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	<title>अजब-गजब Archives - Media Swaraj | मीडिया स्वराज</title>
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	<description>Latest information &#38; Lifestyle News Portal</description>
	<lastBuildDate>Mon, 29 Aug 2022 12:48:40 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
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		<title>पीजीआई में बिना सर्जरी सीने से गोली निकाली</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/sgpgi-lucknow-removal-of-bullet-from-the-airway-wall/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Aug 2022 12:48:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ पीजीआई]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ पीजीआई में बिना सर्जिकल चीरा लगाए एक युवक के सीने में लगी गोली निकाल ली गयी। यह जानकारी पलमोनरी विभागाध्यक्ष डाक्टर आलोक नाथ ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दी है। विज्ञप्ति के अनुसार एक 20 वर्षीय युवक को सीने में गोली लगने के कारण संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>लखनऊ पीजीआई में बिना सर्जिकल चीरा लगाए एक युवक के सीने में लगी गोली  निकाल ली गयी। यह जानकारी पलमोनरी विभागाध्यक्ष डाक्टर आलोक नाथ ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दी है। </p>



<p>विज्ञप्ति के अनुसार एक 20 वर्षीय युवक को सीने में  गोली लगने के कारण संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में लाया गया, जहाँ उसे गंभीर अवस्था में ट्रामा सर्जरी विभाग भर्ती किया गया। गोली पीठ के निचले हिस्से से निकल कर छाती में जा लगी थी और वायुमार्ग (Trachea) को भेद कर उसमे फंस गई थी। इससे आसपास के क्षेत्र में हवा का रिसाव होने लगा जिससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगी।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="483" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2022/08/Bullet-1024x483.jpg" alt="सीने में लगी गोली " class="wp-image-37812" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2022/08/Bullet-1024x483.jpg 1024w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2022/08/Bullet-300x142.jpg 300w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2022/08/Bullet-768x362.jpg 768w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2022/08/Bullet.jpg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /><figcaption>सीने में फँसी गोली </figcaption></figure>



<p>प्रारंभिक ब्रोन्कोस्कोपिक मूल्यांकन के बाद, मरीज की सामान्य एनेस्थेसिया के अंतर्गत मुंह के माध्यम से rigid ब्रोन्कोस्कोपी की गयी और forceps का उपयोग करके गोली को निकाल दिया गया । इसके बाद, वायुमार्ग की दीवार में लगभग 2 सेमी के rent को कवर करने के लिए एक सिलिकॉन स्टेंट लगाया गया। रोगी को जागरूक और सचेत स्थिति में आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया ।</p>



<p>इस प्रक्रिया द्वारा बिना किसी सर्जिकल चीरे के छाती से गोली निकालने के लिए एक प्रमुख शल्य प्रक्रिया को टाला जा सका।यह प्रक्रिया अपनी तरह की पहली प्रकिया है, जो पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के डॉ अजमल खान व उनकी टीम द्वारा की गई है। रोगी अभी डाक्टर अमित कुमार सिंह की देख रेख में ATC के ICU में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है।<br>इस पूरी प्रकिया के नियोजन व क्रियान्वयन में एनेस्थेसिया विभाग की डाक्टर रुचि वर्मा व रेडियोलाजी विभाग के डाक्टर जफर नियाज का विशेष योगदान रहा। </p>



<p><strong>Press Release: 28th August</strong></p>



<p><strong>Life-saving rigid bronchoscopic removal of bullet from the airway wall</strong></p>



<p>A 20 year old boy&nbsp;with&nbsp;alleged gunshot injury&nbsp;was brought to the Apex Trauma centre in critical condition and&nbsp;was admitted in the Apex&nbsp;Trauma Center, SGPGI&nbsp;under the care of Dr. Amit Kumar Singh of Department of Trauma Surgery.&nbsp;The bullet entered from lower back and entered the chest and lodged within the airway wall. Because of this air leaked out in the surrounding area leading to difficulty in breathing.&nbsp;</p>



<p>After an initial bronchoscopic assessment, rigid bronchoscopy was performed through mouth under general anaesthesia and bullet was removed using rigid forceps. Thereafter, a silicone stent was placed to cover the rent of approximately 2 cm in the airway wall. Patient was shifted to ICU conscious and oriented. This procedure avoided a major surgical procedure to remove the bullet from the chest without any surgical incision. This procedure is first in its kind done at department of pulmonary medicine&nbsp;SGPGI with the expertise of Dr Ajmal Khan and his team. The patient is recuperating in ICU of ATC under the care of Dr Amit Kumar Singh.</p>



<p>Dr Ruchi Verma from Department of Anesthesiology and Dr Zafar Neyaz from Department of Radiology played a very important role in the entire planning and execution of the procedure.</p>



<p>This information was given by Dr. Alok Nath, Head, department of Pulmonary medicine SGPGI.</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>पानी में तैरने लगा जब रामसेतु का वह पत्थर, एक झलक पाने को लोगों का लगा तांता</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/ramsetu-stone-in-narmada-gujarat/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[MS Delhi Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Oct 2021 09:32:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Akshay Kumar]]></category>
		<category><![CDATA[Narmada]]></category>
		<category><![CDATA[Ramsetu]]></category>
		<category><![CDATA[अक्षय कुमार]]></category>
		<category><![CDATA[रामसेतु]]></category>
		<category><![CDATA[रामसेतु पत्थर]]></category>
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					<description><![CDATA[कभी अक्षय कुमार की फिल्म रामसेतु तो कभी भगवान राम के बनाए रामसेतु की बात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. इसी बीच 7 किलो के एक ऐसे पत्थर की चर्चा हर जगह होने लगी, जो पानी में तैर रही है. इसे रामसेतु का पत्थर बताया जा रहा है.]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong><span class="has-inline-color has-vivid-cyan-blue-color">पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग कारणों से रामसेतु चर्चा में है. कभी अक्षय कुमार की फिल्म रामसेतु तो कभी भगवान राम के बनाए रामसेतु की बात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. वहीं, कुछ दिनों पहले नर्मदा नदी में 7 किलो वजन का एक पत्थर तैरता हुआ मिला, जिसे लोग चमत्कार और रामसेतु का पत्थर कहते दिखे.</span></strong></p>



