राम मंदिर भूमि पूजन का शुभ मुहूर्त नहीं है :शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती

5 अगस्त को अयोध्या राम मंदिर निर्माण के आरंभ का कोई मुहूर्त नहीं

लखनऊ, 23 जुलाई. शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि ज्योतिष और धर्म शास्त्रों के अनुसार आगामी पाँच अगस्त को मंदिर के भूमि पूजन का मुहूर्त नहीं है.

शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने एक बयान में कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सबकी सहमति से शुभ मुहूर्त में होना चाहिए.

राममंदिर निर्माण के लिए अन्य जो संगठन लगे थे, उनमें शंकाराचार्य स्वरूपानंद की अगुवाई वाली राम जन्म भूमि पुनरुद्धार  समिति है.

सनातन हिंदू धर्म में ऊँचा स्थान रखने वाले जगद्गुरु शंकराचार्य का स्थान काफ़ी ऊँचा है.

उनका कहना है कि मंदिर का डिज़ाइन कम्बोडिया के अंकोरवाट में विशाल राम मंदिर जैसा होना चाहिए.

दूसरी ओर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पाँच अगस्त को  अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए अयोध्या आमंत्रित किया है.

सुप्रीम कोर्ट जजमेंट के बाद सम्पूर्ण परिसर इस ट्रस्ट को हस्तांतरित हो गया है.

ट्रस्ट ने पहले से प्रस्तावित मंदिर की ऊँचाई और मंडपों की संख्या बढ़ने का निर्णय किया है. अब भूमि पूजन की तैयारियाँ ज़ोरों से चल रही हैं. 

मोदी सरकार द्वारा बनाए गए इस नए ट्रस्ट के अधिकांश कर्ता – धर्ता आर एस एस और विश्व हिंदू परिषद के लोग हैं. 

 

शंकाराचार्य स्वरूपानंद

शंकराचार्य ने एक बयान में कहा है, “ 5 अगस्त 2020 को दक्षिणायन भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है।शास्त्रों में भाद्रपद मास में गृह-मंदिरारंभ निषिद्ध है।”  

वक्तव्य में कहा है, “विष्णु धर्म शास्त्र में स्पष्ट कहा गया है कि प्रोष्ठपादे विनश्यति माने भाद्रपद मास में किया गया शुभारंभ विनाश का कारण होता है।” 

शंकाराचार्य के अनुसार, “वास्तु शास्त्र का कथन है कि भाद्रपदे न कुर्यात् सर्वथा गृहम् ।

दैवज्ञ बल्लभ नाम के ग्रंथ में कहा गया है कि निः स्वं भाद्रपदे अर्थात् भाद्रपद में किया गया गृहारंभ निर्धनता लाता है।

वास्तु प्रदीप भी इसी बात को अपने शब्दों में हानिर्भाद्रपदे तथा में कहता है।

वास्तु राजबल्लभ का वचन भी देखिए जो शून्यं भाद्रपदे अर्थात् भाद्रपद का आरंभ शून्य फल देता है ,कहकर भाद्रपद में इसका निषेध करता है।”

हालाँकि दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद से जुड़े संतों का कहना है की पाँच अगस्त को दोपहर में कुछ देर के लिए अभिजीत मुहूर्त है और प्रधानमंत्री उतनी देर में भूमि पूजन कर सकते हैं.

एक सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कोरोना महामारी बढ़ रही है तो भूमिपूजन की जल्दी क्या है, जबकि अभी मंदिर का नया डिज़ाइन भी फ़ाइनल  नहीं है. 

कुछ टीकाकार इसे बिहार के आगामी चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं. 

आदिगुरु भगवान शंकराचार्य 

हिंदुओं को संगठित करने की भावना से आदिगुरु भगवान शंकराचार्य ने 130 वर्ष पूर्व भारत के चारों दिशाओं में चार धार्मिक राजधानियां (गोवर्धन मठ, श्रृंगेरी मठ, द्वारका मठ एवं ज्योतिर्मठ) बनाईं |

जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी दो मठों (द्वारका एवं ज्योतिर्मठ) के शंकराचार्य हैं |

शंकराचार्य का पद हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है, इन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है |

धर्म की रक्षा, हिंदुओं का मार्गदर्शन एवं भगवत् प्राप्ति के साधन आदि विषयों में हिंदुओं को आदेश देने के विशेष अधिकार शंकराचार्यों को प्राप्त होते हैं |

स्वरूपानंद स्वतंत्रता सेनानी

96 वर्ष के वयोवृद्ध शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद स्वतंत्रता सेनानी हैं.

उन्होंने  18 वर्ष की उम्र में 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिए था. उन्हें दो बार जेल की सजा हुई.

राम जन्म भूमि मुक्ति के लिए उन्होंने राम जन्म भूमि पुनरुद्धार समिति बनकर आंदोलन किया.

1 मई 1990 को  वह पत्थर लेकर शिलान्यास के लिए अयोध्या जा रहे थे.

तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें रास्ते में  गिरफ़्तार कराकर चुनार के के लिए में रखा और नौ मई को रिहा किया.

उन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी समिति के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में क़ानूनी लड़ाई लड़ी. 

अब जब सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में फ़ैसला दे  दिया है उनका कहना है कि  राम मंदिर का निर्माण सबकी सहमति से शुभ मुहूर्त में होना चाहिए. 

5 अगस्त को भूमि पूजन

लेकिन विश्व हिंदू परिषद के प्रभुत्व वाले राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सनातन हिंदू धर्म में प्रमुख स्थान रखने वाले शंकराचार्य एवं अन्य संस्थाओं को किनारे रखते हुए 5 अगस्त को भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है.

