गंगा प्रदूषण : भगवान भोलेनाथ सद्बुद्धि दें

एसटीपी घाट के बजाय बालू क्षेत्र में होना चाहिए

प्रो उदय कांत चौधरी , वाराणसी 

प्रो उदय कांत चौधरी

पंच-महाभूतों की देवरूप अवधारणा से उन्हें शरीरस्थ करते रहना कोशिका को स्थिर और दृढ रखते शक्ति-संकलन-यज्ञ  करते रहना है ।यही है गंगा- प्रदूषण-नियंत्रण-यज्ञ में शहर के पंचमहाभूतों की असंतुलंता को उत्तेजित करते रहनेंवाला STP का गंगा के बालू-क्षेत्र  में तकनीकी स्थांतरण गंगा-किनारों के समस्त-शहरों के पंचतत्वी-संतुलंता का यज्ञीयसम्मीकरण न्यूनतम खर्चा में स्थायी रूप  का प्रस्तुतिकरण है।क्या जो शरीर के आवश्यक आवश्यकता की पूर्ति बिना मांगे करें , वे  देवता हैं ?अतः पंच महाभूत , आकाश-मिट्टी-वायू-जल और-शक्ति प्रत्यक्ष रूप से देवता हैं ? इनकी पूजा करना क्या है ? क्या इनके अलग-अलग के मौलिक गुणों  को संरक्षित करना इनकी पूजा है ? इनकी पूजा से ये इच्छित फल को स्वत: कैसे देंगें ? क्या हमारे इस भावना से हमारी कोशिका ब्यवस्थित होंगीऔर प्रयास करते रहनें से कोशिका दृढ़ता से व्यवस्थित होगी और शरीर में ये पवित्र रहते सरल और दृढ़कोशिका के मध्य प्रवाहित होते शरीर के समग्रता की शक्ति की बृद्धि करेंगें ?यदि हमनें भावना और कर्तव्य से कोशिका को ब्यवस्थित करते शुद्ध पंच तत्व की प्रवाह नहीं की तो पंच-तत्वकी अधिकतम शक्ति हमें प्राप्त नहीं हो सकती ?क्या इस तरह की कर्तव्यनिष्ठा की अवज्ञा कर पंचतत्व ग्रहण करनेंवाला ^चोर^ कहलाता है ? और इस तरहके पूजा के उपरांत जो परिणाम निकलता है उसको भोगने वाला श्रेष्ठ होता है ?अत: श्रद्धा और कर्तव्य रहित पंचतत्वों को अन्तःस्थल में ग्रहण करना , पाप को ग्रहण करना है ? क्या भोलेनाथ! इसी को भगवान श्रीकृष्ण इन श्लोकों में ब्याख्या की है

*इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यग्यभाविता: । तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुंंगक्ते स्तेन एव स: ।।यग्यशिष्टाशिन: सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः । भुज्जते ते त्वधं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात् ।। गीता : 3.12-13 ।।*

*यज्ञ के द्वारा बढ़ाये हुए देवता तुम लोगोंको बिना माँगे ही इच्छित भोग निश्चय ही देते रहेंगै । इस प्रकार उन देवताओं के द्वारा दिये गए भोगों को जो पुरुष उनको बिना दिये स्वयं भोगता है , वह चोर ही है  ।यज्ञ से बचे अन्नको खानेवाले श्रेष्ठ  पुरुष सब पापोंसे मुक्त हो जाते हैं और जो पापी लोग अपना शरीर-पोषणके लिये ही अन्न खाते हैं , वे तो पाप को ही खाते हैं ।।*हे गला में नाग को इसलिये लपेटे रहनें वाले कि इसके भय से कोइ कायर-तुच्छ-अहंकारी और लालची-भक्तकी ढ़ोग रचनेवाला अशांत करनेंवाला अशांति उत्पन्न न करे , नागेश्वर नाथ ! आप कृपा कर समझाने की कृपाकिजिये की गंगा-प्रदूषण निवारण के लिये यग्य कर देवताओं की शक्ति-बढ़ाना क्या है ? और देवता हमारेइच्छित भोग , शुद्ध पंचतत्व-पंचामृत एस.टी.पी , बृक्षारोपण आदि से  कैसे करवायेंगे जिसके लिए प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्र मोदी जी नें 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किये है ?

क्या अवजल के कार्बनिक, अकार्बनिक और जैविक भारों में से केवल कार्बनिक भार को 70-80 प्रतिशत ही कम करनें वाला , वह भी  जैविक भार को बढ़ाकर , वह जल को इच्छित-मौलिक स्वरूप कैसे दे सकता है ? जब एस. टी.पी. शहरमें अवस्थित है तब उसे वायू-प्रदूषक होना ही होना है क्योंकि उससे मीथेन-आदि कितने ही गैसेस विसर्जित होते हैं ?एस टी.पी के अवजल से भूमि को सिंचित करनेंसे प्रदूषित साग-सब्जी-गेहूं-दाल आदि होते हैं । किसान चर्मरोगादियों से पीड़ित होता है ।इसे वाराणसी के दिनापुर क्षेत्र के किसानों की स्थिति से समझी जा सकती है ।इनके अतिरिक्त भूजल और सतही जल एक साथ प्रदूषित होता है ; और एस.टी.पी अवजल से नदीजल वेगकी क्षति होते हुए नदीतल में गाद जमाँ  होता है ?

अतः एस.टी.पी का आँख-बन्द कर उपयोग बिना इम्पैक्ट-एसेसमेंट का होना , यही गंगा के यज्ञ को होते यज्ञ फल का नहीं होना है  ; यही है प्रधानमंत्री जी को सांख्ययोगी होते कर्मयोगी होनें में विफल हो जाना ।इसी गंगा यज्ञ को यदि गंगाके वालू-क्षेत्र में किया जाय  जहाँ बालू की अपनी  शक्ति के अतिरिक्त सौर्य शक्ति, निर्जन-स्थान की शक्ति , तीव्र-नदीजल-प्रवाह  आदि शक्तियां एक साथ गंगा-प्रदूषण-नियंत्रण-यग्य कोसफलता प्रदान करेगी ?

यही न है सांख्ययोग और कर्मयोग का एक होना भोलेनाथ ! आप प्रधानमंत्री जी को यह ध्यान और ग्यानदिजिये और समझाइए कि जिस तरह प्रयागराज कुम्भ में करोड़ों लोगों के मल-जल की ब्यवस्थाओं का होनाबालू के कारण ही होता उसी तरह गंगा किनारे के समस्त शहरों के तीन-भागों में , सामने-और आगें और पीछेबालू-क्षेत्र शहर से नीचे स्तर पर होते हैं जहाँ शहर के अवजल सतही-ढ़ाल से , ग्रैभीटी-फोर्स से , जायेंगे ; इसतकनीकी से न्यूनतम खर्चा में स्थायी रूप से शहर से दूर पंच-तत्वों की एक साथ व्यवस्था होगी .

यही  है गंगाके प्रदूषण-नियंत्रण का कर्म योगी यज्ञ .आप उनको इस ज्ञान का ध्यान करवाने की कृपा कीजिये , गंगा-निर्मलीकरण के लिये वे बहुत परेशान हैं ?

https://soundcloud.com/ramdutt/ganga-banaras

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button