<p>गुजरात (Gujarat) में वडोदरा (Vadodara) के पास देरूली गांव का एक युवक बाद में इस चमत्कारिक पत्थर को अपने गांव ले आया, जो गांववालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया. दूर दूर से अब लोग इस रामसेतु पत्थर के दर्शन के लिए यहां आ रहे हैं. लोगों का कहना है कि यह पत्थर समुद्र से बहते हुए यहां तक आ पहुंचा होगा.</p>



<p>दरअसल, गांव का एक युवक मछली पकड़ने के लिए अपनी नाव पर सवार होकर नर्मदा नदी में गया हुआ था. यहां उसे नदी में तैरती एक पत्थर जैसी चीज दिखाई दी, जिसे उसने पहले तो नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में देखा तो वह सच में पत्थर ही निकला. पानी में तैरता वजनी पत्थर देखकर वह आश्चर्य चकित रह गया और उस पत्थर को अपने गांव ले आया. गांव के लोगों ने तैरते पत्थर की सच्चाई जानने के लिए उसे अपने बर्तनों में पानी भरकर उसमें भी तैराया. यह पत्थर बर्तन के पानी में भी तैर रहा था.</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-wp-embed is-provider-media-swaraj-मीडिया-स्वराज wp-block-embed-media-swaraj-मीडिया-स्वराज"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="wp-embedded-content" data-secret="3i4nbwNgUV"><a href="https://mediaswaraj.com/film-actor-akshay-kumar-meets-cm-yogi/">फ़िल्म रामसेतु की शूटिंग के लिए अभिनेता अक्षय  कुमार अयोध्या में</a></blockquote><iframe class="wp-embedded-content" sandbox="allow-scripts" security="restricted"  title="&#8220;फ़िल्म रामसेतु की शूटिंग के लिए अभिनेता अक्षय  कुमार अयोध्या में&#8221; &#8212; Media Swaraj | मीडिया स्वराज" src="https://mediaswaraj.com/film-actor-akshay-kumar-meets-cm-yogi/embed/#?secret=3i4nbwNgUV" data-secret="3i4nbwNgUV" width="600" height="338" frameborder="0" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no"></iframe>
</div><figcaption><strong>फ़िल्म रामसेतु की शूटिंग के लिए अभिनेता अक्षय कुमार अयोध्या में</strong></figcaption></figure>



<p>हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पत्थर का तैरना एक आम बात है. वैज्ञानिकों के अनुसार कुछ पत्थर कुछ खास तरह के होते हैं और उनका तैरना आम बात है. कोरल स्टोन, चूना पत्थर या ज्वालामुखी की राख से बने पत्थरों का पानी में तैरना बिल्कुल आम बात है.</p>



<p>ऐसे पत्थरों में वजन तो होता है, लेकिन इनकी अंदरूनी संरचना इस तरह की होती है कि उनमें कुछ पॉकेट बन जाते हैं, जिनके अंदर हवा बंद हो जाती है. इससे उन पत्थरों की डेंसिटी कम हो जाती है और उसी बंद हवा के चलते पत्थर पानी में भी तैरने लगते हैं. यह ठीक वैसे ही है, जैसे पान्टून ब्रिज काम करते हैं.</p>



<p>इस तैरते पत्थर का एक वीडियो भी यूट्यूब पर अपलोड किया गया है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बैल गाड़ी से बारात, डोली पर दूल्हा</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/marriage-party-on-bullock-cart/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Jun 2021 15:51:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[शादी बारात बैलगाड़ी]]></category>
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					<description><![CDATA[आज के आधुनिक समय मे जहाँ बड़े लोग हवाई जहाज, अन्तरिक्ष, समुद्र की तलहटी में विवाह रचा के चर्चा में आ रहे हैं, वही उत्तरप्रदेश के देवरिया जनपद में ग्राम कुशहरी से पकड़ी बाजार के पास बड़िहा दल गाँव मे 1 दर्जन बेल गाड़ी से बारात निकली वहीँ दूल्हे का परिछावन पारम्परिक साधन डोली में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज के आधुनिक समय मे जहाँ बड़े लोग हवाई जहाज, अन्तरिक्ष, समुद्र की तलहटी में विवाह रचा के चर्चा में आ रहे हैं, वही उत्तरप्रदेश के देवरिया जनपद में ग्राम कुशहरी से पकड़ी बाजार के पास बड़िहा दल गाँव मे 1 दर्जन बेल गाड़ी से बारात निकली वहीँ दूल्हे का परिछावन पारम्परिक साधन डोली में हुआ।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="720" height="540" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/06/2BC59C10-1C2F-4D43-BA72-229A98BBACAE.jpeg" alt="" class="wp-image-24663" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/06/2BC59C10-1C2F-4D43-BA72-229A98BBACAE.jpeg 720w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/06/2BC59C10-1C2F-4D43-BA72-229A98BBACAE-300x225.jpeg 300w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" /></figure>



<p><br>देवरिया जनपद के ग्राम कुशहरी से संगमबुजुर्ग पुराने ख्यालो में खो गए पाल पुत्र छोटे लाल पाल की बारात लगभग 25 किलोमीटर दूर पकड़ी बाजार के निकट बड़िहा दल के रामानन्द पाल की पुत्री सरिता से ब्याह रचाने दूल्हा डोली में व बाराती लगभग 1 दर्जन बैलगाड़ी डनलप से निकले. <br>इस बारात को देखने कुशहरी से बड़िहा दल तक सड़क के दोनों ओर दर्शकों की भीड़ देखी गयी, युवा बुजुर्ग महिलाएं बच्चे कौतूहल से इस बरात को देख रहे थे।<br>बुजुर्ग पुराने ख्यालो में खो गए, एक 75 वर्षीय बुजुर्ग हिदायतुल्लाह ने इस प्रतिनिधि को बताया कि मैं लगभग 50 वर्ष पूर्व लकड़ी वाले पहिये पर लोहे का हाल चढ़ा होता था,जिसे लढिया कहा जाता था या टायर वाली गाड़ी जिसे डनलप कहा जाता था, पर बारात निकलते देखी थी, और फिर आज देखी।<br>दूल्हे ने बताया कि मेरी शादी जब तय हुई तभी मैंने सोचा था, कि अपनी शादी कुछ अलग तरह से करेंगे.</p>



<p><em><strong>मृत्युंजय विशारद , देवरिया </strong></em></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कैसा होता है अंतरिक्ष स्टेशनों के लिए भोजन?</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/food-for-spacestations-jyoti-singh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Apr 2021 03:10:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[तकनीकी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<category><![CDATA[क्या खाते हैं अंतरिक्ष यात्री]]></category>
		<category><![CDATA[गगन यान में भारतीय भोजन]]></category>
		<category><![CDATA[ट्यूब में भोजन]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष डाइनिंग टेबल]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://mediaswaraj.com/?p=21970</guid>

					<description><![CDATA[वैज्ञानिक अंतरिक्ष में खाए जाने वाले भोजन को आठ समूहों में वर्गीकृत करते हैं। निर्जलित भोजन, जिसके लिए सिर्फ पानी की आवश्यकता होती है, र्मोस्टैबिलाइज्ड फूड, जिसे कमरे के तापमान में रखा जा सकता है, इंटरमीडिएट नमी वाले खाद्य पदार्थों वो हैं जिनमें कुछ नमी अभी भी बची हुई है और इन्हें डीप फ्रीज स्टोरेज की जरूरत है, नेचुरल फॉर्म फूड जैसे नट और बिस्कुट, विकिरण के साथ निष्फल खाद्य , फ्रोजन फूड, जो गहरे जमे हुए हैं, सेब और केले जैसे ताजा भोजन जो अधिक समय तक रखे जा सकते हैं, रेफ्रिजरेटेड फूड जैसे क्रीम अंतरिक्ष क्रू के तालू के लिए रेंज प्रदान करते हैं। ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>अंतरिक्ष यात्रियों का सफ़र बेहद रोमांचक होता है। हम सभी को ये जानने की जिज्ञासा होती है कि अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष के सफ़र में कैसे रहते हैं, वहाँ समय कैसे बिताते हैं और वहाँ क्या खाते हैं। अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में पहुंचकर कैसा खाना खाते हैं, इसे कैसे तैयार किया जाता है&nbsp; और इसकी विशेषता क्या है?</strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/04/jyoti-1.png" alt="" class="wp-image-21971" width="122" height="125" srcset="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/04/jyoti-1.png 564w, https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/04/jyoti-1-292x300.png 292w" sizes="auto, (max-width: 122px) 100vw, 122px" /><figcaption><strong>ज्योति सिंह</strong></figcaption></figure></div>



<p>12 अप्रैल, 1961 को यूरी गार्गिन सोवियत संघ के वोस्तोक अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष में पहुँचे। अंतरिक्ष यान का ये सफर कुल 108 मिनटों का था। अपनी छोटी लेकिन ऐतिहासिक यात्रा के दौरान, गार्गिन जो भोजन अपने साथ ले गए थे उसे टूथपेस्ट जैसी पैकिंग में पैक किया गया था, इसे क्यूब्स के आकार का बनाया गया था। सिर्फ पेट भरने लायक इस भोजन में शुद्ध मांस के दो सर्विंग और चॉकलेट सॉस थे। अंतरिक्ष यात्रियों ने वापस आकर इस भोजन की शिकायत भी की।</p>



<p><a href="https://www.jansatta.com/sunday-column/what-astronaut-eat-in-space/49252/">भोजन मानव अंतरिक्ष अभियानों का एक महत्वपूर्ण पहलू है।</a> हम ट्यूबों में परोसे जाने वाले अंतरिक्ष भोजन से लेकर डीहाइड्रेटेड (निर्जलित) भोजन तक का एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। आज, अंतरिक्ष में ले जाये जाने वाला भोजन भारहीन परिस्थितियों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए प्लास्टिक बैग में पैक किया जाता है। सिर्फ गर्म या ठंडा पानी डाल कर इस स्वादिष्ट खाने का मज़ा लिया जा सकता है। भोजन का गीलापन इसे सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में तैरने के बजाय चम्मच से चिपका देता है।</p>



<p>अंतरिक्ष भोजन की इस कड़ी में साल २०२१ में उड़ान भरने के लिए तैयार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मानव अंतरिक्ष मिशन, गगनयान स्वादिष्ट भारतीय व्यंजनों से लैस होगा। अंतरिक्ष यात्री अंडे , काठी रोल, सब्जी काठी रोल, इडली के साथ सांबर और नारियल चटनी, मूंग दाल हलवा और सब्जी पुलाव जैसे लज़ीज व्यंजनों का लुत्फ़ भी उठा सकेंगे। इन व्यंजनों को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के तहत आने वाले मैसूरु स्थित रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला (DFRL) ने तैयार किया है।</p>



<p><strong>अंतरिक्ष भोजन का इतिहास</strong></p>



<p>सोवियत संघ के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के पास की कक्षा में मानव मिशन को भेजने की योजना बनाई। ठीक उसी समय राष्ट्रीय एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने अपने चंद्रमा मिशन की रूपरेखा तैयार की। सोवियत मिशन के शुरुआती दौर में खाद्य पदार्थों को ट्यूबों में भेजा गया जबकि नासा ने भोजन को पाउडर के रूप में बनाया, इन्हें तकरीबन एक ग्रास में खाए जाने वाले क्यूब्स का आकार दिया गया। इन भोजन पदार्थों को अर्ध-तरल बना कर एल्यूमीनियम ट्यूबों में भरा गया। खाने से पहले भोजन को फिर से हाइड्रेट करना पड़ता था।</p>



<p>सत्तर के दशक के अंत तक अंतरिक्ष मेनू में सुधार हुआ। अब यहाँ लगभग 72 विभिन्न खाद्य पदार्थ थे जिसमें सब्ज़ियाँ, चिकन, एप्पल सॉस, श्रिम्प (झींगा) कॉकटेल जैसे स्वादिष्ट विकल्प भी थे।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-full"><img decoding="async" src="https://mediaswaraj.com/wp-content/uploads/2021/04/gaganyaan-food.png" alt="" class="wp-image-21975" width="NaN" height="NaN"/><figcaption>अंतरिक्ष में भोजन के पैकेट </figcaption></figure></div>



<p>सोवियत संघ द्वारा शुरू किया गए, मीर स्टेशन ने 1986 से 2001 तक पृथ्वी की परिक्रमा की है। यह स्टेशन दीर्घकालिक अंतरिक्ष निवास के लिए पहला प्रयोग था- कॉस्मोनॉट वैलेरी पॉलाकोव अभी भी सबसे लंबे समय तक निरंतर अंतरिक्ष में बने रहने के लिए रिकॉर्ड रखता है।</p>



<p>&nbsp;स्टेशन में स्लॉट्स के साथ एक कस्टम-निर्मित डाइनिंग टेबल को भी जगह दी गयी जहां अंतरिक्ष यात्री भोजन के टिन और ट्यूबों को गर्म कर सकते थे। इसमें भोजन के पुन: जलयोजन के लिए गर्म और ठंडे पानी को निकालने की सुविधा उपलब्ध थी। इसमें एक अंतर्निहित वैक्यूम सक्शन सिस्टम भी था जो इधर-उधर फैले हुए खाद्य कणों&nbsp; को समेटने में मददगार था। मीर अंतरिक्ष स्टेशन में अधिकतर खाद्य पदार्थ डिब्बाबंद भोजन और पुनर्जलीकरण वाले थे, लेकिन जब वहाँ आपूर्ति जहाज से संभव हुई तो वो अपने साथ ताज़े फल और सब्जियां भी अंतरिक्ष स्टेशन में ले कर गए।&nbsp;</p>



<p>आमतौर पर अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए छह महीने का लंबा प्रवास होता है। अंतरिक्ष यात्री खानपान संबंधी इच्छाओं को पूरा करने के लिए ऑनलाइन ऑर्डर भी नहीं कर सकते। ऐसी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनके लिए कई उपकरण इजाद किये गए हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) ने विशेष रूप से एक कॉफी मशीन तैयार की है जो अंतरिक्ष में काम कर सकती है। इसे साथ ही आईएसएस मिशनों में चालक दल के पास चुनने के लिए 300 खाद्य वस्तुओं का विकल्प है, जिसमें से कुछ हैं फलों का सलाद और स्पेगेटी ।</p>



<p>आईएसएस मिशन में भोजन क्रू द्वारा अंतरिक्ष में ले जाया जाता है। लॉन्च से पहले रंग, गंध, स्वाद और बनावट को देखते हुए चालक दल अपने मेनू का चयन करते हैं। एक विशेषज्ञ पसंद किये गए आहार की जाँच करता है और यह सुनिश्चित करता है कि उसमें पर्याप्त कैलोरी और पोषक तत्व हों। इस प्रक्रिया के बाद ही ये व्यंजन दल के लिए बनाये जाते हैं और लॉन्च के लिए तैयार किए जाते हैं।</p>



<p>यदि कोई आपात स्थिति हो तो क्या होगा? एक बार अंतरिक्ष यान को सेवा से बाहर कर दिया गया था, ऐसे में आईएसएस में रहने वाले चालक दल को केवल रूसी सोयुज आपूर्ति पोत पर निर्भर रहना पड़ा था।&nbsp;</p>



<p>क्या होगा अगर भोजन की आपूर्ति में कोई परेशानी आयी तो ? आईएसएस में सुरक्षित हेवन फूड सिस्टम आपातकालीन खाद्य आपूर्ति को संग्रहीत करता है जो कि 22 दिनों तक प्रति दिन 2,000 कैलोरी प्रति अंतरिक्ष यात्री के हिसाब में चालक दल को दिया जा सकता है।</p>



<p><strong>अंतरिक्ष-ग्रेड भोजन</strong></p>



<p>वैज्ञानिक अंतरिक्ष में खाए जाने वाले भोजन को आठ समूहों में वर्गीकृत करते हैं। निर्जलित भोजन, जिसके लिए सिर्फ पानी की आवश्यकता होती है, र्मोस्टैबिलाइज्ड फूड, जिसे कमरे के तापमान में रखा जा सकता है, इंटरमीडिएट नमी वाले खाद्य पदार्थों वो हैं जिनमें कुछ नमी अभी भी बची हुई है और इन्हें डीप फ्रीज स्टोरेज की जरूरत है, नेचुरल फॉर्म फूड जैसे नट और बिस्कुट, विकिरण के साथ निष्फल खाद्य , फ्रोजन फूड, जो गहरे जमे हुए हैं, सेब और केले जैसे ताजा भोजन जो अधिक समय तक रखे जा सकते हैं, रेफ्रिजरेटेड फूड जैसे क्रीम अंतरिक्ष क्रू के तालू के लिए रेंज प्रदान करते हैं। </p>