इससे पहले 9 नवम्बर 1989 को विश्व हिंदू परिषद ने वहाँ शिलान्यास  किया था.

विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्म भूमि मंदिर के पक्ष में जनमत तैयार करने के लिए लम्बा आंदोलन चलाया और क़ानूनी लड़ाई लड़ी.

हालाँकि सनातन हिंदू धर्म के एक और पंचायती संस्था निर्मोही अखाड़ा राम मंदिर के लिए क़रीब डेढ़ शताब्दी से मौक़े पर क़ानूनी संघर्ष कर रहा था, लेकिन विश्व हिंदू परिषद ने सरकार के सहयोग से उसे भी किनारे कर दिया है. 

शंकाराचार्य स्वरूपानंद

5 अगस्त को अयोध्या राम मंदिर निर्माण के आरंभ का कोई मुहूर्त नहीं

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद का वक्तव्य : 

“सनातन धर्म के मूल आधार वेद हैं। वेदों के अनुसार किए गए कर्म यज्ञ कहे जाते हैं जो पूर्णतया काल गणना पर आधारित हैं।

काल गणना और कालखंड विशेष के शुभ-अशुभ का ज्ञान ज्योतिष् शास्त्र से होता है। इसीलिए ज्योतिष् को वेदांग कहा गया है।

इसीलिए सनातन धर्म का प्रत्येक अनुयायी अपने कार्य उत्तम कालखंड में आरंभ करते हैं जिसे शुभ मुहूर्त के नाम से जाना जाता है। 

मुहूर्त वैसे तो दो घटी अर्थात् 48 मिनट का एक कालखंड है जो सूर्योदय से आरंभ होकर दिन के छोटे-बड़े होने के कारण 15 या 16 बार दोहराता है और ऐसा ही रात्रि में भी होता है।

अतः एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय के बीच के अंतराल में 30-32 मुहूर्त होते हैं। शुभ मुहूर्त को मुहूर्त चिंतामणि में क्रियाकलापप्रतिपत्ति हेतुम् कहकर कार्य सिद्धि में कारण माना गया है।

अपने हर छोटे-बड़े कार्य को शुभ मुहूर्त में सम्पन्न करने वाला सनातनी समाज आज दुःखी है कि पूरे देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र राममन्दिर बिना शुभ मुहूर्त के आरंभ होने जा रहा है – जैसी कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के माध्यम से आगामी 5 अगस्त 2020 को शिलान्यास की घोषणा की गई है। 

विदित हो कि 5 अगस्त 2020 को दक्षिणायन भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। शास्त्रों में भाद्रपद मास में गृह-मंदिरारंभ निषिद्ध है। 

विष्णु धर्म शास्त्र में स्पष्ट कहा गया है कि प्रोष्ठपादे विनश्यति माने भाद्रपद मास में किया गया शुभारंभ विनाश का कारण होता है। 

वास्तु शास्त्र का कथन है कि भाद्रपदे न कुर्यात् सर्वथा गृहम् ।

दैवज्ञ बल्लभ नाम के ग्रंथ में कहा गया है कि निः स्वं भाद्रपदे अर्थात् भाद्रपद में किया गया गृहारंभ निर्धनता लाता है।

वास्तु प्रदीप भी इसी बात को अपने शब्दों में हानिर्भाद्रपदे तथा में कहता है। वास्तु राजबल्लभ का वचन भी देखिए जो शून्यं भाद्रपदे अर्थात् भाद्रपद का आरंभ शून्य फल देता है ,कहकर भाद्रपद में इसका निषेध करता है।

यह भी कहा जा रहा है कि उस दिन अभिजित मुहूर्त होने के कारण शुभ मुहूर्त है, लेकिन यह बात वही कह सकता है जिसे इस बारे में कुछ भी पता न हो।

क्योंकि थोड़ी ज्योतिष् जानने वाले भी जानते हैं कि बुधवार को अभिजित निषिद्ध है।

मुहूर्त चिंतामणि के विवाह प्रकरण में बुधे चाभिजित्स्यात्,,, मुहूर्ता निषिद्धाः कहकर बुधवार को अभिजित् का सर्वथा निषेध कर दिया है।

 यह कहना भी बरगलाना ही है कि कर्क का सूर्य रहने तक शिलान्यास हो सकता है जबकि श्रावणे सिंहकर्क्योः  यह अपवाद श्रावण महीने तक के लिए है, भाद्रपद के लिए नहीं।

जबकि 5 अगस्त को भाद्रपद महीना है, श्रावण नहीं। 

इसी के आगे के श्लोक में कहा है भाद्रे सिंहगते माने कुछ विद्वानों का मत है कि भाद्र में सिंह राशिगत सूर्य हो तो हो सकता है पर इन कुछ विद्वानों के मत में भी कर्क के सूर्य होने पर भाद्रपद में भी शिलान्यास गृहारंभ नहीं बनता है। 

इसलिए इस घोषित तिथि में शुभ मुहूर्त कत्तई ना होने के कारण इस अवसर पर किया गया आरंभ देश को बड़ी चोट पहुंचाने वाला हो सकता है। 

स्मरण रहे कि काशी में विश्वनाथ मंदिर के आस-पास के मंदिरों को तोड़ते समय भी हमने चेताया था कि यह कार्य पूरे विश्व को समस्या में डालेगा पर बात अनसुनी करने का परिणाम सब लोग देख रहे हैं। 

अगर अयोध्या जी में आराधना स्थल अर्थात् मंदिर बनाया जाना है तो उसे शुभ मुहूर्त में शास्त्र विधान के अनुसार ही बनाया जाना चाहिए।

पर ऐसा न करके मनमानी किए जाने से यह आशंका स्पष्ट हो रही है कि वहां मंदिर नहीं संघ कार्यालय बनाया जा रहा है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles