभवों को बताता है।</p>



<p>माओ की एक प्रसिद्ध कविता है <strong>खुनलुन </strong>जो मध्य एशिया की महान पर्वतमाला पर आधारित है।जो चीन के उत्तर पश्चिम स्थित शिनच्यांग प्रांत में&nbsp; खोतान नदी के ऊपरी भाग में मौजूद है। चीनी मिथकों के अनुसार वहां कभी देवताओं का निवास&nbsp; था।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/B3315B2B-A662-486F-838C-B4A51F9BB32B_4_5005_c.jpeg" alt="" class="wp-image-18461" width="581" height="305" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/B3315B2B-A662-486F-838C-B4A51F9BB32B_4_5005_c.jpeg 490w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/B3315B2B-A662-486F-838C-B4A51F9BB32B_4_5005_c-300x157.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 581px) 100vw, 581px" /><figcaption>खुनलुन मध्य एशिया की महान पर्वतमाला</figcaption></figure>



<p>गर्मियों में अगर कोई व्यक्ति मिन पर्वत पर चढ़ कर देखे तो उसे दूर खड़े पहाड़ चमकती सफेदी में नृत्य करते नजर आयेंगे।</p>



<p>उधर बसे लोगों का कहना है कि सदियों पहले उन पहाड़ों पर आग लगी हुई थी। एक बार बन्दर राजा सुन शिंग-छ उधर से गुजर रहा था तो उसने ताड़ के पत्तों से पंखा बना कर आग को बुझा दिया। लपटें बुझ गयीं और वहां बर्फ़ जम गयी।</p>



<p>इस कविता के बारे में खुद माओ का कहना था कि किसी पुराने कवि ने उड़ती हुई बर्फ़ का कुछ इस प्रकार वर्णन किया था कि&nbsp; &#8221; तीस लाख सफेद अजदहे लड़ रहे हैं जिनके शल्क&nbsp; आसमान में उड़ रहे हैं।लेकिन मैंने इसे बर्फ़ ढके पहाड़ का विवरण करने में इस्तेमाल किया है।&#8221;</p>



<p>पाठकों के लिये उस कविता को पेश करने के साथ ही हम उनकी दूसरी कविता&nbsp; &#8220;<strong>तीन गीत&#8221;</strong> भी पेश कर रहे हैं। जिसे माओ ने 1934-35 में लौंग मार्च के दौरान लिखा था।मूल कृति में हर कविता में सोलह अक्षर हैं । वैसे माओ ने लौंग मार्च पर भी एक गीत लिखा था।नया साल आ रहा है, तो उसकी शुरुआत नये साल पर लिखे माओ के एक गीत से करते हैं।माओ ने साल के पहले दिन की खुशी मनाती यह कविता सन् 1930 में लिखी&nbsp; थी। </p>



<p class="has-large-font-size">नये&nbsp; साल का पहला दिन</p>



<p><strong>(चुइ मंग लिंग की धुन पर)</strong></p>



<p><strong>यह कविता सन् 1930 में लिखी गयी थी</strong></p>



<ul class="wp-block-list"><li>निंगह्वा,छिंगल्यू,ख्वेइ ह्वा-</li></ul>



<p>कितने तंग रास्ते,घने जंगल और फिसलाती काई !</p>



<p>हम आज कहां बंधे हैं ?</p>



<p>सीधे वूयी पहाड़ियों के नीचे</p>



<p>पहाड़ी पर, पहाड़ी के नीचे</p>



<p>लाल झंडा लहराता है शान से&nbsp;</p>



<p><strong>खुनलुन</strong></p>



<p><strong>( </strong><strong><em>खुनलुन</em></strong><strong> </strong><strong><em>मध्य एशिया की महान पर्वतमाला है)</em></strong></p>