<p>शरीर को माइक्रोग्रैविटी में काम करने के लिए सामान्य पोषण के अलावा, विशेष आहार की आवश्यकता होती है इसलिए अक्सर अंतरिक्ष के लिए तैयार भोजन को फोर्टीफाइड किया जाता है।</p>



<p>बहुत सारे घटक मिलकर ये निर्धारित करते हैं कि अंतरिक्ष के लिए विशेष रूप से संसाधित भोजन वहाँ के लिए अनुकूल है या नहीं। पौष्टिक मूल्य, भूख लगना, पाचन गुण और स्वाद कुछ बुनियादी मापदंड हैं। इन सबके साथ इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि खाना जल्दी ख़राब न हो क्योंकि उससे खाद्य विषाक्तता का खतरा बढ़ जाता है।</p>



<p>&nbsp;डिब्बाबंद भोजन को कीटाणु मुक्त रखना ज़रूरी है ताकि वो अधिक समय तक खाने योग्य बने रहें। भोजन को खराब होने से बचाने के लिए और उसमें से सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने के लिए उसे फ्रीज-ड्राय या थर्मोस्टैबिलिलाज्ड किया जाता है।</p>



<p>&nbsp;एक और प्रमुख पोषण संबंधी चिंता है- भोजन में विटामिन के स्तर को बनाए रखना। जब भोजन को जमा दिया जाता या फिर उसे बहुत कम तापमान में रखा जाता है तो उसके विटामिन ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और धीरे-धीरे विटामिनों का क्षय होने लगता है।&nbsp;</p>



<p>कुछ दिनों तक चलने वाले मिशनों के लिए ये अधिक चिंता की बात नहीं है लेकिन लंबी अवधी तक चलने वाले मिशन जैसे आईएसएस मिशन जहां चालक दल छह महीने या उससे अधिक समय तक अंतरिक्ष में रहते हैं, तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि अंतरिक्ष में उन्हें किसी भी प्रकार के प्रमुख विटामिनों की कमी ना हो।</p>



<p>अंतरिक्ष में वजन बढ़ाना महंगा पड़ सकता है इसलिए वहाँ हल्का भोजन खाये जाने की सलाह दी जाती है।&nbsp;</p>



<p>&nbsp;साथ ही वहाँ खाद्य पदार्थ अपशिष्ट नहीं छोड़े जाएँ तो अच्छा है क्योंकि अंतरिक्षयान में उड़ते हुए खाद्य पदार्थ अपशिष्ट अंतरिक्षयान के उपकरण को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग न केवल हल्की होनी चाहिए बल्कि खाद्य पुनर्गठन के लिए कंटेनर के रूप में दोगुनी होनी चाहिए।</p>



<p><strong>गगनयान मेनू</strong></p>



<p>डीएफआरएल ने इसरो मानव उड़ान मिशन के लिए 24 से 30 देसी व्यंजनों का चयन किया है। डॉ जगन्नाथ, वैज्ञानिक, डीएफआरएल ने बताया “खाना वही है लेकिन उसकी पैकिंग अलग है।</p>



<p>&nbsp;सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में खाया जाने वाला भोजन और अंतरिक्ष यात्रियों को खिलाने की चुनौतियां अलग हैं, इसलिए हमें इस मुद्दे को तकनीकी रूप से इस तरह से संबोधित करना होगा कि वे आसानी से भोजन का उपभोग करने में सक्षम हों।” भोजन को गर्म करना या गर्म पानी का उपयोग करके भोजन के पुनर्गठन पर ध्यान दिया गया है। कैप्सूल में ही हीटिंग स्टेशन प्रदान करने के लिए योजना बनाई जा रही है।&nbsp;</p>



<p>प्रयोगशाला भोजन के पुनर्गठन के लिए अलग डिब्बे प्रदान करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। भोजन कितना मसालेदार होना चाहिए? हर किसी के लिए स्वाद का एक अलग अर्थ है। इसलिए अंतरिक्ष भोजन को हल्का मसालेदार बनाया जाता है ताकि अगर किसी को अधिक मसालों की ज़रूरत है तो बाद में मिलाए जा सकें।</p>



<figure class="wp-block-embed is-type-wp-embed is-provider-media-swaraj-मीडिया-स्वराज wp-block-embed-media-swaraj-मीडिया-स्वराज"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="wp-embedded-content" data-secret="6NGhXzJo6o"><a href="https://mediaswaraj.com/nasa-space-mission-mars-swati-mohan-pankaj-prasun/">मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भारतीय मूल की स्वाति मोहन ने उतारा</a></blockquote><iframe loading="lazy" class="wp-embedded-content" sandbox="allow-scripts" security="restricted"  title="&#8220;मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भारतीय मूल की स्वाति मोहन ने उतारा&#8221; &#8212; Media Swaraj | मीडिया स्वराज" src="https://mediaswaraj.com/nasa-space-mission-mars-swati-mohan-pankaj-prasun/embed/#?secret=6NGhXzJo6o" data-secret="6NGhXzJo6o" width="600" height="338" frameborder="0" marginwidth="0" marginheight="0" scrolling="no"></iframe>
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<p>अंतरिक्ष में खाये जाने वाले भोजन के विकास के साथ खाने के बेकार पैकटों को निपटाना भी एक चुनौती है। डीएफआरएल स्टार्च से प्लेट और कप तैयार करने के विचार कर रहा है ताकि उपयोग के बाद उन्हें फेंकने की बजाय खाया जा सके। &#8220;अंतरिक्ष में सिपर से पानी नहीं पिया जा सकता है आपके पास एक लॉक सिस्टम होना चाहिए ताकि जब आप पानी या कोई तरल पदार्थ पीयें तो बचा हुआ तरल अंतरिक्षयान में न उड़ने लगे&#8221; डॉ जगन्नाथ ने बताया। डीएफआरएल कैप्सूल में पानी या तरल पदार्थ के लंघन से बचने के लिए किसी क्लिपिंग तंत्र की योजना बना रहा है।</p>



<p><strong>ज्योति सिंह, विज्ञान लेखक</strong></p>



<p><strong>जन संपर्क अधिकारी,</strong></p>



<p><strong>राष्ट्रीय प्रतिरक्षाविज्ञान संस्थान</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>ये है दुनिया के सबसे महंगे जूते, इसकी कीमत जानकर हो जायेंगे हैरान</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/this-is-the-worlds-most-expensive-shoes-knowing-its-price-will-be-surprised/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Dec 2020 11:08:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[कीमत जानकर]]></category>
		<category><![CDATA[दुनिया के सबसे महंगे जूते]]></category>
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					<description><![CDATA[दुनियाभर में कई ऐसी चीजें हैं जो अतरंगी है और जिन्हे देखकर यकीन ही नहीं होता है। कई ऐसी चीजें हैं जो अपने आपमें एक अलग ही अंदाज में रहती हैं। ऐसी ही एक चीज के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। वैसे यह स्नीकर्स है जो आज के समय में हर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दुनियाभर में कई ऐसी चीजें हैं जो अतरंगी है और जिन्हे देखकर यकीन ही नहीं होता है। कई ऐसी चीजें हैं जो अपने आपमें एक अलग ही अंदाज में रहती हैं। ऐसी ही एक चीज के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।</p>
<p>वैसे यह स्नीकर्स है जो आज के समय में हर कोई खरीदता है। वैसे इसे ख़रीदने के लिए अगर हम आपसे पूछे तो आप कितने रुपये ख़र्च करना चाहेंगे। हमें पता है आपका जवाब होगा- ‘हज़ार, दो हज़ार या फिर ज़्यादा से ज़्यादा तीन हज़ार, बस’। लेकिन क्या कभी आप करोड़ों की क़ीमत वाले स्नीकर्स ख़रीदने की सोच सकते हैं? अब आप कहेंगे तौबा-तौबा इतना पैसा हम नहीं देंगे।</p>
<p>वैसे आज हम आपको एक ऐसे स्नीकर्स के बारे में बताने जा रहे हैं। इस स्नीकर्स की क़ीमत एक मिलियन से अधिक है यानी भारतीय मुद्रा के अनुसार, लगभग 7.38 करोड़ रुपये। वैसे पैसे कई बात तो हम नहीं कर रहे हैं हम तो बात कर रहे हैं इन रंग-बिरंगे जूतों की। यह बहुत ही अतरंगी है और इन्हे पहनने की हिम्मत कौन दिखायेगा यह तो हम भी नहीं जानते। वैसे ब्रिटिश-अमेरिकी नीलामी के दौरान Sotheby’s Home में ऱखे इन जूतों को देखकर सभी के होश उड़ गए।</p>
<p>वैसे इन जूतों को Adidas ने जर्मनी के आर्ट हाउस Meissen के साथ मिल कर तैयार किया। इनकी प्रिटिंग हाथों से की गई है और 6 महीने में तैयार हुए ये जूते बनाने के लिये 4 कारीगरों को रखा गया था। बताया जा रहा है नीलामी $1 से शुरु होकर एक मिलियन पर ख़त्म होने की उम्मीद की जा रही है।</p>
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		<title>इस किले में मौजूद है पारस पत्थर, इज्सकी रक्षा करते है जिन्न</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/paras-stones-are-present-in-this-fort-the-jinn-protect-it/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Dec 2020 03:00:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[इस किले में मौजूद है पारस पत्थर]]></category>
		<category><![CDATA[रक्षा करते है जिन्न]]></category>
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					<description><![CDATA[पारस पत्थर के बारे में बहुत से लोग जानते है. पारस पत्थर वह पत्थर है जिसे छूते ही लोहा सोना बन जाता है. इससे जुड़ी कई कहानियां भी आपने सुनी होगी. कहा जाता है कि आज तक इस पत्थर को कोई नहीं ढूंढ पाया. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक किला ऐसा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पारस पत्थर के बारे में बहुत से लोग जानते है. पारस पत्थर वह पत्थर है जिसे छूते ही लोहा सोना बन जाता है. इससे जुड़ी कई कहानियां भी आपने सुनी होगी. कहा जाता है कि आज तक इस पत्थर को कोई नहीं ढूंढ पाया.</p>
<p>आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक किला ऐसा भी है, जहां पारस पत्थर मौजूद है. इसी वजह से हर साल लोग, यहां की खुदाई करने के लिए पहुंच जाते हैं. कहा जाता है कि भोपाल से 50 किलोमीटर दूर रायसेन के किले में पारस पत्थर मौजूद है.</p>
<p>साथ ही इस पत्थर को पाने के लिए कई युद्ध भी हुए लेकिन जब राजा को लगा कि वह इस पत्थर को खो सकता है तो उसने इस पत्थर को यहां मौजूद तालाब में फैंक दिया. राजा ने इस राज के बारे में किसी को नही बताया. तभी युद्ध के चलते उनकी मौत हो गई और किला एकदम विरान हो गया.</p>
<p>माना जाता है कि आज भी लोग रात के समय इस पत्थर की खोज करने के लिए अपने साथ तांत्रिकों को लेकर जाते है लेकिन किसी के हाथ कुछ नहीं लगता. बल्कि कई लोग यहां आकर अपना मानसिक संतुलन भी खो देते हैं क्योंकि इस पत्थर की रक्षा जिन्न करते है. हम आपको बता दें कि अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है लेकिन फिर भी लोग इस पत्थर की तलाश करते हैं.</p>
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		<item>
		<title>चेन्नई कॉर्पोरेशन 26 लाख झुग्गी निवासियों को देगी भोजन</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/chennai-corporation-to-provide-food-to-26-lakh-slum-dwellers/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Dec 2020 08:55:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[Chennai Corporation]]></category>
		<category><![CDATA[Chennai News]]></category>
		<category><![CDATA[CM Edappadi]]></category>
		<category><![CDATA[Edappadi K Palaniswami]]></category>
		<category><![CDATA[slum dwellers]]></category>
		<category><![CDATA[Supply Food to slum dwellers]]></category>