<p>धरती के ऊपर, बहुत दूर</p>



<p>नीलेपन में</p>



<p>जंगली खुनलुन</p>



<p>तुमने देखा है</p>



<p>वह सब कुछ जो था</p>



<p>सबसे अच्छे होते हैं</p>



<p>तुम्हारे तीस लाख सफेद मरियल परदार सांप</p>



<p>लड़ते</p>



<p>हाड़ कंपाती सर्दी से</p>



<p>आसमान भी जम जाता जब!</p>



<p>गर्मियों में तुम्हारा</p>



<p>पिघलता प्रवाह&nbsp;</p>



<p>नदियों की धाराओं में</p>



<p>लाता सैलाब!!</p>



<p>बदलते हुए इंसान को</p>



<p>मछली और कछुओं में…</p>



<p>किसने यह फैसला किया है</p>



<p>अच्छे और बुरे का</p>



<p>तुम हो बेचैन वहां</p>



<p>हजारों पतझड़ों से</p>



<p>कहता हूं अब मैं खुनलुन से</p>



<p>नहीं तेरी जरूरत</p>



<p>तेरी तमाम ऊंचाई की</p>



<p>तेरी सारी बर्फ़ की</p>



<p>गर अपनी तलवार निकाल उसे</p>



<p>ले जा सकता</p>



<p>आसमान से भी ऊंचा</p>



<p>तो फाड़ देता तुम्हें तीन टुकड़ों में</p>



<p>एक योरूप के लिये</p>



<p>एक अमरीका के लिये</p>



<p>एक रखूंगा पूरब के लिये</p>



<p>फिर रहेगी शांति से धरती</p>



<p>साथ बांटती</p>



<p>वहीं गरमाई और ठंड</p>



<p>सारी धरती पर…</p>



<p><strong>तीन गीत&nbsp;</strong></p>



<p>ऐ&nbsp; पहाड़ों!</p>



<p>खुद के तेज़ गति से चलने वाले घोड़े को</p>



<p>चाबुक से मारता हूं</p>



<p>अपनी जीन से चिपका कर</p>



<p>चौंक कर मैं सिर घुमाता हूं</p>



<p>आसमान है मुझसे</p>



<p>केवल तीन फीट ऊंचा!</p>



<p>**&nbsp;</p>



<p>पहाड़ों!</p>



<p>जैसे विशाल लहराती तरंग</p>



<p>जैसे हजार सांड</p>



<p>सरपट दौड़ते</p>



<p>युद्ध की गर्मी से व्याकुल !!</p>



<p>**</p>



<p>पहाड़ों!</p>



<p>नीले आसमान को फाड़ते</p>



<p>तुम्हारे कांटे</p>



<p>भोथरे नहीं</p>



<p>आसमान गिर जायेगा</p>



<p>ताकत तुम्हारी&nbsp;</p>



<p>का सहारा चाहिए केवल!!!</p>



<p class="has-medium-font-size">कविताओं का अनुवाद और आलेख &#8211; &#8212;&#8211; <strong>पंकज प्रसून</strong></p>



<figure class="wp-block-embed is-type-wp-embed is-provider-media-swaraj-मीडिया-स्वराज wp-block-embed-media-swaraj-मीडिया-स्वराज"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="wp-embedded-content" data-secret="FMvRX0RFWL"><a href="https://mediaswaraj.com/ram_mandir_versus_babri_mosque_dispute/">अयोध्या राम मंदिर बनाम  बाबरी मस्जिद विवाद का समग्र इतिहास</a></blockquote><iframe loading="lazy" class="wp-embedded-content" sandbox="allow-scripts" security="restricted"  title="&#8220;अयोध्या राम मंदिर बनाम  बाबरी मस्जिद विवाद का समग्र इतिहास&#8221; &#8212; Media Swaraj | मीडिया स्वराज" src="https://mediaswaraj.com/ram_mandir_versus_babri_mosque_dispute/embed/#?secret=FMvRX0RFWL" data-secret="FMvRX0RFWL" width="600" height="338" frameborder="0" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no"></iframe>
</div></figure>



<p></p>
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			</item>
		<item>
		<title>करीमा बलूच की हत्या किसने की!</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/karma-baloch/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Dec 2020 06:51:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[Karima Baloch]]></category>
		<category><![CDATA[Prominent Baloch human rights activist Karima]]></category>
		<category><![CDATA[Sajid Hussain in Uppsala]]></category>
		<category><![CDATA[Sweden]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8212; पंकजप्रसून Pankaj Prasun 20 दिसंबर रविवार को &#160;कनाडा के टोरंटो शहर के बाहरी इलाके में वाटरफ्रंट यानी तटीय नगर-भाग के पास एक महिला की लाश मिली। वह लाश 37 वर्षीय करीमा मेहराब की थी जो करीमा बलूच के नाम से जानी जाती थीं। वे ओंटारियो झील के पास से लापता हो गई थीं। वे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>&#8212; पंकजप्रसून</strong></p>



<div class="wp-block-image is-style-rounded"><figure class="alignleft size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="197" height="243" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/12/Pankaj-Prasun-5.jpg" alt="करीमा बलूच" class="wp-image-17304"/><figcaption>Pankaj Prasun </figcaption></figure></div>



<p>20 दिसंबर रविवार को &nbsp;कनाडा के टोरंटो शहर के बाहरी इलाके में वाटरफ्रंट यानी तटीय नगर-भाग के पास एक महिला की लाश मिली।</p>



<p>वह लाश <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%9A">37 वर्षीय करीमा मेहराब</a> की थी जो करीमा बलूच के नाम से जानी जाती थीं। वे ओंटारियो झील के पास से लापता हो गई थीं। वे पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता थीं। और पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों की मुख्य आलोचक थीं।वे पाकिस्तान के दक्षिण पश्चिम इलाके में स्थित बलूचिस्तान की आज़ादी की समर्थक थीं ।</p>



<p>पाकिस्तान में उन्हें इतनी धमकियां मिलती थीं कि वे सन् 2015 में वहां से भाग कर कनाडा में निर्वासित जीवन बिता  रही थीं।</p>



<p class="has-large-font-size">करीमा बलूच</p>



<p>बलूच के मित्र लतीफ़ जौहर का कहना है कि करीमा एक जुझारू महिला थीं और इसलिये वे आत्महत्या कदापि नहीं कर सकती हैं। निश्चित रूप से उनकी हत्या हुई है।</p>



<p>करीमा के पति हम्माल हैदर का भी यही अंदेशा है। वे भी बलूचिस्तान की आज़ादी की मुहिम चलाते हैं और करीमा के साथ ही कनाडा में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। हैदर का कहना है कि उस रविवार को भी हर रोज़ की तरह दोपहर को करीमा  टोरंटो के सेंटर आइलैंड टापू की ओर घूमने गयी थीं।वे अच्छे मूड में थीं।</p>



<p class="has-luminous-vivid-orange-color has-text-color">Read Also &#8211; <a href="https://mediaswaraj.com/year-2020-review-black-year-mcdwivedi/">कोरोना के कारण वर्ष 2020 – इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जायेगा</a></p>



<p>लेकिन वे वापस नहीं लौटीं। पुलिस ने उन्हें ढूंढने की भरपूर कोशिश की लेकिन अगले दिन उसी टापू पर उनकी लाश मिली।</p>



<p>पाकिस्तान में और कनाडा में भी अज्ञात पाकिस्तानी नंबर से उन्हें जान मारने की धमकी मिलती रहती थी कि अपना रास्ता छोड़ दो। पाकिस्तान में उनके घर पर कई बार हमले हुए थे। उनके चाचा की हत्या हो गई थी।</p>



<p>करीमा बलूचिस्तानी छात्र संगठन आज़ाद की पहली महिला अध्यक्ष थीं। वे सन् 2006 में इस संगठन से जुड़ी थीं।उन दिनों वे तुर्बत के अट्टा शाह कालेज में पढ़ती थीं।</p>



<p>वे इतनी सक्रिय हो गयीं कि जब सन् 2014 में संगठन के नेता जाहिद बलूच &nbsp;को पाकिस्तानी सेना ने अगवा कर लिया तो संगठन ने करीमा को ही अपना अध्यक्ष चुन लिया।</p>



<p>सन् 2017 में जब कुछ बलूच छात्रों का अपहरण हो गया तो करीमा ने उसके लिये आई एस आई को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदर्शनों का नेतृत्व किया और भाषण दिये।</p>



<p>अब वे भी पाकिस्तानी सेना और ख़ास तौर से उसके कुख्यात आई एस आई की नज़रों में चढ़ गयीं।उधर सारी दुनिया में उनका नाम बढ़ता गया। बीबीसी ने सन्</p>



<p>2016 में उनका नाम संसार के100 प्रेरणा देने वाली महिलाओं में शामिल किया था।</p>



<p>बलूचिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के दमन के लिये आईएसआई को जिम्मेदार ठहराते हुए उसकी जबर्दस्त आलोचना करती थीं । हाल में उन्हें धमकी मिली थी कि जल्द ही कोई तुम्हें क्रिसमस का तोहफा देगा और सबक सिखायेगा।</p>



<p>इस वर्ष यह ऐसी दूसरी घटना है। मार्च महीने में पत्रकार साजिद हुसैन का अपहरण हो गया था जब वे स्टॉकहोम से उप्साला जा रहे थे।</p>



<p>वे सन् 2012 में पाकिस्तान से भाग कर सन् 2017में स्वीडन आ गये थे और सन् &nbsp;2019 में उन्हें वहां राजनीतिक शरण मिल गयी थी।</p>



<p>उनका कुसूर यह था कि उन्होंने अपनी औनलाइन मैगजीन बलूचिस्तानटाइम्स में आजादी के लिये संघर्ष कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी दमन की रिपोर्ट प्रकाशित कर रहे थे।</p>



<p>23 अप्रैल को उनकी लाश उप्साला के बाहर फिरीस नदी के तट पर मिली थी।</p>



<p>करीमा और साजिद हुसैन की हत्याओं के तरीके की समानता से शक की सुई आई एस आई पर ही जा रही है।</p>



<p>पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली के सदस्य और पश्तून तहाफुज़ मूवमेंट के नेता मोहसिन दावार ने करीमा की हत्या की भर्त्सना की है। और करीमा को वीर बलूच महिला कहा है।</p>



<p>पिछले पंद्रह वर्षों से बलूचिस्तान के लोग आज़ादी के लिये संघर्ष कर रहे हैं और तरह तरह की अमानुषिक यातनाओं से गुजर रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आठ सौ साल बाद दो विशाल ग्रहों का महामिलन</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/great-conjunction-of-planets/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Dec 2020 16:34:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[पंकज प्रसून]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[conjunction of Jupiter and saturn]]></category>
		<category><![CDATA[great conjuction]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रहों का महामिलन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://mediaswaraj.com/?p=18085</guid>

					<description><![CDATA[&#8212; पंकजप्रसून पंकज प्रसून कोई आठ सौ साल बाद बृहस्पति और शनि ग्रह मिलने जा रहे हैं। ये दोनों सौर मंडल के विशाल ग्रह हैं। खगोलीय महामिलन तब होता है जब धरती से देखने पर ऐसा लगता है कि अंतरिक्ष में मौजूद दो खगोलीय पिंड एक दूसरे से मिल रहे हैं। बृहस्पति और शनि के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>&#8212; पंकजप्रसून</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large is-style-default"><img loading="lazy" decoding="async" width="197" height="243" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2020/11/Pankaj-Prasun.jpg" alt="पंकज  प्रसून " class="wp-image-15787"/><figcaption><strong>पंकज प्रसून </strong></figcaption></figure>



<p>कोई आठ सौ साल बाद बृहस्पति और शनि ग्रह मिलने जा रहे हैं। ये दोनों सौर मंडल के विशाल ग्रह हैं।</p>



<p>खगोलीय महामिलन तब होता है जब धरती से देखने पर ऐसा लगता है कि अंतरिक्ष में मौजूद दो खगोलीय पिंड एक दूसरे से मिल रहे हैं।</p>



<p>बृहस्पति और शनि के परिक्रमा पथ थोड़ा अंडाकार हैं।</p>



<p>धरती से देखने पर ऐसा लगेगा कि दोनों ग्रह अपने परिक्रमा पदों को छोड़कर बेताब प्रेमियों की तरह &nbsp;एक दूसरे से गले मिल रहे हैं। जबकि वास्तव में दोनों के बीच की दूरी 73 करोड़ किलोमीटर है।</p>



<p>अमेरिकन म्यूजियम औफ नेचुरल हिस्ट्री के खगोल शास्त्री जैकी फैहरटी के अनुसार दूरबीन से देखने पर शनि के वलय और बृहस्पति के गैलीलियन चांद एक साथ जुटे हुए नजर आयेंगे।</p>



<p>पिछली बार &nbsp;16 जुलाई1623 को ये दोनों ग्रह एक दूसरे के करीब आये &nbsp;थे जब गैलीलीयो जीवित थे और दस साल पहले अपनी दूरबीन से बृहस्पति &nbsp;के चार विशाल चंद्रमाओं को देखा था। वैसे तो हर बीस साल बाद दोनों ग्रहों का महामिलन होता है लेकिन इस बार जो महामिलन नज़र आने वाला है वैसा &nbsp;4 मार्च 1226 को नज़र आया था। ह्यूस्टन स्थित राइस &nbsp;विश्वविद्यालय के खगोलशास्त्री पैट्रिक हार्टीगन के अनुसार &#8216; तब एशिया में चंगेज खान का राज चल रहा था।&#8217;</p>



<p>महामिलन के साथ कई बड़ी घटनाएं संबद्ध रही हैं। योहानेस के केपलर ने &nbsp;हिसाब जोड़ कर अनुमान लगाया था कि मैथ्यू के गौसपल के अनुसार जो बेथेलहम का तारा था जिसने पूरब के तीन बुद्धिमान लोगों को ईसामसीह के जन्म स्थान तक पहुंचाया था। क्योंकि 7 ईसापूर्व में महामिलन हुआ था।</p>



<p>वर्तमान महामिलन के ख़त्म होने के बाद अगला महामिलन &nbsp;15 मार्च 2080 को होना संभावित है।</p>



<p>न्यूटन और आइंस्टाइन ने कहा था कि कोई भी ग्रह अपने परिक्रमा पथ को कभी भी नहीं छोड़ता है।इसलिये यह सोचना भी गलत है कि दोनों ग्रह एक दूसरे के करीब आ रहे हैं।</p>
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			</item>
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