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					<description><![CDATA[चेन्नई के निगम आयुक्त जी प्रकाश ने कहा कि मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी के निर्देश के अनुसार रविवार सुबह से आठ दिनों तक सभी झुग्गियों में गर्म और हाइजीनिक पका हुआ भोजन दिया जाएगा। 26 लाख व्यक्तियों के साथ स्लम क्षेत्रों में लगभग 5.3 लाख परिवार रहते हैं। आयुक्त ने कहा कि बारिश और कोविड-19 &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चेन्नई के निगम आयुक्त जी प्रकाश ने कहा कि मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी के निर्देश के अनुसार रविवार सुबह से आठ दिनों तक सभी झुग्गियों में गर्म और हाइजीनिक पका हुआ भोजन दिया जाएगा। 26 लाख व्यक्तियों के साथ स्लम क्षेत्रों में लगभग 5.3 लाख परिवार रहते हैं। आयुक्त ने कहा कि बारिश और कोविड-19 के कारण शहर के सबसे गरीब निवासियों की आजीविका के नुकसान की भरपाई के लिए पहल की गई थी।</p>
<p>“रविवार सुबह से दिसंबर 13 रात तक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। प्रकाश ने कहा कि इस महान सेवा को शुरू करने के लिए निगम मशीनरी पूरे जोरों पर है, जो अब तक की सबसे बड़ी सामुदायिक खाद्य सेवा होगी। लगातार बारिश के दौरान आश्रय लेने वाले लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया। साथ ही, कार्यकर्ताओं ने सरकार से कहा है कि वे जनसंख्या के अन्य कमजोर वर्गों को भी शामिल करें, जो कोविड-19 लॉकडाउन और बारिश के कारण प्रभावित हैं।</p>
<p>वीनसा पीटर वंचित शहरी समुदाय (IRCDUC) के लिए सूचना और संसाधन केंद्र के नीति शोधकर्ता, ने कहा कि लगातार बारिश के कारण बेघर व्यक्ति अधिक प्रभावित थे। “जबकि कुछ बेघर लोगों ने राहत केंद्रों पर शरण ली, जबकि कई अन्य अभी भी सड़कों पर हैं।</p>
<p>उनके अलावा, गरीब लोग जो अन्य जिलों से चेन्नई चले गए थे, उन्हें भी काफी नुकसान उठाना पड़ा। उनके पास राशन कार्ड भी नहीं हैं। कार्यक्रम में उन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने स्लम क्षेत्रों में एक सामुदायिक रसोई स्थापित करने और खाना पकाने और वितरण नौकरियों में स्थानीय झुग्गी निवासियों को नियुक्त करने का सुझाव दिया, यह भूख को संतुष्ट करेगा और रोजगार का अवसर भी प्रदान करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>माचिस की तीलियों से इस कलाकार ने बनाई भगवान जगन्नाथ की मूर्ति</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/this-artist-made-a-statue-of-lord-jagannath-with-matchsticks/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Dec 2020 08:25:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[ajab gazab]]></category>
		<category><![CDATA[bizarre news]]></category>
		<category><![CDATA[Jagannath Temple]]></category>
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					<description><![CDATA[भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की चाहत हर किसी के मन में होती है। सभी उनका दर्शन करना चाहते हैं लेकिन किसी-किसी को उनसे ख़ास लगाव होता है। उन्ही में शामिल हैं ओडिशा के पुरी के रहने वाले एक कलाकार, जिन्होंने माचिस की तीलियों से भगवान जगन्नाथ की&#160;मूर्ति बनाई है। जी हाँ, हम बात कर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने की चाहत हर किसी के मन में होती है। सभी उनका दर्शन करना चाहते हैं लेकिन किसी-किसी को उनसे ख़ास लगाव होता है। उन्ही में शामिल हैं ओडिशा के पुरी के रहने वाले एक कलाकार, जिन्होंने माचिस की तीलियों से भगवान जगन्नाथ की&nbsp;मूर्ति बनाई है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं कलाकार सास्वत रंजन साहू की। उन्होंने कुल 3,635 माचिस की तीलियों से इस मूर्ति को तैयार किया है जो बहुत आकर्षक है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि उन्हें इस मूर्ति को तैयार करने के लिए कुल 11 दिन का समय लगा और उसके बाद उनकी मेहनत रंग लायी। इस समय उनकी कलाकृति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और चर्चाओं का हिस्सा भी बन गई है। एक वेबसाइट से अपनी कलाकृति के बारे में बात करते हुए रंजन ने कहा, “मैंने भगवान जगन्नाथ से हमारे जीवन से COVID-19 महामारी को रोकने की विशेष प्रार्थना की है।</p>
<p>कई लोग महामारी की स्थिति के कारण भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए, मैंने इस मूर्ति को बनाने का फैसला किया ताकि लोग मेरी कलाकृति के माध्यम से भगवान से प्रार्थना कर सकें।” रंजन ने बताया कि उन्होंने इस मूर्ति को बनाने के लिए माचिस का इस्तेमाल किया है। वैसे रंजन ने यह पहली बार नहीं किया है बल्कि वह इससे पहले भी कई बार वेस्ट मटेरियल से मूर्ति बना चुके हैं।</p>
<p>कहा है जगन्नाथ मंदिर-&nbsp;आपको बता दें कि जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी में है। जहाँ हर समय भक्तों की भीड़ लगी रहती है।&nbsp;इस समय कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों को उनके दर्शन नहीं मिल पा रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>सड़क पार करते हुए अचानक रुक गया तेंदुए का बच्चा तो माँ ने किया ये काम</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/the-leopards-child-suddenly-stopped-while-crossing-the-road-so-mother-did-this-work/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Dec 2020 12:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[leopard]]></category>
		<category><![CDATA[social media]]></category>
		<category><![CDATA[Tendua ka baccha]]></category>
		<category><![CDATA[viral]]></category>
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					<description><![CDATA[आए दिन सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल होते हैं जो आपने देखे ही होंगे। जी हाँ, सोशल मीडिया पर आए दिन जानवरों के लाखों वीडियो और तस्वीरें आती हैं जो दिल को छू जाती हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि जानवरों के कंटेंट इंटरनेट पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कंटेंट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आए दिन सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल होते हैं जो आपने देखे ही होंगे। जी हाँ, सोशल मीडिया पर आए दिन जानवरों के लाखों वीडियो और तस्वीरें आती हैं जो दिल को छू जाती हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि जानवरों के कंटेंट इंटरनेट पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले कंटेंट में से एक है। अब इसी बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसे देखने के बाद आप एक माँ के प्यार की तारीफ़ करेंगे।</p>
<p>जी दरअसल यह वीडियो एक तेंदुए और उसके बच्चों का है जो इस समय तेजी से वायरल हो रहा है। हमें यकीन है यह वीडियो आपके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी है। इस समय सोशल मीडिया पर भी ये लोगों की पहली पसंद बन चुका है। जी दरअसल इस वीडियो को IAS ऑफिसर डॉक्टर एम वी राव ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें एक फीमेल तेंदुए और उसके बच्चों को देखा जा सकता है। यह वीडियो 51 सेकेण्ड का है और इसमें आप तेंदुए और उसके दो बच्चों को रोड क्रॉस करते हुए देख सकते हैं। ऐसा लग रहा है किसी टूरिस्ट ने इस लम्हे को कैप्चर किया है।</p>
<p>Let the original owners have their way @susantananda3 @surenmehra pic.twitter.com/a8XtcSw1l1<br />
— Dr. M V Rao, IAS (@mvraoforindia) November 28, 2020</p>
<p>इस वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि एक बच्चा अपनी मां का कहना ना मानते हुए बीच सड़क में ही रुक जाता है। उसके बाद तेंदुआ जबरदस्ती उसे उठा कर ले जाती है। इस वीडियो को जब से शेयर किया है तब से इस पर मजेदार कमेंट और रिएक्शन आ रहे हैं। कोई माँ के प्यार की तारीफ़ करते नजर आ रहा है तो कोई इस वीडियो को देखकर खुश हो रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नागपुर में मिला देश का सबसे बड़ा संतरा, लेकिन नहीं बना पाया वर्ल्ड रिकॉर्ड</title>
		<link>https://mediaswaraj.com/indias-largest-orange-found-in-nagpur-but-could-not-make-world-record/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Media Swaraj Desk]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Nov 2020 12:43:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अजब-गजब]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[bizarre]]></category>
		<category><![CDATA[bizarre news]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra News]]></category>
		<category><![CDATA[Nagpur News]]></category>
		<category><![CDATA[Nagpur Orange]]></category>
		<category><![CDATA[World Record]]></category>
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					<description><![CDATA[आप सभी जानते ही होंगे दुनियाभर में जब भी कुछ अनोखा होता है तो वर्ल्ड रिकॉर्ड बन जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे संतरे के बारे में जो वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम लिखवाने में एक प्रतिशत चूक गया। वैसे आप जानते ही होंगे कि महाराष्ट्र का नागपुर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आप सभी जानते ही होंगे दुनियाभर में जब भी कुछ अनोखा होता है तो वर्ल्ड रिकॉर्ड बन जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे संतरे के बारे में जो वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम लिखवाने में एक प्रतिशत चूक गया। वैसे आप जानते ही होंगे कि महाराष्ट्र का नागपुर शहर संतरों के लिए जाना जाता है और यहां जो संतरें मिलते हैं वह काफी मशहूर हैं।</p>
<p>नागपुर शहर ‘संतरों का शहर’ कहलाता है। अब इसी बीच एक ट्विटर यूज़र ऋतू मल्होत्रा ने भारत के सबसे बड़े संतरे को लेकर ट्वीट किया है जो आप देख सकते हैं। ट्वीट करते हुए ऋतू मल्होत्रा ने कैप्शन में लिखा है, ‘संतरों के शहर नागपुर में, जो संतरों के उत्पादन के लिए जाना जाता है, सबसे बड़ा संतरा मिला है। इस संतरे की परिधि 24 इंच, ऊंचाई 8 इंच और वजन 1.425kg है। ये संतरा मेरे दोस्त के खेत में उगा है’। अब इतने बड़े संतरे को देखने के बाद ट्विटर लोगों के होश ही उड़ गए।</p>
<p>Nagpur the orange city, glorified for the abundance production of oranges has found the largest orange by circumference measured 24 inches and height 8 inches with weight 1.425kg on 23 November 2020. The orange grew in my friend’s farm. #Orange pic.twitter.com/FrnOEGzMHx<br />
— Ritu Malhotra (@iRituMalhotra) November 23, 2020</p>
<p>इस समय लोग तेजी से अपने अपने रिएक्शन दे रहे हैं। लोग यकीन ही नहीं कर पा रहे हैं कि इतना बड़ा संतरा भी कभी कहीं होगा। वैसे यह संतरा फ़ेमस तो हो गया, लेकिन ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ तोड़ते-तोड़ते रह गया। आपको पहले तो हम यह बता दें कि इस वक़्त सबसे बड़े संतरे का ‘गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ 2 जनवरी 2006 से कैलिफोर्निया के पैट्रिक फील्डर के नाम है। पैट्रिक फील्डर के संतरे की परिधि 25 इंच थी।</p>
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